TN

TotaRam News

What's Hot

Kashi Panchkoshi Yatra: भगवान शिव की नगरी वाराणसी की मोक्षदायिनी परिक्रमा

Table of Content

मणिकर्णिका घाट से शुरू होती है काशी पंचकोशी यात्रा, जानें इसका धार्मिक महत्व

“वाराणसी से संजय मिश्र की रिपोर्ट”

वाराणसी। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में पंचकोशी यात्रा का विशेष महत्व है। काशी की पावन धरती पर पुरुषोत्तम मास यानी अधिक मास के अवसर पर पंचकोशी परिक्रमा पूरे धार्मिक उल्लास और आस्था के साथ सम्पन्न हो रही है।

भगवान शिव और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम से जुड़ी यह प्राचीन परंपरा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, तप, संयम और मोक्ष की ओर ले जाने वाली साधना मानी जाती है। हजारों श्रद्धालु नंगे पैर काशी की परिधि की परिक्रमा करते हुए धर्म और भक्ति के इस अनूठे अनुष्ठान में सहभागी बन रहे हैं। स्कंद पुराण के काशी खंड में वर्णित यह यात्रा पाँच कोस यानी लगभग 15 किमी के दायरे में बसे पवित्र काशी क्षेत्र की परिक्रमा है। मान्यता है कि भगवान शिव ने काशी को अपने त्रिशूल पर धारण किया है। इसलिए इस सीमा के भीतर की गई यह यात्रा मोक्षदायिनी मानी जाती है।

धार्मिक आधार और मान्यता

पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव से काशी का महत्व पूछा था। तब शिव ने बताया कि काशी मंडल की सीमा में 108 शिवलिंग स्थापित हैं। इन सभी के दर्शन का फल एक साथ पंचकोशी यात्रा से मिलता है। मान्यता यह भी है कि इस यात्रा के दौरान यात्री को काशी की सीमा लांघनी नहीं चाहिए। यदि सीमा लांघ दी तो यात्रा खंडित मानी जाती है। इसलिए मार्ग में जगह-जगह सीमा स्तंभ लगे हैं।

भोर के चार बजे से ही मणिकर्णिका घाट पर सन्नाटा चीरती एक आवाज़ गूँजने लगती है, “बोलो काशी विश्वनाथ की जय”। पैरों में हौसला और आँखों में आस्था लिए हजारों लोगों का सैलाब गंगा में डुबकी लगाता है। ये वो यात्री हैं जो अगले पाँच दिन तक काशी को नापेंगे। न मीटर से, न किलोमीटर से, बल्कि अपने विश्वास से।

पाँच दिन, पाँच पड़ाव, एक शहर का दिल

“पंचकोशी यात्रा के दौरान श्रद्धालु प्रतिदिन लगभग 16 किलोमीटर की पदयात्रा करते हैं और रात्रि विश्राम निर्धारित पड़ावों पर करते हैं।”

पहला दिन: कंडवा का कर्दमेश्वर, जहाँ आँसुओं से बना कुंड और गुप्तकाल की छाप

मणिकर्णिका से संकल्प लेकर टोली जब कंडवा पहुँचती है तो सूरज सिर पर होता है। यहाँ का कर्दमेश्वर महादेव मंदिर इस मार्ग का सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण पड़ाव है। पुरातात्विक रूप से यह मंदिर 10वीं शताब्दी का है, जबकि आसपास की कुछ संरचनाएँ गुप्त काल यानी चौथी से छठी शताब्दी की मानी जाती हैं।

मान्यता है कि यहाँ के स्वयंभू मिट्टी के शिवलिंग की स्थापना प्रजापति के पुत्र और ब्रह्मा के मानस पुत्र ऋषि कर्दम ने की थी। मंदिर के पास ही कर्दम कुंड है। कहा जाता है कि यह कुंड ऋषि कर्दम के तप के समय उनके आँसुओं से बना था। ऐतिहासिक रूप से इस विशाल आयताकार तालाब का निर्माण 18वीं शताब्दी में बंगाल की नटोर रियासत की रानी भवानी ने करवाया था।

