जंग
बीरेंद्र कुमार मिश्र “विरही”
जीत सको तो जीत दिलों को जंग जीतना अलग बात है।
धूप शरद की जीत है पहली और दूसरी कठिन रात है।
एक अगाध प्रेम का सागर लहराता रहता मस्ती में।
एक पीर पहुंचाता जाता घोर विनाश करे बस्ती में।
एक अटल विश्वास भरोसा और दूसरा कठिन घात है।…….
एक मौत का तांडव नर्तन और एक दिल का परिवर्तन।
एक लहू का दरिया देता एक नेह का मधु आवर्तन।
एक हाथ को काट फेंकता और दूसरा हाथ हाथ है।…….
एक मधुर खुशबू फूलों की एक जेठ की तपती गर्मी।
जंग हमें झुलसाती रहती प्रेम लुटाए नेह की नर्मी।
एक अकड़ बर्बादी देता एक प्रेम से झुका माथ है।……
