पंडित सुनील पांडेय।
लखनऊ। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान शिव की उपासना के लिए समर्पित होता है और प्रत्येक मास के कृष्ण तथा शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। वर्ष 2026 में वैशाख मास के कृष्ण पक्ष का पहला प्रदोष व्रत 15 अप्रैल, बुधवार को पड़ रहा है। चूंकि यह दिन बुधवार है, इसलिए इसे ‘बुध प्रदोष व्रत’ कहा जाएगा। ज्योतिषीय दृष्टि से बुध प्रदोष व्रत का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि यह भगवान शिव के साथ-साथ बुध ग्रह को भी प्रसन्न करने का उत्तम अवसर माना जाता है। बुध ग्रह का संबंध बुद्धि, वाणी, शिक्षा और व्यापार से होता है। इसलिए इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को इन क्षेत्रों में विशेष लाभ प्राप्त हो सकता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, त्रयोदशी तिथि की संध्या बेला यानी प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं। कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस समय श्रद्धा और भक्ति के साथ शिवलिंग के दर्शन करता है और पूजन करता है, उसकी समस्याओं का शीघ्र समाधान मिलता है।
बुध प्रदोष व्रत के प्रमुख लाभ
इस व्रत को करने से कई प्रकार के आध्यात्मिक और सांसारिक लाभ मिलते हैं। इससे मानसिक शांति प्राप्त होती है और रोगों से राहत मिलती है। व्यक्ति की वाणी में मधुरता आती है, जिससे उसके संबंध बेहतर होते हैं। व्यापार और आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिलता है। साथ ही, यह व्रत पितृ दोष और वास्तु दोष को शांत करने में भी सहायक माना गया है। भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है। विशेष रूप से वे लोग जो कर्ज से परेशान हैं या जिनके बच्चों की शिक्षा में बाधाएं आ रही हैं, उनके लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
बुध प्रदोष व्रत 2026 का शुभ मुहूर्त
- त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 15 अप्रैल 2026, प्रातः 12:12 बजे
- त्रयोदशी तिथि समाप्त: 15 अप्रैल 2026, रात्रि 10:31 बजे
- प्रदोष पूजा मुहूर्त: सायं 06:56 बजे से रात्रि 09:13 बजे तक
इस प्रकार बुध प्रदोष व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने की मान्यता है।
