सड़क नहीं होने से पिवकोल गांव के ग्रामीणों का जीवन बदहाल
संजय मिश्र।
देवरिया। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले का पिवकोल गांव आज भी बुनियादी सड़क सुविधा से वंचित है। आज़ादी के सात दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी गांव तक पक्की सड़क नहीं पहुंच सकी है। बरसात के दिनों में कच्चा रास्ता कीचड़ और जलभराव से भर जाता है, जिससे ग्रामीणों का आवागमन, बच्चों की पढ़ाई और मरीजों को अस्पताल पहुंचाना तक मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार मांग उठाने के बावजूद अब तक सड़क निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
रेलवे लाइन ने बढ़ाई मुश्किलें
पिवकोल रेलवे स्टेशन के पास स्थित यह गांव रेलवे लाइन के कारण दो हिस्सों में बंटा हुआ है। रेलवे पटरी के पूर्वी हिस्से में रहने वाले लोगों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है। रेलवे के जमीन में बनी कच्ची सड़क बारिश के मौसम में कीचड़ और जलभराव से दलदल में बदल जाता है। जगह-जगह बने गहरे गड्ढों के कारण पैदल चलना भी जोखिम भरा हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग फिसलकर घायल हो जाते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों को भी इसी बदहाल रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है।
एम्बुलेंस नहीं पहुंचती, खटिया पर ढोने पड़ते हैं मरीज
ग्रामीणों के अनुसार सबसे गंभीर स्थिति तब होती है जब किसी की तबीयत अचानक बिगड़ जाती है। सड़क न होने के कारण एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। मजबूरी में मरीजों को खटिया पर लिटाकर बहुत दूर मुख्य सड़क तक ले जाया जाता है, जहां से उन्हें अस्पताल पहुंचाया जाता है। यही स्थिति अंतिम संस्कार के समय भी देखने को मिलती है, जब शव को खटिया या कंधों के सहारे मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है।
वर्षों से अधूरी है सड़क की मांग
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। उनका कहना है कि हर बरसात में गांव की स्थिति और भी बदतर हो जाती है। एक ग्रामीण ने कहा, “आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी हमारी सबसे बुनियादी जरूरत पूरी नहीं हो सकी। हर बारिश में हमें नारकीय हालात का सामना करना पड़ता है।”
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
गांव के लोगों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से पिवकोल गांव तक जल्द से जल्द पक्की सड़क का निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क बनने से न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं तक पहुंच भी आसान हो जाएगी।
