मानवता, एकता और सद्भाव का प्रेरक गीत
वीरेंद्र कुमार मिश्र ‘विरही’
मत खींच लकीरें धरती पर सब एक रहें और नेक रहें।
जाना कुछ दिन रहकर जग से फिर क्यों हमलोग अनेक रहें।
रब ने हमको भेजा होगा कुछ सोच समझकर दुनिया में।
दिल देकर सुंदर सा हमको भेजा कहकर इस दुनिया में।
नायाब है नेमत बख्श रहे दिल के होते क्यों टेक रहे।……
बाजार मिला घरबार मिला करने को कारोबार मिला।
बल, बुद्धि, कला, कौशल देकर ऊपर वाले का प्यार मिला।
खुश रहने की वश एक शर्त मानव में विमल विवेक रहे।…….
खाओ,पीओ और मस्त रहो और अपने कर्म में व्यस्त रहो।
ईर्ष्या, मद, मत्सर, लोभ, मोह, ले अहम भला क्यों त्रस्त रहो।
मानव की दुनिया है जो तो मानवता का अभिषेक रहे।….
लेखक परिचय
वीरेंद्र कुमार मिश्र ‘विरही’
वीरेंद्र कुमार मिश्र ‘विरही’ वरिष्ठ शिक्षाविद्, साहित्यकार, कवि एवं समाजसेवी हैं। वे पूर्व प्राचार्य रह चुके हैं। उन्होंने एम.ए., बी.एड. के साथ धर्म-रत्न एवं धर्म-विशारद जैसी उपाधियाँ प्राप्त की हैं। शिक्षा, साहित्य, संगीत और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उनका उल्लेखनीय योगदान रहा है।
वे रेडियो, दूरदर्शन, चित्रपट एवं मंचीय कलाकार के रूप में भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुके हैं। वर्तमान में वे साहित्य शक्ति संस्थान के राष्ट्रीय संरक्षक, अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा (रा.) के राष्ट्रीय महासचिव तथा अखिल भारतीय सर्वजन हित पार्टी के प्रमुख महासचिव के रूप में विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के जनपद देवरिया के ग्राम–विंदवालिया (पोस्ट–नोनापार) के मूल निवासी वीरेंद्र कुमार मिश्र ‘विरही’ की साहित्यिक साधना मुख्यतः हिंदी एवं भोजपुरी काव्य के क्षेत्र में रही है। उनकी रचनाओं में प्रेम, विरह, राष्ट्रभक्ति, अध्यात्म, मानवीय संवेदनाएँ तथा सामाजिक चेतना का प्रभावशाली समन्वय देखने को मिलता है।
उन्होंने अपने लंबे शैक्षणिक जीवन में बंगाल से लेकर बिहार तक अनेक शिक्षण संस्थानों में सेवाएँ प्रदान कीं। साथ ही, साहित्य, संस्कृति और समाज सेवा के विविध क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए उन्होंने अपनी सृजनात्मक एवं सांस्कृतिक प्रतिभा का व्यापक परिचय दिया। रेडियो, दूरदर्शन और मंचीय प्रस्तुतियों के माध्यम से भी उनकी साहित्यिक अभिव्यक्ति को व्यापक पहचान मिली।
उनकी साहित्यिक यात्रा में उनकी जीवनसंगिनी का विशेष सहयोग एवं प्रेरणा रही है। उनके सतत प्रोत्साहन ने उनकी सृजनशीलता को नई ऊर्जा और निरंतरता प्रदान की। आज भी वीरेंद्र कुमार मिश्र ‘विरही’ साहित्य-सृजन, समाज सेवा तथा सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हुए अपनी लेखनी के माध्यम से समाज को सकारात्मक दिशा और प्रेरणा प्रदान कर रहे हैं।