परिसर में विरुपाक्ष लिंग, नीलकंठेश्वर, यक्षेश्वर, सोमनाथेश्वर के साथ कर्दम कूप भी है। सोमनाथेश्वर कुएँ में भक्त अपना प्रतिबिंब देखते हैं और मानते हैं कि उनका जीवन सुरक्षित है। यहाँ गणेश, पार्वती, विष्णु, सूर्य सहित कई देवी-देवताओं की प्राचीन मूर्तियाँ हैं।

भक्त कर्दम कुंड में स्नान कर भगवान कर्दमेश्वर को जौ, धान, गेहूँ, हरी मसूर, काली मसूर और तिल के साथ बिल्व पत्र व गंगाजल अर्पित करते हैं। यात्री मंदिर के बाहर खेत में दरी बिछाकर रात काटते हैं। जमीन काशी की है, तो बिस्तर भी काशी ही देगी।

दूसरा दिन: भीमचंडी, जहाँ दुर्गा का उग्र रूप और पांडवों की छाप

कर्दमेश्वर के बाद अगला पड़ाव दुर्गा के उग्र रूप को समर्पित भीमचंडी देवी का मंदिर है। यहाँ चंडिकेश्वर शिव का मंदिर भी स्थित है। मान्यता है कि अज्ञातवास के समय भीम ने यहाँ देवी की आराधना की थी। मंदिर परिसर में पांडवों की पाँच मूर्तियाँ और गंधर्व सागर कुंड है। रास्ता खेतों से होकर गुजरता है। देवी के दरबार में पहुँचते पहुँचते पाँव में छाले पड़ जाते हैं, पर चेहरे पर थकान नहीं होती।

तीसरा दिन: रामेश्वर, वरुणा तट पर राम की तपस्या

भीमचंडी से रामेश्वर तक का 28 किमी का मार्ग यात्रा का सबसे लंबा हिस्सा है। वरुणा नदी के किनारे स्थित रामेश्वर महादेव मंदिर में मान्यता है कि रावण वध के बाद भगवान राम ने यहाँ तपस्या की और ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति के लिए शिवलिंग स्थापित किया। इसलिए इस जगह को काशी का रामेश्वरम भी कहते हैं। इस मंदिर के पास ही तुलजा भवानी का मंदिर स्थित है। तुलजा भवानी देवी दुर्गा का ही एक रूप हैं और वीर छत्रपति शिवाजी महाराज की कुल देवी मानी जाती हैं।

चौथा दिन: शिवपुर में पांडवों की छाप

रामेश्वर से शिवपुर आते आते यात्री को लगता है कि वह काशी को अब समझने लगा है। पंच पांडव मंदिर में पाँचों भाइयों की प्रतिमाएँ हैं। बुजुर्ग बताते हैं कि महाभारत के बाद पांडव भी मोक्ष के लिए काशी आए थे।

पाँचवाँ दिन: कपिलेश्वर, पिता-पुत्र की अक्ष रेखा पर यात्रा पूर्ण

पाँच दिवसीय तीर्थयात्रा का अंतिम पड़ाव विशाल तालाब के किनारे स्थित कपिलेश्वर महादेव मंदिर है। यहाँ के शिवलिंग की स्थापना ऋषि कर्दम के पुत्र कपिल मुनि ने की थी। आश्चर्य की बात है कि कर्दमेश्वर और कपिलधारा मंदिर दोनों एक ही 12 किमी लंबी अक्ष पर स्थित हैं। यही रेखा काशी की पश्चिमी सीमा तय करती है, जबकि पूर्वी सीमा गंगा नदी बनाती है।

अंतिम दिन कपिलधारा कुंड में स्नान कर जब यात्री वापस मणिकर्णिका पहुँचता है, तो वह वही नहीं रहता जो पाँच दिन पहले चला था। ज्ञानवापी में साक्षी विनायक को प्रणाम कर वह गवाही दिलवाता है कि उसने यात्रा पूरी की।

