TN

TotaRam News

What's Hot

नीति आयोग ने डीपीआई@2047 प्रारूप प्रस्तुत किया, समावेशी विकास पर जोर

Table of Content

डेस्क। प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा के नियम बदल रहे हैं। वर्तमान में लाभ केवल नवाचार से ही नहीं अपितु यह तेजी से विभिन्न क्षेत्रों, संस्थानों और पारिस्थितिकी तंत्रों में नवाचार को जोड़ने और फिर उसे व्यापक जनसमूह तक पहुंचाने की क्षमता पर निर्भर करता है। इस नए परिदृश्य में डिजिटल रेल का महत्व पहले से कहीं अधिक है। यही वह माध्यम है जो विचारों, अनुप्रयोगों और सेवाओं को पायलट प्रोजेक्ट से राष्ट्रव्यापी प्रभाव तक ले जाने में सक्षम बनाता है।
इसी संदर्भ में, नीति आयोग ने 27 अप्रैल 2026 को विकसित भारत के लिए डीपीआई@2047 प्रस्‍तुत किया। यह एक रणनीतिक प्रारूप है और समावेशी, गैर-रैखिक एवं उत्पादकता-आधारित विकास के चालक के रूप में भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना यात्रा के अगले चरण को रेखांकित करता है।
इस प्रारूप का अनावरण नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी और सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने नीति आयोग की मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी निधि छिब्बर और मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन की उपस्थिति में किया। नीति आयोग की विशिष्ट फेलो देबजानी घोष, एकस्टेप फाउंडेशन के सह-संस्थापक और मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी शंकर मरुवाड़ा और अन्य विशिष्ट अतिथि एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में उद्योग जगत के नेताओं, स्टार्टअप्स और विकास भागीदारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जो भारत के डिजिटल परिवर्तन के अगले चरण के प्रति मजबूत सामूहिक प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
एकस्टेप फाउंडेशन और डेलॉयट के साथ साझेदारी में विकसित प्रारूप, देश के डिजिटल परिवर्तन के लिए दो चरणों का मार्ग निर्धारित करता है: डीपीआई 2.0 (2025-2035) व्यापक स्तर पर आजीविका-आधारित विकास को गति देने के लिए, और उसके बाद डीपीआई 3.0 (2035-2047) व्यापक समृद्धि को सक्षम बनाने के लिए है। तात्कालिक ध्यान डीपीआई 2.0 पर है।
डीपीआई 2.0 के अंतर्गत प्रारूप में एमएसएमई, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में संरचनात्मक बाधाओं को दूर करने के लिए आठ क्षेत्रीय परिवर्तनों की पहचान की गई है, साथ ही ऋण, विकेंद्रीकृत ऊर्जा और लाभ वितरण जैसे प्रणालीगत समर्थकों को मजबूत किया गया है। उद्देश्य को परिणामों में बदलने के लिए, इसमें चार कार्यान्वयन संबंधी अनिवार्यताओं की रूपरेखा दी गई है: जिला-आधारित मांग एकत्रीकरण, प्रौद्योगिकी उद्यमिता को बढ़ावा देना, एआई का लाभ उठाना और बेहतर डेटा उपयोग, डिजिटल लेनदेन, मजबूत मानव क्षमता और एआई के लोकतंत्रीकरण के माध्यम से अंतर-क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना।
