लखनऊ। महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से किशोरियों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से जनपद में एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन.बी. सिंह ने बताया कि अक्सर इस कैंसर की पहचान देर से होती है, ऐसे में बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय है और इसी उद्देश्य से यह अभियान संचालित किया जा रहा है।
जनपद में 17 मार्च से वीरांगना अवन्तीबाई जिला महिला चिकित्सालय में तथा 7 अप्रैल से सभी 19 शहरी एवं ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) (बेहटा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को छोड़कर )पर एचपीवी टीकाकरण प्रारंभ कर दिया गया है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि यह तीन माह का विशेष अभियान है। इसके तहत उन किशोरियों को पात्र माना गया है, जिन्होंने अपना 14वां जन्मदिन पूरा कर लिया है, लेकिन 15 वर्ष की आयु पूरी नहीं की है। साथ ही, वे किशोरियां जो अभियान शुरू होने की तिथि से 90 दिनों के भीतर 15 वर्ष की होने वाली हैं, उन्हें भी इसमें शामिल किया गया है।
सभी पात्र किशोरियों को गार्डासिल वैक्सीन की सिंगल डोज दी जाएगी, जो एचपीवी के चार प्रमुख स्ट्रेन—06, 11, 16 और 18—से सुरक्षा प्रदान करती है। अभियान का लक्ष्य जनपद की लगभग 60 हजार किशोरियों का टीकाकरण करना है, जो कुल जनसंख्या का लगभग एक प्रतिशत है।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. अमिताभ श्रीवास्तव ने बताया कि अभियान के दौरान सभी कार्यदिवसों में सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक टीकाकरण किया जाएगा। तीन माह की अवधि पूर्ण होने के बाद यह टीका नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक बुधवार और शनिवार को उपलब्ध रहेगा।
उन्होंने बताया कि अभियान के सफल संचालन के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। टीकाकरण पूर्णतः स्वैच्छिक है और इसके लिए अभिभावकों की सहमति अनिवार्य है। अभिभावक यू-विन पोर्टल पर स्वयं पंजीकरण कर डिजिटल सहमति दे सकते हैं। इंटरनेट की उपलब्धता न होने पर लिखित सहमति ली जाएगी, जिसे बाद में पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। आयु सत्यापन के लिए जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड अथवा स्कूल आईडी कार्ड मान्य होंगे। टीकाकरण प्रमाणपत्र भी यू-विन पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकेगा।
अभियान के क्रियान्वयन में शिक्षा विभाग एवं आईसीडीएस विभाग का भी सहयोग लिया जा रहा है। जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी योगेश रघुवंशी ने बताया कि एचपीवी टीका पूर्णतः सुरक्षित है। टीकाकरण के बाद यदि बुखार, सिरदर्द, मतली या चक्कर जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं, तो पैरासिटामोल दी जा सकती है तथा पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेने की सलाह दी जाती है। इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द, सूजन या लालिमा होने पर बर्फ से सिकाई लाभकारी रहती है। अब तक किसी भी किशोरी में टीके से संबंधित गंभीर प्रतिकूल प्रभाव की सूचना नहीं मिली है।
अंत में उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसरों में से एक है, जिसका टीकाकरण के माध्यम से प्रभावी बचाव संभव है। उन्होंने सभी अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपनी बेटियों का एचपीवी टीकाकरण अवश्य कराएं, ताकि उन्हें भविष्य में इस गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखा जा सके। टीका निःशुल्क है।
