- लखनऊ से अयोध्या तक नेपाल के पत्रकार प्रतिनिधिमंडल का भ्रमण कार्यक्रम, साझा विरासत पर फोकस
- लखनऊ के ऐतिहासिक स्थलों से अयोध्या की रामायण परंपरा तक, यूपी की सांस्कृतिक विरासत हो रहे अवगत
- उत्तर प्रदेश-नेपाल के बीच सांस्कृतिक संबंधों को पर्यटन से मिली नई दिशा- जयवीर सिंह
- पत्रकार प्रतिनिधिमंडल के दौरे से मजबूत हो रहा, यूपी-नेपाल सांस्कृतिक जुड़ाव- जयवीर सिंह
लखनऊ। उत्तर प्रदेश और नेपाल के बीच पर्यटन, संस्कृति और साझा विरासत को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से नेपाल के 20 वरिष्ठ पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल 26 अप्रैल से 30 अप्रैल तक उत्तर प्रदेश के दौरे पर है। यह दौरा दोनों देशों के बीच पर्यटन सहयोग को बढ़ावा देने, सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने तथा आपसी जन-संपर्क और सौहार्द को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत प्रतिनिधिमंडल को उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, ऐतिहासिक स्थलों, धार्मिक परंपराओं से अवगत कराया जा रहा है, ताकि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूती मिल सके।
लखनऊ में नेपाली पत्रकारों ने जानी विरासत और स्वाद की पहचान
अपने लखनऊ दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने लखनऊ स्थित लखनऊ का ऐतिहासिक बड़ा इमामबाड़ा और छोटा इमामबाड़ा देखा। अधिकारियों ने उन्हें लखनऊ की पुरानी इमारतों और इतिहास के बारे में जानकारी दी। इस दौरान यह भी बताया गया कि परंपरागत मान्यताओं में लखनऊ को ‘लक्ष्मणपुरी’ कहा जाता है, जिससे भारत और नेपाल के पुराने रिश्तों का पता चलता है। प्रतिनिधियों को लखनऊ की विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त खान-पान की पहचान से भी परिचित कराया गया। लखनऊ को ‘यूनेस्को क्रिएटिव सिटी ऑफ़ गैस्ट्रोनॉमी’ का दर्जा प्राप्त है, और यहाँ का खान-पान शहर की परिष्कृत सांस्कृतिक विरासत और मेहमाननवाज़ी की परंपराओं को दर्शाता है। यहां का भोजन अपनी विशिष्ट स्वाद परंपरा और तहजीब के कारण पूरी दुनिया में अलग पहचान रखता है। ऐसे में नेपाल के पत्रकार लखनऊ के खानपान और संस्कृति को नजदीक से समझ रहे हैं।
अयोध्या दौरे में दिखेगा रामायण और साझा विरासत का संगम
इसके बाद प्रतिनिधिमंडल का दौरा अयोध्या में प्रस्तावित है, जहां वे श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर सहित रामायण से जुड़े प्रमुख स्थलों का भ्रमण करेंगे। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल को अयोध्या की धार्मिक परंपराओं, ऐतिहासिक महत्व और रामायण काल से जुड़ी कथाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। नेपाल के जनकपुर और अयोध्या के बीच सदियों पुराने धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों के कारण यह यात्रा विशेष महत्व रखती है। जनकपुर को माता सीता की जन्मभूमि माना जाता है, जबकि अयोध्या भगवान श्रीराम की नगरी के रूप में विश्वभर में प्रसिद्ध है। इन्हीं कारणों से दोनों स्थानों के बीच भावनात्मक जुड़ाव भी गहरा है, जो इस दौरे को और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है। यह भ्रमण केवल एक पर्यटन कार्यक्रम नहीं, बल्कि साझा विरासत को समझने और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने का अवसर भी माना जा रहा है।
जयवीर सिंह बोले: रामायण सर्किट और दीपोत्सव से मजबूत हुए यूपी-नेपाल सांस्कृतिक संबंध
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, “उत्तर प्रदेश और नेपाल केवल भौगोलिक पड़ोसी नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच सदियों पुरानी आस्था, सांस्कृतिक परंपराएँ और साझा विरासत गहराई से जुड़ी हुई हैं।उन्होंने कहा कि नेपाल के 20 वरिष्ठ पत्रकारों का यह भ्रमण दोनों देशों के बीच पर्यटन सहयोग को मजबूत करने और सांस्कृतिक समझ को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल को उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, ऐतिहासिक स्थलों और धार्मिक विरासत से परिचित कराया जा रहा है।
जयवीर सिंह ने कहा कि लखनऊ के पैराणिक महत्व और अयोध्या की रामायण परंपरा भारत-नेपाल के ऐतिहासिक संबंधों को और मजबूती देती है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ‘रामायण सर्किट’ के माध्यम से भगवान श्रीराम से जुड़े स्थलों को विकसित कर रही है, जबकि ‘दीपोत्सव’ जैसे आयोजन इस विरासत को वैश्विक पहचान दिला रहे हैं। ऐसे में विदेशी पर्यटकों की रुचि उत्तर प्रदेश की तरफ बढ़ी है, इस प्रकार के कार्यक्रम दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास, सद्भाव और पर्यटन को बढ़ावा देते हैं। सरकार भविष्य में भी इसी तरह के प्रतिनिधिमंडल आदान-प्रदान कार्यक्रमों के माध्यम से नेपाल के साथ सांस्कृतिक और पर्यटन सहयोग को और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