मूल रूप से, डीपीआई 2.0 का उद्देश्य देश के डिजिटल नेटवर्क को पहचान, भुगतान और कल्याण से आगे बढ़ाकर आजीविका, उत्पादकता और बाजार पहुंच के मुख्य आधारों तक विस्तारित करना है। यह इस बात को दर्शाता है कि आने वाले वर्षों में विकास किस प्रकार होगा: केवल नई तकनीकों का आविष्कार करके नहीं, बल्कि एक ऐसा संयोजी ढांचा बनाकर जो नवाचार को एक साथ काम करने, तेजी से आगे बढ़ने और अधिक लोगों तक पहुंचने में सक्षम बनाए। खुले डिजिटल बुनियादी ढांचे को विश्वसनीय डेटा प्रवाह और पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित नवाचार के साथ जोड़कर, यह प्रारूप एआई जैसी तकनीकों को नागरिकों और छोटे उद्यमों के बीच व्यापक रूप से प्रसारित करने के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करता है।
केवल डिजिटल समावेशन से आगे बढ़कर व्यापक स्तर पर क्षमता, उत्पादकता और अवसरों को सक्षम बनाते हुए यह भारत की डिजिटल यात्रा में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है। अब प्राथमिकता क्रियान्वयन पर है। जिला स्तर पर अपनाए जाने और स्थानीय वास्तविकताओं पर आधारित, तथा विश्वास, अंतरसंचालनीयता और सुरक्षा उपायों पर टिकी हुई, डीपीआई 2.0 प्रौद्योगिकी को अपनाने का एक व्यावहारिक मार्ग प्रदान करती है, जिससे पूरे देश में व्यापक विकास को गति मिलेगी और देश को विकसित भारत 2047 की ओर एक गैर-रेखीय, उत्पादकता-आधारित विकास पथ पर आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी।
इस अवसर पर अपने संबोधन में सुमन बेरी ने कहा कि अब ध्यान जीडीपी से उत्पादकता पर केंद्रित हो गया है। उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार, मजबूत आय और बेहतर जीवन स्तर बढ़ती उत्पादकता पर निर्भर करते हैं। डीपीआई 1.0 ने दिखाया है कि नेटवर्क का उपयोग करना ही हमारी वर्तमान स्थिति का रहस्य है। यह प्रारूप इस बदलाव को स्पष्ट करता है। भारत के विकास का अगला चरण इस बात से तय होगा कि एआई और डीपीआई किस प्रकार व्‍यापक स्‍तर पर उत्पादकता बढ़ाते हैं, इसे भारत की विकास यात्रा के केंद्र में रखते हैं और विकसित भारत 2047 की आधारशिला रखने में मदद करते हैं।
प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने कहा कि प्रौद्योगिकी नेतृत्व को तेजी से इस बात से परिभाषित किया जाएगा कि हम विज्ञान और नवाचार को बड़े पैमाने पर लागू होने योग्य, विश्वसनीय सार्वजनिक परिणामों में बदलने में कितने सक्षम हैं। भारत के डीपीआई ने जनसंख्या स्तर पर खुले, अंतरसंचालनीय प्रणालियों की शक्ति का प्रदर्शन किया है। अगले चरण को इसी नींव पर आगे बढ़ना होगा, जिसमें अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को मजबूत वैज्ञानिक सटीकता और सुरक्षा उपायों के साथ एकीकृत किया जाए। यह प्रारूप इसी दिशा को दर्शाता है, जो जिम्मेदार तैनाती और वास्तविक दुनिया पर प्रभाव पर केंद्रित है। भारत के पास उदाहरण पेश करने के लिए वैज्ञानिक गहराई और डिजिटल आधार मौजूद हैं।
निधि छिब्बर ने इस बात पर बल दिया कि नीति एफटीएच प्रारूप का एक महत्वपूर्ण हिस्सा राज्यों को उनके परिवर्तन की यात्रा में सहयोग देने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य उन्हें व्यावहारिक मार्ग प्रदान करना है जिन्हें वे अपनाकर लागू कर सकें। हमारा दृष्टिकोण सरल है: जब राज्य तेजी से विकास करते हैं, तो भारत और भी तेजी से विकास करता है। डीपीआई राज्यों के लिए समावेशी विकास को गति देने में एक महत्वपूर्ण सहायक बन सकता है।

