संग्रहालयों में बढ़ रही युवाओं की रुचि, एक साल में 85 हजार छात्रों ने किया भ्रमण
लखनऊ। दुनिया के कई हिस्से जहां युद्ध, संघर्ष और सांस्कृतिक विरासतों के विनाश की त्रासदी झेल रहे हैं, वहीं भारत अपनी समृद्ध धरोहरों को सहेजकर विश्व के सामने सांस्कृतिक संरक्षण का सकारात्मक और प्रेरणादायक मॉडल प्रस्तुत कर रहा है। यह बात उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर मंगलवार को लखनऊ स्थित राज्य संग्रहालय में आयोजित कार्यक्रम में कही। इस दौरान उन्होंने पाश्चात्य मूर्तिकला वीथिका का लोकार्पण, ‘संग्रहालय पुरातत्व पत्रिका-2026’ का विमोचन तथा ‘आदियोगी शिव: ए जर्नी इन कॉस्मिक इंडिगो’ टेक्सटाइल प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि ‘संग्रहालय केवल प्राचीन वस्तुओं को संरक्षित रखने का केंद्र नहीं है, बल्कि देश की सभ्यता, संस्कृति और इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में युवाओं का अपनी जड़ों और विरासत से जुड़ना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से सरकार संग्रहालयों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के साथ-साथ बच्चों और युवाओं के लिए अधिक सरल, आकर्षक और इंटरैक्टिव बना रही है। उन्होंने बताया कि छुट्टी के दिनों में संग्रहालयों में नि:शुल्क प्रवेश की व्यवस्था की गई है, ताकि अधिक से अधिक लोग यहां आकर अपनी संस्कृति को करीब से जान सकें।’ पर्यटन मंत्री ने इस अवसर पर ‘विजिट माय स्टेट’ अभियान का भी उल्लेख किया, जिसके माध्यम से लोगों को अपने ही प्रदेश की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यटन धरोहरों को देखने और समझने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इस दौरान उन्होंने प्रतियोगिताओं में विजयी विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया।
कार्यक्रम में प्रसिद्ध कलाकार संगीता गुप्ता ने ‘आदियोगी शिव: ए जर्नी इन कॉस्मिक इंडिगो’ प्रदर्शनी के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि नील यानी इंडिगो का भारतीय इतिहास और महात्मा गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन से गहरा संबंध रहा है। उन्होंने बताया कि भगवान शिव के स्वरूप में स्त्री और पुरुष दोनों ऊर्जा का अद्भुत संतुलन दिखाई देता है। इसी अवधारणा को ध्यान में रखते हुए खादी के वस्त्रों पर नील रंग से आदि शंकराचार्य रचित ‘अर्धनारीश्वर स्तोत्र’ को रचनात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह विशेष टेक्सटाइल प्रदर्शनी 19 मई से 19 जून 2026 तक राज्य संग्रहालय की अस्थाई वीथिका में आम लोगों के लिए लगाई गई है।
अपर निदेशक संस्कृति निदेशालय सृष्टि धवन ने कहा कि इस वर्ष अब तक लगभग 85 हजार विद्यार्थियों ने राज्य संग्रहालय का भ्रमण किया है, जो युवाओं में संग्रहालयों और सांस्कृतिक धरोहरों के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि संग्रहालयों को शैक्षिक और रचनात्मक गतिविधियों का केंद्र बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं राज्य संग्रहालय, लखनऊ के निदेशक डॉ विनय कुमार सिंह ने कहा कि, संग्रहालय अतीत, वर्तमान और भविष्य से संवाद करते हैं। जहां यह अतीत का संरक्षक, वर्तमान का शिक्षक है वही यह भविष्य के लिए प्रेरणा का स्रोत है ।
राज्य संग्रहालय और लोक कला संग्रहालय, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतर विद्यालय निबंध प्रतियोगिता, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता और विश्वविद्यालय स्तरीय कैनवास पेंटिंग प्रतियोगिता के विजेताओं को प्रमाण पत्र और पुरस्कार प्रदान किए गए। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में सरस्वती विद्यालय कन्या इंटर कॉलेज, लखनऊ की नेहा रावत ने प्रथम, अम्बुज ने द्वितीय और वैष्णवी यादव ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। निबंध प्रतियोगिता में बाल निकुंज इंटर कॉलेज, मड़ियांव के वीरेंद्र प्रथम, भूमि वर्मा द्वितीय और दिव्या वर्मा तृतीय स्थान पर रहीं। वहीं कैनवास पेंटिंग प्रतियोगिता में कॉलेज ऑफ आर्ट, लखनऊ के हर्षित शाक्य ने प्रथम, गोयल इंस्टीट्यूट की इशिका यादव ने द्वितीय और टेक्नो ग्रुप ऑफ हायर स्टडीज के सर्वजीत ने तृतीय स्थान हासिल किया। कार्यक्रम में विशेष सचिव संस्कृति विभाग संजय सिंह, भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह, प्रो. राजीव नयन उपस्थित रहे।
