लखनऊ। परिवहन निगम के कर्मचारियों से एकजुट होने की अपील करते हुए संघ के प्रदेश महामंत्री जसवंत सिंह ने कहा कि यदि कर्मचारी स्वयं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होंगे, तो दूसरों को दोष देने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मांगों को पूरा न होने पर संगठन को जिम्मेदार ठहराया जाता है, तो क्या कर्मचारियों ने कभी अपने सहयोग और भागीदारी का आंकलन किया है।
उन्होंने कहा कि करीब 55 हजार कर्मचारियों के हितों की लड़ाई में यदि केवल एक-दो हजार लोग ही शामिल होते हैं, तो यह संख्या महज 5 से 10 प्रतिशत भागीदारी को दर्शाती है। ऐसी स्थिति में निगम मुख्यालय यह मान लेता है कि ये मांगें सभी कर्मचारियों की नहीं हैं, जिससे आंदोलन की प्रभावशीलता कमजोर पड़ जाती है।
जसवंत सिंह ने आगे कहा कि जब कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए संगठित संघर्ष करने के बजाय अलग-अलग समूहों में बंटे रहते हैं, तो उनकी मांगें कमजोर हो जाती हैं और अधिकार “भीख” की तरह प्रतीत होने लगते हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अधिकार संघर्ष से मिलते हैं, न कि मांगने से।
उन्होंने कर्मचारियों से आत्ममंथन करने, एकजुट रहने और ईमानदार नेतृत्व का चयन करने का आह्वान किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नेतृत्व निष्पक्ष और कर्मठ नहीं होगा, तो कर्मचारियों को शोषण और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता रहेगा। अंत में उन्होंने कहा कि संगठित संघर्ष और मजबूत एकता के बल पर ही कर्मचारियों के हितों की रक्षा संभव है।
