डेस्क। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली कामदा एकादशी को बेहद फलदायी माना जाता है। इसे फलदा एकादशी भी कहा जाता है। ‘कामदा’ का अर्थ है इच्छाओं को पूर्ण करने वाली, जबकि ‘फलदा’ का मतलब है फल देने वाली। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को रखने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विशेष विधान है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह एकादशी नए हिंदू वर्ष की पहली एकादशी भी मानी जाती है, इसलिए इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से व्रत और पूजा करने से भक्तों के पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
व्रत और कथा से मिटते हैं महापाप, मिलती है सुख-समृद्धि
शास्त्रों में कामदा एकादशी को भगवान विष्णु का अत्यंत श्रेष्ठ व्रत बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने और कथा सुनने से ब्रह्महत्या जैसे महापाप भी नष्ट हो जाते हैं। मान्यता के अनुसार, यह व्रत व्यक्ति को पिशाच योनि सहित विभिन्न दोषों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है। इसके प्रभाव से जीवन में सकारात्मकता आती है और कष्टों का निवारण होता है। धार्मिक दृष्टि से कामदा एकादशी का व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना गया है, जो अपने जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति की कामना करते हैं। श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत को करने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में खुशहाली आती है।
कामदा एकादशी का शुभ मुहूर्त
इस वर्ष कामदा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा के लिए शुभ समय सुबह 6 बजे से 7 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। इस दौरान विधि-विधान से पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त में भी पूजा करना लाभकारी होता है।
कामदा एकादशी पर जप करने योग्य मंत्र
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
- ॐ नारायणाय नमः
- ॐ हूं विष्णवे नमः
- ॐ नमो नारायण
- श्री मन नारायण नारायण हरि हरि
- ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु प्रचोदयात्
पारण की विधि
व्रत का पारण अगले दिन, यानी 30 मार्च को सुबह शुभ मुहूर्त में किया जाएगा। इस दिन स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें, ब्राह्मण को दान दें और उसके बाद अन्न ग्रहण करके व्रत का समापन करें।