यह उस भरोसे का उत्सव है जो काशी को काशी बनाता है। रास्ते भर गाँव वाले भंडारा लगाते हैं। कोई पानी पिलाता है, कोई पैर दबाता है। जाति, धर्म, अमीरी, गरीबी, सब इस 80 किमी के रास्ते में पीछे छूट जाते हैं। बचता है सिर्फ एक नाम, विश्वनाथ। पंचकोशी यात्रा बताती है कि काशी नक्शे पर सिर्फ एक बिंदु नहीं है। वह एक अनुभव है। और उस अनुभव को पाने के लिए एक बार नंगे पाँव चलना पड़ता है।

totaramnews1@gmail.com

totaramnews1@gmail.com http://totaram.news

9 thoughts on “Kashi Panchkoshi Yatra: भगवान शिव की नगरी वाराणसी की मोक्षदायिनी परिक्रमा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News

Trending News

Editor's Picks

खरीफ-2026 में फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 10 सितंबर तक बढ़ी

योगी सरकार के अनुरोध पर केंद्र ने बढ़ाई समयसीमा लखनऊ। उत्तर प्रदेश के किसानों के हित में राज्य सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार ने खरीफ 2026 मौसम के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एवं चयनित जनपदों में संचालित पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत ऋणी कृषकों के फसल बीमा कराने की अंतिम...

AIIA ने Ayurveda Day 2026 से पहले शुरू की ‘Ayurvarta’ Digital Series, आयुर्वेद पर होगा विशेषज्ञों से संवाद

पहली कड़ी में 23 सितंबर को आयुर्वेद दिवस की निश्चित तिथि पर विशेष विमर्श नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली ने ‘आयुर्वार्ता’ नामक विशेष डिजिटल संवाद श्रृंखला की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य आयुर्वेद के प्रामाणिक ज्ञान, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और समकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था में इसकी प्रासंगिकता को देश-विदेश के व्यापक जनसमुदाय तक...

खुन खुन जी गर्ल्स पी.जी. कॉलेज में राज्य स्तरीय युवा महोत्सव का आयोजन

Lucknow में राज्य स्तरीय युवा महोत्सव ‘हौसलों की उड़ान 2026’ का आयोजन, मंत्री असीम अरुण हुए शामिल लखनऊ। प्रदेश के समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने मंगलवार को लखनऊ स्थित खुन खुन जी गर्ल्स पी.जी. कॉलेज में आयोजित राज्य स्तरीय युवा महोत्सव ‘हौसलों की उड़ान 2026’ में मुख्य अतिथि के रूप में...

UP RERA: सितंबर 2026 से QPR के साथ डिजिटल होंगे आर्किटेक्ट, इंजीनियर और CA के प्रमाणपत्र

आर्किटेक्ट, इंजीनियर और CA के सर्टिफिकेट होंगे डिजिटल लखनऊ/गौतमबुद्ध नगर। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (यूपी रेरा) ने रियल एस्टेट परियोजनाओं की प्रगति से संबंधित जानकारी को अधिक पारदर्शी, सटीक और अपडेट रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब 30 सितंबर 2026 को समाप्त होने वाली तिमाही से प्रमोटरों को अपने...

लखनऊ में ‘नमन’ कथक समारोह 2026: पं. लच्छू महाराज की स्मृति में ख्यातिप्राप्त कलाकारों ने दी शानदार प्रस्तुतियां

कथक प्रस्तुतियों से यादगार बना ‘नमन’ लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कला संवर्धन-संरक्षण की नीति के अनुपालन में एवं संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह की प्रेरणा व मार्गदर्शन में तथा उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह एवं निदेशक राज कुमार की कुशल परिकल्पना एवं संयोजन में उत्तर...

TN

TOTARAM News

तोताराम न्यूज़ – सच्ची, सरल और ट्रेंडिंग  खबरों का नया ठिकाना।
यहाँ हर खबर मिलेगी बिना तोड़-मरोड़ के, सीधे जनता की आवाज़ के साथ।.

क्विक लिंक्स

पॉपुलर कैटेगरीज़

अवश्य पढ़ें

©2025– TotaRam.news All Right Reserved.