डेस्क। देश के 750 से अधिक जिलों में प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कारों की लोकप्रियता में तीव्र वृद्धि हुई है और प्रतियोगिता में भाग लेने वालों की संख्या भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। इसके लिए आवेदनों की संख्या 2023 में 1,216 थी जो बढ़कर 2024 में 1,588 और 2025 में 2,035 हो गई है। आईजीओटीकर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर 88 लाख से अधिक अधिकारी जुड़ चुके हैं जिन्होंने 2,000 से अधिक पाठ्यक्रमों का लाभ उठाया है।
शिकायत निवारण कार्यक्रम (सीपीजीआरएएमएस) के माध्यम से शिकायतों का निवारण 2014 में प्रति वर्ष लगभग 2 लाख शिकायतों तक था जो अब बढ़कर 25-30 लाख हो गया है। इनमें से 95 प्रतिशत से अधिक मामलों का निपटारा हो चुका है और समाधान की औसत अवधि 60 दिनों से घटकर लगभग 12 दिन रह गयी है। पेंशन सुधारों के अंतर्गत केवल 2024 में 40 लाख से अधिक पेंशनभोगियों ने चेहरे की पहचान पर आधारित डिजिटल जीवन प्रमाण पत्रों का उपयोग किया जबकि विभिन्न प्रणालियों में इसका कुल उपयोग काफी बढ़ गया है।
कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने यहां 18वें सिविल सेवा दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में इन रोचक आंकड़ों का उल्लेख किया। इस अवसर पर उन्होंने “नागरिक-केंद्रित, संस्थागत शासन” की ओर परिवर्तन पर प्रकाश डाला, सेवा प्रदान करने में सुधारों का उल्लेख किया तथा मिशन कर्मयोगी और इसके नए घटकों जैसी क्षमता-निर्माण पहलों के निरंतर विस्तार की घोषणा की। साथ ही उन्होंने व्यक्तिगत प्रोफाइलिंग के बजाय प्रतिस्पर्धी, कार्यक्रम-आधारित उत्कृष्टता की मानक कसौटी के माध्यम से प्रशासनिक प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए पुनर्गठित ढांचे की भी घोषणा की।
मंत्री ने शासन में ऐसे संरचनात्मक बदलावों पर बल दिया जिनमें “व्यक्तिगत सेवा से संस्थागत सेवा की ओर” और “नियम-आधारित” प्रशासन से “भूमिका-आधारित” प्रशासन की ओर बढ़ना शामिल है। उन्होंने लगभग 2,000 पुराने नियमों को हटाने, कुछ भर्ती प्रक्रियाओं के लिए साक्षात्कार समाप्त करने और सिविल सेवा दिवस को अधिक ज्ञान-आधारित मंच के रूप में नए स्वरूप में प्रस्तुत करने का उल्लेख किया। उत्कृष्टता पुरस्कारों के लिए मूल्यांकनके ढांचे को अधिकारियों के व्यक्तिगत प्रोफाइल के बजाय प्रमुख कार्यक्रमों के परिणामों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए पुनर्गठित किया गया है। इस अवसर पर सहायक सचिव कार्यक्रम, लगभग 90 प्रतिशत सरकारी कार्यों को कवर करने वाली डिजिटल शासन प्रणाली और वैश्विक प्रशासनिक कार्यक्रमों के आयोजन सहित अंतर्राष्ट्रीय सहयोग जैसे संस्थागत नवाचारों का भी उल्लेख किया गया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करते हुए मिशन कर्मयोगी और “कर्मयोगी प्रारंभ” जैसी पहलों के माध्यम से प्रशिक्षण और शासन सुधारों के विस्तार का संकेत दिया जिसका मुख्य उद्देश्य सिविल सेवकों को शासन संबंधी उभरती चुनौतियों के लिए तैयार करना है। उन्होंने संकेत दिया कि भारतीय प्रशासनिक मॉडलों में वैश्विक रुचि बढ़ रही है जिसके अंतर्गत मालदीव, मॉरीशस, बांग्लादेश और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश सीपीजीआरएएमएस जैसी प्रणालियों का अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह व्यापक प्रयास “विकसित भारत: अंतिम व्यक्ति तक नागरिक-केंद्रित शासन और विकास” के मूलमंत्र के अनुरूप है जिसका उद्देश्य 2047 में भारत की स्वतंत्रता की शताब्दी के लिए अगली पीढ़ी के सिविल सेवकों को तैयार करना है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “यह बदलाव प्रशासन-केंद्रित शासन से नागरिक-केंद्रित शासन की ओर है।” उन्होंने यह भी कहा कि सुधारों का उद्देश्य “अधिकतम पारदर्शिता, अधिकतम उत्तरदायित्व और समयबद्धता का अनुशासन सुनिश्चित करना” है। उन्होंने यह भी बताया कि शिकायतों की बढ़ती संख्या असंतोष में वृद्धि के बजाय निवारण प्रणालियों में बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।
ये घटनाक्रम भारत के प्रशासनिक ढांचे में चल रहे परिवर्तन को रेखांकित करते हैं जिसमें लोक सेवा सुधार के केंद्रीय स्तंभों के रूप में डेटा-संचालित मूल्यांकन, डिजिटल शासन और बड़े पैमाने पर क्षमता निर्माण को शामिल किया गया है।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मुख्य अतिथि के रूप में समारोह की अध्यक्षता की। समारोह में सरकार के शीर्ष प्रशासनिक नेतृत्व के वरिष्ठ सदस्य उपस्थित थे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकांत दास, कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन और डीएआरपीजी की सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा भी मंच पर मौजूद थीं जो वार्षिक सिविल सेवा सम्मेलन में उच्च स्तरीय संस्थागत उपस्थिति को दर्शाती हैं।
