लखनऊ। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन मुख्यालय में बुधवार को ‘कौशल संवाद सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रमुख सचिव, व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग डॉ. हरिओम एवं मिशन निदेशक पुलकित खरे ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम में प्रदेश भर के कौशल विकास से जुड़े इंडस्ट्री ट्रेनिंग पार्टनर्स, प्रशिक्षण प्रदाता, उद्योग प्रतिनिधि एवं स्टेक होल्डर्स शामिल हुए।
सम्मेलन का उद्देश्य कौशल विकास से जुड़े सभी पक्षों के बीच सार्थक संवाद स्थापित कर योजनाओं को अधिक प्रभावी, उद्योगोन्मुखी एवं युवाओं की रोजगार आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना था। इस अवसर पर प्रशिक्षण गुणवत्ता, उद्योग सहभागिता, रोजगार, अप्रेंटिसशिप, उद्यमिता और कौशल विकास कार्यक्रमों में इनोवेशन जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा एवं विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने कहा कि कौशल विकास केवल प्रमाणपत्र देने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने का अभियान है। उन्होंने कहा कि उद्योगों को अपनी मानव संसाधन आवश्यकताओं की स्पष्ट मैपिंग करनी चाहिए और जिला स्तर पर उद्योगों तथा कौशल संस्थानों के बीच मजबूत समन्वय विकसित होना चाहिए। उन्होंने उद्योग प्रशिक्षण साझेदारों की संख्या बढ़ाने, अप्रेंटिसशिप और इंटर्नशिप को प्रोत्साहित करने तथा स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि कौशल विकास कार्यक्रमों में उद्यमिता को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए। युवाओं को केवल नौकरी के लिए नहीं, बल्कि स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने के लिए भी तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विभाग युवाओं की हैंडहोल्डिंग, बैंकिंग सहायता और उद्यमिता मार्गदर्शन के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
मिशन निदेशक पुलकित खरे ने कहा कि कौशल विकास मिशन की सफलता तभी सुनिश्चित होगी जब सभी स्टेक होल्डर्स एक साझा मंच पर आकर अपने अनुभव, चुनौतियां और सुझाव साझा करें। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष में उद्योग प्रशिक्षण साझेदारों की संख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन प्रदेश जैसे बड़े राज्य में अभी भी अधिक उद्योगों को प्रशिक्षण प्रक्रिया से जोड़ने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि उद्योगों को केवल प्रशिक्षित मैन वर्कफोर्स की मांग करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें प्रशिक्षण प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनना होगा। उद्योग यदि स्वयं प्रशिक्षण में भागीदारी करेंगे तो उन्हें अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप कुशल वर्कफोर्स उपलब्ध होगा। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान ड्रॉपआउट दर कम करने के लिए बेहतर काउंसलिंग, अभिभावकों से संवाद और प्रशिक्षण के बाद उपलब्ध अवसरों की स्पष्ट जानकारी देने पर भी जोर दिया।
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले इंडस्ट्री ट्रेनिंग पार्टनर्स सम्मानित
सम्मेलन में डिजिटल लर्निंग, लाभार्थी फीडबैक, प्रशिक्षण गुणवत्ता, ब्लेंडेड लर्निंग, उद्योग-आधारित प्रशिक्षण मॉडल और जिला स्तर पर मांग एवं आपूर्ति की मैपिंग जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए, जिन पर विभागीय अधिकारियों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए आवश्यक सुधारों का आश्वासन दिया। कार्यक्रम के दौरान UPSDM के साथ लंबे समय से जुड़े और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले इंडस्ट्री ट्रेनिंग पार्टनर्स को सम्मानित भी किया गया। इनमें स्किल्ड टेलरिंग इंस्टीट्यूट बाय रेमंड, JITM Skills Private Limited (Healthcare), VLCC Healthcare (Beauty & Wellness), U2L Learning Solutions Limited तथा Nalanda Engicon Private Limited शामिल रहे।
