141 हॉटस्पॉट क्षेत्र हुए बाल श्रम मुक्त
लखनऊ। अंतर्राष्ट्रीय बालश्रम निषेध दिवस के अवसर पर इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान लखनऊ में श्रम एवं सेवा योजन विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा एक विशेष जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उददेश्य बालश्रम उन्मूलन के प्रति जन जागरूकता बढ़ाना तथा बच्चों की शिक्षा सुरक्षा एवं समग्र विकास के अधिकारों के प्रति समाज को संवेदनशील बनाना है। इसके साथ ही प्रदेश सरकार के संकल्प पत्र के क्रम में वर्ष 2027 तक उत्तर प्रदेश को बालश्रम मुक्त बनाने के लक्ष्य के प्रति जनसहभागिता को प्रोत्साहित किया गया और बालश्रम निषेध संबंधी विधिक प्रावधानों की जानकारी भी उपलब्ध करायी गई। इस अवसर पर प्रदेश के 15 जनपदों के 141 हॉट-स्पॉट-क्षेत्रों को बाल श्रम मुक्त घोषित किया गया।
15 जिलों को दिसंबर 2026 तक बाल श्रम मुक्त बनाने की तैयारी
बतौर मुख्य अतिथि, श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि प्रदेश सरकार बाल श्रम उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध है। प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना तथा उनके शैक्षिक, बौद्धिक एवं शारीरिक विकास को सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। बाल श्रम में संलिप्त बच्चों को मुक्त कराकर विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जा रहा है तथा उनके परिवारों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है, ताकि उनके बच्चे बालश्रम की ओर उन्मुख न होकर अपने भविष्य के लिए ही चिन्तित रहे। उन्होंने कहा कि श्रम विभाग एवं सहयोगी संस्थाओं के संयुक्त प्रयासों से प्रदेश के 15 जनपदों को दिसंबर 2026 तक बाल श्रममुक्त बनाए जाने की कार्यवाही चल रही है तथा सरकार ने वर्ष 2027 तक पूरे उत्तर प्रदेश को बाल श्रम मुक्त बनाने का संकल्प लिया है।

मंत्री ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि वर्ष 2027 तक प्रदेश को बालश्रम मुक्त कर देना है। इसके लिए हरसंभव प्रयास किये जायेंगे, ताकि हमारे देश के भविष्य नौनिहालों का भविष्य उज्ज्वल हो सके। यही कारण है कि सरकार द्वारा अटल आवसीय विद्यालय संचालित किये जा रहे है, जिसमें वो समस्त सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही है जो उच्चकाटि के विद्यालयों में है, जहॉ श्रमिक का बच्चा शिक्षा प्राप्त कर अपने व अपने पारिवार का सपना साकार कर सके।
प्रमुख सचिव, श्रम एवं सेवायोजन, डॉ० एम0 के0 शन्मुगा सुन्दरम ने कहा कि आज 141 शहरी वार्डों एवं ग्राम पंचायतों को बाल श्रम मुक्त घोषित किया जा रहा है। उन्होंने झांसी मंडल को विशेष रूप से बधाई दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश को वर्ष 2027 तक बाल श्रम मुक्त बनाने के लक्ष्य के तहत प्रथम चरण में 15 जनपदों को दिसंबर 2026 तक बाल श्रम मुक्त किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश में कुल 543 हॉट-स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जहां प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से बच्चे कार्यरत पाए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2018-19 में 227, वर्ष 2021-22 में 281 तथा वर्ष 2022-23 में 115 हॉट-स्पॉट को बाल श्रम मुक्त कराया जा चुका है।
20 हजार गांव बनेंगे ‘सुरक्षित बाल ग्राम’: भुवन ऋभु
