पण्डित सुनील पाण्डेय।
चैत्र नवरात्रि को लेकर इस बार तिथियों में विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, अमावस्या उदया तिथि में होने के बावजूद प्रतिपदा तिथि के क्षय के कारण इस वर्ष नवरात्रि का आरंभ 19 मार्च से ही होगा। इसी दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त भी निर्धारित किया गया है। बताया गया है कि 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 53 मिनट तक अमावस्या रहेगी, इसके बाद प्रतिपदा तिथि प्रारंभ हो जाएगी, जो रात्रि 5 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। प्रतिपदा के क्षय होने के कारण इसी दिन से नवरात्रि का शुभारंभ माना जाएगा। श्रद्धालु सुबह 6:53 बजे से लेकर सूर्यास्त तक कलश स्थापना कर सकते हैं।
राम नवमी और हवन का समय
नवमी तिथि 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 48 मिनट से प्रारंभ होकर 27 मार्च को सुबह 10 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। ऐसे में हवन के लिए 26 मार्च को 11:48 बजे से 27 मार्च को 10:06 बजे तक का समय शुभ रहेगा। हालांकि, राम नवमी 27 मार्च को मनाई जाएगी, क्योंकि उस दिन उदया तिथि में नवमी का संयोग रहेगा।
व्रत पारणा का समय
नवरात्रि व्रत की पारणा उदया दशमी तिथि में करना शुभ माना जाता है। इस बार दशमी तिथि 28 मार्च को है, जो सुबह 8 बजकर 45 मिनट तक ही रहेगी। इसलिए व्रत पारणा सूर्योदय से लेकर सुबह 8:45 बजे तक करना उत्तम रहेगा।
व्रत रखने के विकल्प
जो श्रद्धालु चढ़ती-उतरती व्रत रखते हैं, वे 19 मार्च (प्रतिपदा) और 26 मार्च (अष्टमी) को व्रत रखेंगे। वहीं, जो लोग पूरे नौ दिन का व्रत नहीं रख पाते, वे एक दिन छोड़कर भी व्रत रख सकते हैं और पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
पाठ और पूजा का महत्व
नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है। जो लोग पूर्ण पाठ नहीं कर पाते, वे प्रतिदिन दुर्गा कवच, अर्गला स्तोत्र, कीलक स्तोत्र और सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं।
