DBT निदान केंद्र का उद्घाटन
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) में पैथोलॉजी विभाग की नवीनीकृत स्नातक (UG) एवं स्नातकोत्तर (PG) प्रायोगिक प्रयोगशाला के साथ DBT निदान केंद्र का उद्घाटन किया गया। इस पहल का उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा को आधुनिक बनाना और आनुवंशिक रोगों की समय पर पहचान को बढ़ावा देना है।
विद्यार्थियों को मिलेगा बेहतर शिक्षण वातावरण
उद्घाटन के दौरान कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने कहा कि नई प्रयोगशाला में किए गए आधुनिक सुधार छात्रों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे। इससे एमबीबीएस और पीजी विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए अधिक उन्नत वातावरण मिलेगा।
थैलेसीमिया जांच पर रहेगा विशेष फोकस
नए DBT निदान केंद्र के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और उनके पतियों की थैलेसीमिया स्क्रीनिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे वंशानुगत बीमारियों की समय रहते पहचान और रोकथाम में मदद मिलेगी।
नवजात शिशुओं की होगी मुफ्त स्क्रीनिंग
केंद्र में नवजात शिशुओं के लिए कई महत्वपूर्ण आनुवंशिक रोगों की जांच निःशुल्क की जाएगी। इनमें शामिल हैं:
- जी-6-पीडी (G6PD) की कमी
- जन्मजात हाइपोथायरॉयडिज्म
- गैलेक्टोसीमिया
- जन्मजात एड्रिनल हाइपरप्लासिया
विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती चरण में इन बीमारियों की पहचान से प्रभावी उपचार संभव हो सकेगा।
कई विभाग मिलकर चला रहे परियोजना
पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेश बाबू ने बताया कि यह परियोजना विभिन्न विभागों के सहयोग से संचालित की जा रही है। इसमें पैथोलॉजी, बाल रोग, क्लिनिकल हीमैटोलॉजी तथा प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की सक्रिय भागीदारी है।
केंद्र सरकार के सहयोग से स्थापित हुई सुविधा
परियोजना की प्रधान अन्वेषक डॉ. मिली जैन के अनुसार, यह केंद्र जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT), भारत सरकार के अनुदान और विश्वविद्यालय प्रशासन के सहयोग से स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य आम लोगों को उन्नत जांच सुविधाएं उपलब्ध कराना और आनुवंशिक रोगों की रोकथाम को बढ़ावा देना है।
स्वास्थ्य जागरूकता पर दिया गया जोर
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने समय पर जांच और रोकथाम के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए शुरुआती स्क्रीनिंग बेहद आवश्यक है। समारोह में विश्वविद्यालय के चिकित्सक, संकाय सदस्य और अन्य अतिथि भी मौजूद रहे।
