देवरिया का प्रसिद्ध सिद्ध पीठ और चमत्कारी धाम
संजय मिश्र।
देवरिया। देवों की नगरी के नाम से प्रसिद्ध उत्तर प्रदेश का देवरिया जनपद अपनी धार्मिक और पौराणिक विरासत के लिए पूरे पूर्वांचल में जाना जाता है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में यहां घने जंगल हुआ करते थे जहां देवता तपस्या करने आते थे। इसी कारण इस क्षेत्र का नाम देवरिया पड़ा। आज भी जिले के कोने-कोने में स्थित मंदिर-मठ इस बात की गवाही देते हैं। इन्हीं में से एक है सोनू घाट-बरहज मार्ग पर स्थित बारीपुर हनुमान मंदिर, जहां हर भक्त की मुराद पूरी होने की मान्यता है।
जिला मुख्यालय से 11 किमी दूर है सिद्ध पीठ
बारीपुर हनुमान मंदिर देवरिया जिला मुख्यालय से लगभग 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सोनू घाट से बरहज की तरफ जाने वाली सड़क से करीब सौ मीटर पश्चिम दिशा में यह भव्य मंदिर बना है। सिर्फ देवरिया ही नहीं, बल्कि कुशीनगर, गोरखपुर, महराजगंज और बिहार के सीमावर्ती जिलों से भी श्रद्धालु यहां मत्था टेकने आते हैं।
स्थानीय लोग बताते हैं, “यहां सुबह 5 बजे से ही भक्तों की कतार लग जाती है। वैसे तो सप्ताह के सातों दिन भीड़ रहती है, लेकिन मंगलवार और शनिवार को तो मेले जैसा माहौल हो जाता है। दूर-दराज से आए भक्त रात से ही मंदिर परिसर में डेरा डाल देते हैं।”
बैलगाड़ी वाली कथा से जुड़ा है इतिहास
इस मंदिर का इतिहास जितना पुराना है, उतना ही रोचक भी है। दरअसल यह मुख्य मंदिर भगवान श्री नारायण जी का है। मंदिर के इतिहास से जुड़ी कथा के अनुसार, कई दशक पहले कुछ लोग हनुमान जी की विशाल प्रतिमा को बैलगाड़ी पर लादकर अपने गांव ले जा रहे थे। प्रतिमा को बहुत दूर से बनवाकर लाया गया था।
जैसे ही बैलगाड़ी बारीपुर पहुंची, बैल अचानक रुक गए। लोगों ने बहुत प्रयास किया, बैलों को आगे बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन बैलगाड़ी टस से मस नहीं हुई। दो-तीन दिन तक लोग परेशान रहे।

इसी बीच पैकौली धाम की गद्दी के पूज्य पवहारी महाराज बारीपुर आए। उन्होंने बताया कि “तीन दिन से हनुमान जी यहीं अड़े हुए हैं। यहां श्री भगवान का मंदिर है और हनुमान जी भगवान को लांघकर आगे नहीं जाएंगे। ये यहीं विराजेंगे।”
तभी से हनुमान जी की प्रतिमा यहीं स्थापित कर दी गई। मुख्य मंदिर श्री नारायण भगवान का होने के बाद भी यह स्थान बारीपुर धाम हनुमान मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
इस मंदिर की मान्यता यह है कि,यहां आने वाला कोई भी भक्त आज तक खाली हाथ नहीं लौटा। कलयुग में हनुमान जी को चिरंजीवी होने का वरदान प्राप्त है, इसलिए भक्त मानते हैं कि वे साक्षात यहीं विराजकर सबकी सुनते हैं।
प्रशासन भी रहता है मुस्तैद
मंगलवार और शनिवार को भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी मुस्तैद रहते हैं। मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। पार्किंग और पेयजल की व्यवस्था भी की गई है। जिला प्रशासन के अनुसार सावन, नवरात्रि और हनुमान जयंती पर यहां लाखों की भीड़ जुटती है।

Jai shri shita ram ji.