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स्कूल शिक्षा विभाग 2030 तक 100% नामांकन लक्ष्य

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 डेस्क। नरेन्‍द्र मोदी द्वारा प्रतिपादित ‘विकसित भारत 2047’ की विजन को साकार करने और आत्मनिर्भर भारत की नींव को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) स्कूल से बाहर और स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की पहचान करने और उन्हें नामांकित करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करने जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 में वर्ष 2030 तक प्री-स्‍कूल से माध्यमिक स्तर तक शत-प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। हालांकि, आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) 2023-24 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार 14-18 वर्ष की आयु के लगभग 2 करोड़ बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं, जबकि कक्षा 3-8 के लगभग 11 प्रतिशत बच्चे स्कूल से बाहर हैं और प्रतिवर्ष 5 लाख से अधिक छात्र बोर्ड परीक्षाओं में असफल हो जाते हैं। शत-प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात स्तर के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, इन बच्चों को जल्द से जल्द शिक्षा प्रणाली में वापस लाना और आगे के ड्रॉपआउट को रोकना आवश्यक है। आर्थिक, सामाजिक या भौगोलिक बाधाओं के कारण नियमित स्कूलों में जाने में असमर्थ बच्चों के लिए मुक्‍त शिक्षा एक व्यावहारिक विकल्प प्रदान करती है।

राष्ट्रीय मुक्त शिक्षा संस्थान (एनआईओएस), जो शिक्षा मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय और विश्व का सबसे बड़ा मुक्त शिक्षा बोर्ड है, मुक्‍त और दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा और कौशल विकास तक समावेशी और लचीली पहुंच प्रदान करता है, जिससे सार्वभौमीकरण, समानता और सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिलता है। विश्व के सबसे बड़े मुक्त शिक्षा बोर्ड के रूप में, एनआईओएस लचीली प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा उत्तीर्ण करने के अनेक अवसर, ऑन-डिमांड परीक्षा प्रणाली, रोजगार के अनुरूप व्यावसायिक और कौशल-आधारित पाठ्यक्रम, दिव्यांग शिक्षार्थियों के लिए समावेशी प्रावधान और अन्य राष्ट्रीय एवं राज्य बोर्डों के समकक्ष मान्यता प्राप्त प्रमाणन प्रदान करता है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में विद्यार्थियों की निगरानी और उनके सीखने के स्तर पर विशेष बल दिया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे स्कूल में नामांकित हों, नियमित रूप से उपस्थित हों और यदि वे पिछड़ गए हों या स्कूल छोड़ चुके हों तो उन्हें पढ़ाई में पिछड़ने की भरपाई करने और पुनः प्रवेश पाने के उपयुक्त अवसर प्राप्त हों। इसी को ध्यान में रखते हुए, मंत्रालय, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से, स्कूल से बाहर या स्कूल छोड़ चुके बच्चों से संपर्क करने का अभियान शुरू करने का इरादा रखता है। एनआईओएस के अधिकारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर संस्थागत सहयोग को मजबूत करने और स्कूल छोड़ चुके बच्चों के हित में काम करने के लिए एक विश्वसनीय और प्रामाणिक मुक्‍त शिक्षा प्रणाली को देश भर में बढ़ावा देने का प्रयास करेंगे।

संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों के जिला-स्तरीय सर्वेक्षणों से प्राप्त आंकड़ों की सहायता से एनआईओएस आगामी नामांकन अभियानों के लिए स्कूल से बाहर या स्कूल छोड़ चुके बच्चों की पहचान करने और उनसे संपर्क करने में सक्षम होगा। वंचित समूहों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए, एनआईओएस “एनआईओएस मित्र” कार्यक्रम शुरू करेगा, जो समुदायों को संगठित करने और नामांकन प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए डिज़ाइन की गई एक संरचित और प्रौद्योगिकी-आधारित पहल है। प्रशिक्षित प्रशिक्षक स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान करेंगे और उन्हें परामर्श देंगे, उनके नामांकन में सहायता करेंगे और शैक्षणिक मार्गदर्शन प्रदान करेंगे, जिसमें हाशिए पर रहने वाले, आदिवासी, प्रवासी, अल्पसंख्यक और आर्थिक रूप से वंचित समूहों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जवाबदेही और मापने योग्य परिणामों को सुनिश्चित करने के लिए यह कार्यक्रम एक पारदर्शी और डिजिटल रूप से निगरानी प्रणाली के अंतर्गत संचालित होगा।

मंत्रालय स्कूली शिक्षा में पहुंच, गुणवत्ता और मानकीकरण को मजबूत करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिसमें मुक्‍त शिक्षा प्रणालियों की प्रभावशीलता में सुधार करना भी शामिल है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 10,800 से अधिक अध्ययन एवं परीक्षा केंद्रों के साथ, एनआईओएस एक ऐसा मंच प्रदान करता है जो सामाजिक, आर्थिक या व्यक्तिगत परिस्थितियों के कारण लचीलेपन की आवश्यकता वाले बड़ी संख्या में शिक्षार्थियों को मुख्यधारा में लाने में सक्षम है। इन प्रयासों को आगे बढ़ाने और विश्वसनीयता एवं पारदर्शिता को मजबूत करने के लिए, मंत्रालय एनआईओएस के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर प्रत्येक ब्लॉक में कम से कम एक एनआईओएस अध्ययन एवं परीक्षा केंद्र स्थापित करने के लिए काम करेगा।

योजनाबद्ध प्रमुख हस्तक्षेपों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालय सहित पीएम श्री स्कूलों और सरकारी उच्‍च माध्यमिक विद्यालयों को एनआईओएस अध्ययन और परीक्षा केंद्रों के रूप में नामित करना;
  • राज्य मुक्त विद्यालय बोर्डों को एनआईओएस परीक्षाओं के लिए सरकारी विद्यालयों और मान्यता प्राप्त परीक्षा केंद्रों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना;
  • प्रत्येक पंचायत और नगरपालिका में सरकारी उच्‍च माध्यमिक विद्यालयों को एनआईओएस अध्ययन एवं परीक्षा केंद्र बनने के लिए प्रोत्साहित करना;

इन प्रयासों का उद्देश्य वंचितों को समावेशी, लचीली और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना और सार्वभौमिक स्कूली भागीदारी के लक्ष्य को आगे बढ़ाना है।

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