देबजानी घोष ने कहा कि यह प्रारूप बताता है कि कैसे डीपीआई 2.0 भारत को डिजिटल समावेशन से उत्पादकता-आधारित, आजीविका-केंद्रित विकास की ओर ले जा सकता है, जिससे 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त हो सके। वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा अब केवल अत्याधुनिक मॉडलों, चिप्स और पूंजी तक सीमित नहीं है; यह तेजी से किसी देश की डिजिटल बुनियादी ढांचे को अर्थव्यवस्था में व्यापक प्रसार और प्रभाव से जोड़ने की क्षमता पर केंद्रित हो रही है। भारत इस अगले चरण में एक शक्तिशाली संरचनात्मक लाभ के साथ प्रवेश कर रहा है: इसकी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, डीपीआई, एआई और उद्यमिता को मिलाकर, भारत एआई को अपनाने का एक समावेशी, स्थानीय भाषा में और व्यापक जनमानस वाला मॉडल विकसित कर सकता है जो जीवन को बेहतर बनाएगा, आजीविका को मजबूत करेगा और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उत्पादकता को बढ़ावा देगा।

totaramnews1@gmail.com

totaramnews1@gmail.com http://totaram.news

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News

Trending News

Editor's Picks

तुर्की से भारत लाया गया कुख्यात ड्रग तस्कर सलीम डोला, NCB की बड़ी सफलता

डेस्क। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि नार्को सिंडिकेट के खिलाफ मोदी सरकार की ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति के अनुरूप, NCB ने आज तुर्की से कुख्यात ड्रग तस्कर मोहम्मद सलीम डोला को वापस लाने में एक बड़ी सफलता हासिल की है।X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित...

उ0प्र0 राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्षता में आयोग की मासिक बैठक सम्पन्न

लखनऊ। उ0प्र0 राज्य पिछड़ा आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने आज इन्दिरा भवन, लखनऊ में मासिक उ0प्र0 पिछड़ा वर्ग आयोग की मासिक बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में आयोग के उपाध्यक्ष सूर्य प्रकाश पाल व उपाध्यक्ष सोहन लाल श्रीमाली सहित आयोग के सदस्यगण की उपस्थिति में उ0प्र0 सरकार द्वारा पिछड़ा वर्ग कल्याण हेतु विभिन्न विकास...

यूपी-रेरा के 37वें रियल एस्टेट एजेंट प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत

लखनऊ / गौतमबुद्ध नगर। उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट क्षेत्र को अधिक पेशेवर, सक्षम और उत्तरदायी स्वरूप देने की दिशा में उत्तर प्रदेश भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी-रेरा) ने एक और महत्वपूर्ण पहल करते हुए 37वें रियल एस्टेट एजेंट प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। यह चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सोमवार को एनआईईटी परिसर, ग्रेटर नोएडा में...

बस्ती में पर्यटन विकास के लिए 901 लाख स्वीकृत

लखनऊ। पर्यटन विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य योजना के अंतर्गत बस्ती जनपद के अंतर्गत आने वाली विभिन्न विधानसभाओं के लिए 901 लाख रूपये की 11 परियोजनाएं स्वीकृत की गई है। इन परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए सीएनडीएस को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए गए है...

गौशालाओं में कोई भी गोवंश भूखा प्यासा न रहने पाए

लखनऊ। प्रदेश के निराश्रित गोवंश के बेहतर भरण पोषण के लिए गोआश्रय स्थलों पर भूसे एवं हरे चारे की पर्याप्त व्यवस्था करने एवं अवस्थापना सुविधाओं की सुनिश्चितता के लिए 01 मई से 15 मई, 2026 तक सघन निरीक्षण अभियान चलाया जायेगा। इस अवधि में किसी भी अधिकारी का अवकाश स्वीकृत नहीं होगा और निदेशालय से...

TN

TOTARAM News

तोताराम न्यूज़ – सच्ची, सरल और ट्रेंडिंग  खबरों का नया ठिकाना।
यहाँ हर खबर मिलेगी बिना तोड़-मरोड़ के, सीधे जनता की आवाज़ के साथ।.

क्विक लिंक्स

पॉपुलर कैटेगरीज़

अवश्य पढ़ें

©2025– TotaRam.news All Right Reserved.