लखनऊ विधिक सेवा प्राधिकरण ने बताई स्थायी लोक अदालत की विशेषताएं
लखनऊ। प्रभारी सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ अभिषेक गुप्ता ने बताया कि स्थायी लोक अदालत, विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम-1987 के अंतर्गत गठित एक वैधानिक मंच है, जिसका उद्देश्य जन उपयोगी सेवाओं से संबंधित विवादों का सुलह एवं समझौते के माध्यम से त्वरित, सस्ता और निष्पक्ष निस्तारण सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा कि स्थायी लोक अदालत की विशेषता यह है कि यहां विवादों को आपसी सहमति और समझौते के आधार पर निपटाने का प्रयास किया जाता है। यदि किसी मामले में सुलह अथवा समझौता नहीं हो पाता है, तो स्थायी लोक अदालत को मामले के गुण-दोष के आधार पर निर्णय देने का भी विधिक अधिकार प्राप्त है। इससे आम नागरिकों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिलती है तथा समय और धन दोनों की बचत होती है।
स्थायी लोक अदालत में जन उपयोगी सेवाओं से संबंधित विभिन्न प्रकार के मामले प्रस्तुत किए जा सकते हैं। इनमें वायु, सड़क एवं जलमार्ग परिवहन सेवाओं से जुड़े विवाद, डाक, तार एवं दूरसंचार सेवाओं से संबंधित मामले, विद्युत, प्रकाश एवं जलापूर्ति संबंधी प्रकरण, स्वच्छता व्यवस्था से जुड़ी शिकायतें, अस्पताल एवं औषधालय सेवाओं के मामले, बीमा सेवाओं से संबंधित विवाद, शैक्षिक एवं प्रशिक्षण संस्थानों से जुड़े प्रकरण तथा आवास एवं भू-संपदा सेवाओं से संबंधित मामले शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि स्थायी लोक अदालत न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने का एक प्रभावी माध्यम है, जहां आम नागरिक बिना जटिल प्रक्रिया के अपने विवादों का समाधान प्राप्त कर सकते हैं। यह व्यवस्था न्यायिक प्रणाली को अधिक सुलभ, पारदर्शी और जनोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
प्रभारी सचिव ने जनसामान्य से अपील की कि वे स्थायी लोक अदालत की व्यवस्था का अधिकाधिक लाभ उठाएं तथा जन उपयोगी सेवाओं से संबंधित अपने विवादों का त्वरित, सस्ता एवं सहज प्रक्रिया के माध्यम से निस्तारण कराकर न्याय प्राप्त करें।
