जानिए तुलसीदास और हनुमान जी से जुड़ी मान्यताएं
बड़े मंगल विशेष | संजय मिश्र, वाराणसी।
वाराणसी। ज्येष्ठ माह के बड़े मंगलवार के अवसर पर काशी स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। वाराणसी के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिने जाने वाले इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना भक्तों के संकट दूर करती है। यह मंदिर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय क्षेत्र के समीप स्थित है और इसकी स्थापना गोस्वामी तुलसीदास से जुड़ी मानी जाती है।
तुलसीदास और हनुमान जी के मिलन की कथा
लोक मान्यताओं के अनुसार, गोस्वामी तुलसीदास जब काशी में भगवान राम की भक्ति में लीन थे, तब उन्हें हनुमान जी के दर्शन प्राप्त हुए थे। कहा जाता है कि एक अलौकिक संकेत मिलने के बाद तुलसीदास एक ऐसे व्यक्ति के पीछे-पीछे जंगल क्षेत्र तक पहुंचे, जिसे वे साधारण मनुष्य समझ रहे थे। बाद में उन्होंने पहचान लिया कि वह स्वयं बजरंगबली हैं। तुलसीदास की अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर हनुमान जी ने उन्हें दर्शन दिए और वहीं विराजमान होने का आशीर्वाद दिया। इसी स्थान पर आगे चलकर संकट मोचन मंदिर स्थापित हुआ।
मिट्टी की प्रतिमा और श्रीराम का विशेष स्थान
मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा मानी जाती है। धार्मिक विश्वास के अनुसार यह प्रतिमा मिट्टी के स्वरूप में प्रतिष्ठित की गई थी। मंदिर में एक और विशेष दृश्य देखने को मिलता है, जहां हनुमान जी के समक्ष भगवान राम की प्रतिमा स्थापित है। श्रद्धालु इसे हनुमान जी की रामभक्ति का प्रतीक मानते हैं।
प्राचीन कूप भी आकर्षण का केंद्र
मंदिर परिसर में स्थित एक प्राचीन कुआं श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि यह कूप कई शताब्दियों पुराना है। यहां आने वाले भक्त इसके जल को पवित्र मानकर ग्रहण करते हैं।
हरियाली और स्वच्छता के लिए प्रसिद्ध
संकट मोचन मंदिर का वातावरण शांत और मनोहारी माना जाता है। परिसर में बड़ी संख्या में तुलसी के पौधे और छायादार वृक्ष लगाए गए हैं। साफ-सफाई और सुव्यवस्थित व्यवस्था के कारण यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है।
लड्डू का लगता है विशेष भोग
मंदिर में प्रतिदिन हनुमान जी को बेसन के लड्डुओं का भोग अर्पित किया जाता है। इसके अलावा फूलों और तुलसी मालाओं से उनका श्रृंगार किया जाता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
हनुमान बाहुक से जुड़ी मान्यता
धार्मिक परंपराओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि गोस्वामी तुलसीदास ने शारीरिक कष्ट के दौरान ‘हनुमान बाहुक’ की रचना की थी। मान्यता है कि इस रचना के पूर्ण होने के बाद उन्हें अपने कष्ट से राहत मिली।
हनुमान जयंती पर निकलती है भव्य शोभायात्रा
संकट मोचन मंदिर में हनुमान जयंती का पर्व विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर शहर के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं और पारंपरिक शोभायात्राओं का आयोजन किया जाता है। धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के कारण यह उत्सव काशी की प्रमुख परंपराओं में शामिल माना जाता है।

सच में बहुत मनमोहक लगता है।आज बड़े मंगलवार के शुभ अवसर पर श्री संकट मोचन में श्री हनुमान जी का दर्शन हुआ है।
कौन सो संकट मोर गरीब को जो तुमसे नहीं जात है टारो।
Nasai rog hare sab pira,japat nirantar Hanumant beera.
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जै बजरंग बली।
जय हनुमान
पवनसुत हनुमान की जय ।।
जय श्री राम ।।
Jay Hanuman.
Jay hanuman
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