श्रम आयुक्त उत्तर प्रदेश मार्कण्डेय शाही ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश को बाल श्रम मुक्त घोषित करने के लिए सभी विभागों और हितधारकों को मिलकर कार्य करना होगा। केवल श्रम विभाग के प्रयासों से यह लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता। झांसी मंडलायुक्त विमल कुमार दुबे ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार झांसी जनपद के सम्पूर्ण ग्रामीण क्षेत्र को बाल श्रम मुक्त घोषित किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों ने भी अपने जीवन में आए सकारात्मक परिवर्तनों को साझा किया। उन्होंने बताया कि पहले पारिवारिक मजबूरियों के कारण उन्हें कार्य करना पड़ता था, लेकिन अब वे नियमित रूप से विद्यालय जा रहे हैं। सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अशोक कुमार द्वारा बाल श्रम उन्मूलन एवं पुनर्वास विषय पर निजामाबाद (आंध्र प्रदेश) मॉडल का प्रस्तुतीकरण किया गया, जिसमें उन्होंने बताया कि किस प्रकार उनके प्रयासों से निजामाबाद को बाल श्रम मुक्त घोषित किया गया।
कार्यक्रम में जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा कि “मैं उत्तर प्रदेश सरकार को वर्ष 2027 तक राज्य को बाल श्रम मुक्त बनाने के संकल्प के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ। यह पहल विकसित भारत के निर्माण तथा प्रत्येक बच्चे के संरक्षण, शिक्षा और गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य सरकार के सहयोग से हम उत्तर प्रदेश के 20,000 से अधिक गांवों को ‘सुरक्षित बाल ग्राम’ के रूप में विकसित करेंगे।”
बाल श्रम उन्मूलन पर पैनल डिस्कशन का आयोजन
इससे पूर्व मुख्य अतिथि द्वारा कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश के उपरांत प्रदेश के 15 जनपदों यथा-बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, फतेहपुर, सिद्धार्थनगर, सोनभद्र, चन्दौली, चित्रकूट, कानपुर नगर, कानपुर देहात, फर्रूखाबाद, औरैया, इटावा, कन्नौज एवं गोंडा की प्रदर्शनी-स्टॉल का भ्रमण किया गया। इनमें बाल श्रम से मुक्त किए जा रहे हॉट-स्पॉट क्षेत्रों का विवरण तथा बाल श्रम उन्मूलन एवं पुनर्वास हेतु किए जा रहे प्रयासों को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ तथा सभी मंचासीन अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया।
कार्यक्रम का स्वागत उद्बोधन सौम्या पाण्डेय, अपर श्रमायुक्त उत्तर प्रदेश द्वारा किया गया। उन्होंने अपने उद्बोधन में मंचासीन अतिथियों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों, एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन, ब्रिटिश एशियन ट्रस्ट के प्रतिनिधियों तथा प्रदेश के 15 जनपदों से आए प्रतिभागियों का स्वागत किया। इसके उपरांत बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों की सफलता की कहानियों पर आधारित वीडियो का प्रदर्शन किया गया, जिसमें बताया गया कि किस प्रकार पूर्व में बाल श्रम में संलग्न बच्चे अब विद्यालयों में अध्ययनरत हैं।
कार्यक्रम में मंत्री अनिल राजभर द्वारा प्रदेश के 15 जनपदों के 141 हॉट-स्पॉट क्षेत्रों तथा झांसी जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों को बाल श्रम मुक्त घोषित किया गया। साथ ही बाल श्रमिक विद्या योजना से लाभान्वित बच्चों एवं उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के पंजीकृत लाभार्थियों को हितलाभ वितरित किए गए। इस अवसर पर डिजिटल लेबर चौपाल का भी उद्घाटन किया गया।
कार्यक्रम में सचिव, उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड पूजा यादव, निदेशक सेवायोजन नेहा प्रकाश, निलेश कुमार सिंह, विशेष सचिव, कुनाल सिल्कू, विशेष सचिव, कल्पना श्रीवास्तव, अपर श्रमायुक्त लखनऊ, शमीम अख्तर, अपर श्रमायुक्त कानपुर, राकेश द्विवेदी, अपर श्रमायुक्त नोएडा, शेर सिंह, उप श्रमायुक्त, विभिन्न विभागों के अधिकारीगण, श्रम विभाग के अधिकारी, ब्रिटिश एशियन ट्रस्ट, एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के प्रतिनिधि तथा प्रदेश के 15 जनपदों से आए लगभग 1000-1200 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का संचालन सैय्यद रिजवान अली, राज्य समन्वयक द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अन्त में एक Panel Discussion का आयोजन किया गया। जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आये पैनेलिस्टों ने प्रतिभाग किया। Panel Discussion दो बिन्दुओं पर किया गया।
