पर्यावरण और पर्यटन के संतुलन की मिसाल है रपड़ी ईको टूरिज्म – जयवीर सिंह
लखनऊ/फिरोजाबाद। विश्व पर्यावरण दिवस पर फिरोजाबाद का रपड़ी ईको टूरिज्म चर्चा में है। कभी एक साधारण प्राकृतिक स्थल रहा रपड़ी आज पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास का सफल उदाहरण बनकर उभर रहा है। यहां प्रकृति को सुरक्षित रखते हुए पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, जिससे यह परिवारों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।
आज रपड़ी में नेचर ट्रेल, व्यूइंग प्वाइंट, सुंदर सार्वजनिक स्थल, पर्यावरण-अनुकूल सुविधाएं और सौर ऊर्जा आधारित व्यवस्थाएं मौजूद हैं, जिन्हें आसपास के प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप विकसित किया गया है। इन प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार यहां 3.47 करोड़ रुपये की नई विकास परियोजना पर काम कर रही है, जिसकी गति हाल के सप्ताहों में तेज हुई है।
जैव विविधता से रूबरू कराएगा रपड़ी
इस नए चरण में पार्क में आधुनिक इंटरप्रिटेशन सेंटर, बच्चों के लिए नेचर लर्निंग जोन, सोलर फोटोवोल्टिक सिस्टम, बेहतर पाथवे, नया प्रवेश द्वार, बलुआ पत्थर से बने बैठने के स्थान, उन्नत साइनेज और आकर्षक लैंडस्केपिंग विकसित की जा रही है। इसके अलावा बच्चों और परिवारों को प्रकृति तथा जैव विविधता से जोड़ने के लिए मगरमच्छ, डॉल्फिन, कछुआ, लकड़बग्घा और भारतीय अजगर जैसे वन्यजीवों की वास्तविक आकार की प्रतिकृतियां स्थापित की जा रही हैं। वहीं, मौजूदा समर हट को इंटरप्रिटेशन सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां आगंतुक स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र, वन्यजीवों के आवास और संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
प्रकृति के अनुरूप विकास पर जोर- जयवीर सिंह
इसको लेकर जानकारी देते हुए प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने गुरुवार को कहा कि रपड़ी राज्य में संरक्षण आधारित पर्यटन विकास का एक उभरता हुआ उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना दिखाती है कि पर्यावरण के प्रति संवेदनशील आधारभूत ढांचा विकसित करके प्राकृतिक स्वरूप को बिना नुकसान पहुंचाए पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ऐसा मॉडल विकसित कर रहा है, जिसमें पर्यटन विकास पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करता है। रपड़ी में विकास कार्यों के दौरान कम प्रभाव वाले आधारभूत ढांचे, नवीकरणीय ऊर्जा और प्रकृति आधारित गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया गया है। यहां पहले से नेचर ट्रेल, व्यूइंग एरिया, पर्यावरण-अनुकूल सुविधाएं, सौर ऊर्जा आधारित व्यवस्थाएं और विकसित सार्वजनिक स्थल मौजूद हैं। वर्तमान में चल रहे कार्य इसे परिवारों के लिए और अधिक आकर्षक प्रकृति पर्यटन स्थल बनाएंगे। यह परियोजना साबित करती है कि यदि विकास प्रकृति को ध्यान में रखकर किया जाए तो संरक्षण और पर्यटन साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं, साथ ही स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के अवसर भी पैदा होते हैं।”
रपड़ी का विकास उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म विकास बोर्ड की उस व्यापक सोच को भी दर्शाता है, जिसे वर्ष 2022 में बोर्ड के गठन के बाद अपनाया गया। इसके तहत पर्यटन को केवल घूमने-फिरने के स्थलों के विकास तक सीमित न रखकर पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता के प्रति जागरूकता और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को बढ़ावा देने का माध्यम बनाया जा रहा है।
पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि ईको टूरिज्म विकास बोर्ड ने प्रदेश में संरक्षण आधारित पर्यटन विकास के लिए एक मजबूत और समर्पित ढांचा तैयार किया है। उन्होंने कहा, “रपड़ी यह दिखाता है कि किसी प्राकृतिक स्थल का विकास उसकी पारिस्थितिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए भी किया जा सकता है। हमारा उद्देश्य केवल पर्यटन सुविधाएं तैयार करना नहीं है, बल्कि ऐसे पर्यटन स्थल विकसित करना है जो जैव विविधता संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा दें। उत्तर प्रदेश के अन्य ईको टूरिज्म स्थलों पर भी इसी तरह के संरक्षण आधारित मॉडल लागू किए जा रहे हैं, ताकि पर्यटन विकास पर्यावरणीय स्थिरता और दीर्घकालिक संरक्षण लक्ष्यों को मजबूती दे सके।”
