पंडित नारायण दत्त तिवारी।
देवरिया। मंगलवार का दिन संकटमोचन, पवनपुत्र श्री हनुमान जी की उपासना के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। यह दिन विशेष रूप से उन भक्तों के लिए महत्वपूर्ण है, जो अपने जीवन से दुख, भय, नकारात्मकता और बाधाओं को दूर करना चाहते हैं। सच्चे मन, श्रद्धा और विश्वास के साथ इस दिन बजरंगबली की आराधना करने से जीवन में अद्भुत ऊर्जा, आत्मविश्वास और साहस का संचार होता है।
हनुमान जी केवल अपार बल और बुद्धि के स्वामी ही नहीं हैं, बल्कि वे भक्ति, निष्ठा, सेवा और समर्पण के सर्वोच्च आदर्श भी हैं। उनका सम्पूर्ण जीवन भगवान श्रीराम की सेवा में समर्पित रहा। रामायण में वर्णित उनके कार्य आज भी हर भक्त के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। जब रावण माता सीता का हरण कर लंका ले गया, तब श्रीराम और लक्ष्मण उनकी खोज में वन-वन भटक रहे थे। उसी समय हनुमान जी का श्रीराम से मिलन हुआ। यह मिलन केवल एक संयोग नहीं, बल्कि भक्ति और भगवान के बीच के अटूट संबंध का प्रतीक था। हनुमान जी ने न केवल श्रीराम की सहायता करने का संकल्प लिया, बल्कि अपनी बुद्धि और शक्ति से असंभव को संभव कर दिखाया।
सीता माता की खोज में हनुमान जी ने विशाल समुद्र को एक ही छलांग में पार कर लिया। लंका पहुंचकर उन्होंने अशोक वाटिका में माता सीता को ढूंढा और उन्हें श्रीराम का संदेश देकर आश्वस्त किया कि शीघ्र ही उनकी मुक्ति होगी। यह घटना उनके साहस, धैर्य और बुद्धिमत्ता का अद्भुत उदाहरण है। लंका में रहते हुए हनुमान जी ने रावण की सेना को अपनी शक्ति का परिचय दिया। उन्होंने असंख्य राक्षसों का संहार किया और अंत में लंका को जलाकर यह संदेश दिया कि अधर्म और अहंकार का अंत निश्चित है। यह घटना न केवल उनकी वीरता को दर्शाती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि सत्य और धर्म की हमेशा विजय होती है। राम-रावण युद्ध के दौरान जब लक्ष्मण जी गंभीर रूप से घायल हो गए, तब हनुमान जी संजीवनी बूटी लाने के लिए हिमालय की ओर गए। समय कम होने के कारण वे पूरा पर्वत ही उठा लाए। उनके इस कार्य ने लक्ष्मण जी के प्राण बचाए और युद्ध की दिशा बदल दी। यह उनकी निष्ठा, तत्परता और समर्पण की पराकाष्ठा को दर्शाता है।
हनुमान जी की पूजा अत्यंत सरल लेकिन अत्यधिक प्रभावशाली मानी जाती है। मंगलवार के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और हनुमान जी के समक्ष दीप प्रज्वलित करें। उन्हें नारंगी सिंदूर अर्पित करें, जो उन्हें अत्यंत प्रिय है। चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर चोला चढ़ाना विशेष फलदायी माना जाता है। साथ ही लाल फूल, लड्डू और चमेली के पुष्प अर्पित करें तथा चमेली के तेल का दीपक जलाएं।
हनुमान चालीसा का पाठ, सुंदरकांड का श्रवण और “राम-नाम” का जाप करने से मन को शांति मिलती है और सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं। नियमित रूप से हनुमान जी की उपासना करने से व्यक्ति भय, रोग, शत्रु बाधा और नकारात्मक शक्तियों से मुक्त हो जाता है। आज के समय में भी हनुमान जी की भक्ति लोगों के जीवन में नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करती है। जो व्यक्ति सच्चे मन से उनका स्मरण करता है, उसके जीवन में कभी निराशा नहीं आती। उनकी कृपा से हर कठिनाई सरल हो जाती है और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
अतः मंगलवार का दिन केवल पूजा का अवसर नहीं, बल्कि आत्मबल, विश्वास और भक्ति को जागृत करने का एक पावन माध्यम है। श्री हनुमान जी की कृपा से हर भक्त का जीवन मंगलमय हो सकता है, बस आवश्यकता है सच्चे मन और अटूट श्रद्धा की।
मंगलवार व्रत के लाभ
माना जाता है कि मंगलवार के दिन व्रत रखने से न केवल हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है, बल्कि कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति भी मजबूत होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल ग्रह साहस, ऊर्जा, भूमि, पराक्रम और आत्मविश्वास का कारक होता है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल कमजोर होता है, तो उसे जीवन में बार-बार बाधाओं, क्रोध, निर्णयहीनता या संघर्षों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में मंगलवार का व्रत और हनुमान जी की पूजा अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।
श्रद्धा के साथ रखे गए इस व्रत से मंगल दोष शांत होता है और व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है। साथ ही, यह भी मान्यता है कि जो भक्त नियमित रूप से मंगलवार का व्रत रखते हैं और हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, उन्हें साहस, आत्मबल और सफलता की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, शनि की साढ़ेसाती या शनि दशा से पीड़ित लोगों के लिए भी मंगलवार का व्रत विशेष फलदायी माना गया है। हनुमान जी को शनि देव का कष्ट हरने वाला माना जाता है। पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, हनुमान जी ने शनि देव को कष्टों से मुक्त किया था, जिसके कारण शनि देव ने उन्हें यह वरदान दिया कि जो भी व्यक्ति हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि के दुष्प्रभावों से राहत मिलेगी।
मंगलवार के दिन व्रत रखने के साथ यदि विधिपूर्वक पूजा की जाए—जैसे सिंदूर चढ़ाना, चमेली के तेल का दीपक जलाना, लाल फूल अर्पित करना और राम नाम का स्मरण करना—तो इसके प्रभाव और भी अधिक बढ़ जाते हैं। यह व्रत व्यक्ति के जीवन में आने वाली आर्थिक, मानसिक और पारिवारिक समस्याओं को दूर करने में सहायक माना जाता है। इस प्रकार मंगलवार का व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन में संतुलन, शक्ति और शांति स्थापित करने का एक प्रभावी माध्यम भी है। नियमित श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह व्रत व्यक्ति के भाग्य को संवारने और उसे हर प्रकार की नकारात्मकता से दूर रखने में सहायक होता है।
