कड़ी मेहनत और लगातार संघर्ष ने बदल दी किस्मत, ऑसग्राम सीट पर दर्ज की शानदार जीत
डेस्क। लोग सच ही कहते हैं कि किसी की मेहनत कभी खाली नहीं जाती, अगर प्रयास मन से किया जाए। लगन और परिश्रम से कुछ भी हासिल किया जा सकता है। ऐसा ही कुछ करिश्मा दिखाया है पश्चिम बंगाल के ऑसग्राम विधानसभा से कलिता माझी ने। यह खबर किसी फिल्मी कहानी जैसी लग सकती है, जहां कल तक जो हाथ दूसरों के घरों में बर्तन और फर्श साफ करते थे, आज वही हाथ जनता ने अपने भविष्य की कमान और भरोसे की चाबी सौंप दी है। इस बदलाव की कहानी न सिर्फ प्रेरणादायक है, बल्कि भावनाओं से भी भरी हुई है—संघर्ष, उम्मीद और जीत का एक जीवंत उदाहरण।
पश्चिम बंगाल की ऑसग्राम (एससी) विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार कलिता माझी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार श्यामा प्रसन्ना लाहिरी को 12,535 वोटों के अंतर से पराजित किया। कलिता माझी को कुल 1,07,692 वोट मिले, जिसके साथ उन्होंने इस सीट पर कब्जा जमाया। कलिता माझी की यह जीत केवल एक राजनीतिक सफलता नहीं, बल्कि संघर्ष और लगन की मिसाल भी मानी जा रही है। कभी घरेलू कामगार के रूप में 3–4 घरों में साफ-सफाई और बर्तन धोने का काम करने वाली कलिता अपनी मेहनत से आज विधानसभा तक पहुंच गई हैं। उनकी मासिक आय पहले लगभग 2,500 रुपये थी, जिससे वे अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं।
पिछले एक दशक से अधिक समय से राजनीति में सक्रिय कलिता माझी ने अपने सफर की शुरुआत बूथ-स्तर की कार्यकर्ता के रूप में की थी। वे पंचायत चुनाव भी लड़ चुकी हैं और 2021 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा की उम्मीदवार थीं, हालांकि उस समय उन्हें करीब 41% वोट मिलने के बावजूद लगभग 12,000 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। हार के बावजूद उन्होंने राजनीति नहीं छोड़ी और लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहीं। संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने पैदल घर-घर जाकर प्रचार किया और जनता से सीधा जुड़ाव बनाया, जिसका परिणाम इस चुनाव में उनकी बड़ी जीत के रूप में सामने आया। उनकी यह सफलता एक बार फिर इस बात को दर्शाती है कि निरंतर मेहनत, लगन और जनता से जुड़ाव राजनीतिक जीवन में बड़ी उपलब्धियां दिला सकता है।
