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 विश्व जल दिवस: ‘इंडस्ट्री फॉर वाटर’ सम्मेलन 23 मार्च को

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डेस्क। 22 मार्च को विश्व स्तर पर मनाया जाने वाला विश्व जल दिवस मीठे पानी के महत्वपूर्ण महत्व और स्थायी जल प्रबंधन की तत्काल आवश्यकता की याद दिलाता है। यह वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए पानी सुरक्षित करने की दिशा में कार्य करने के लिए दुनिया भर की सरकारों, उद्योगों और समुदायों को एकजुट करते हुए, जलवायु परिवर्तन और समान पहुंच की बढ़ती चुनौतियों पर प्रकाश डालता है। इस वर्ष का वैश्विक विषय, “वाटर एंड जेंडर”, समावेशी और न्यायसंगत जल शासन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

इस वैश्विक आह्वान को सुदृढ़ करते हुए, जल शक्ति मंत्रालय 23 मार्च 2026 को डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र, नई दिल्ली में “इंडस्ट्री फॉर वाटर” विषय के अंर्तगत विश्व जल दिवस सम्मेलन 2026 का आयोजन करेगा । उद्घाटन सत्र जल शक्ति मंत्र सी.आर. पाटिल और सरकार एवं उद्योग जगत के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की उपस्थिति में आयोजित किया जाएगा। यह सम्मेलन भारत की जल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए विभागों, शिक्षा जगत और उद्योग जगत के बढ़ते समन्वय को दर्शाता है, जिसके लिए सरकार और समाज दोनों के समग्र दृष्टिकोण को अपनाया जा रहा है। जल को एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संसाधन मानते हुए और इसके प्रबंधन में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की प्राथमिक भूमिका को अपनाते हुए, उन्हें इस अवसर पर उपयुक्त गतिविधियों का आयोजन करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। ऐसी पहल जन जागरूकता, सामुदायिक भागीदारी और जल के जिम्मेदार उपयोग को प्रोत्साहन देती हैं। राज्य/केंद्र शासित प्रदेश जागरूकता कार्यक्रम, वर्षा जल संचयन और पुन: उपयोग जैसी सर्वोत्तम प्रथाओं का प्रदर्शन कर सकते हैं, जल उपयोग दक्षता में सुधार के लिए उद्योगों और शहरी स्थानीय निकायों के साथ सहयोग कर सकते हैं और समुदाय-नेतृत्व वाली पहलों को बढ़ावा दे सकते हैं।

यह सम्मेलन सतत जल प्रबंधन के लिए संवाद, नवाचार और सहयोग हेतु एक राष्ट्रीय मंच के रूप में कार्य करेगा , जो नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, शिक्षाविदों, स्टार्टअप्स, एमएसएमई और युवा नवोन्मेषकों को एक साथ लाकर बड़े पैमाने पर लागू होने योग्य, प्रौद्योगिकी-संचालित समाधानों का सह-निर्माण करेगा।

जल उपयोग दक्षता, पुनर्चक्रण, पुन: उपयोग और नवाचार के प्रमुख चालक के रूप में उद्योग को स्थापित करते हुए, यह सम्मेलन एक ऐसे प्रतिमान परिवर्तन को उजागर करता है जहां उद्योग जल उपयोगकर्ताओं से जल संरक्षकों की ओर अग्रसर हो रहे हैं और अधिक स्मार्ट एवं टिकाऊ पद्धतियों को अपना रहे हैं। इस आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों के 700 से अधिक प्रतिनिधि भाग लेंगे। जल शक्ति हैकाथॉन के विजेताओं का अभिनंदन समारोह एक प्रमुख आकर्षण होगा, जिसमें जल क्षेत्र में नवोन्मेषी और प्रभावशाली समाधानों को मान्यता दी जाएगी। राज्य सरकारें सक्रिय रूप से भाग लेंगी, विशेष रूप से जनगणना-केंद्रित सत्र में, जिसमें प्रमुख राष्ट्रीय जल जनगणना रिपोर्टों के पूर्ण होने और जारी होने के उपलक्ष्य में अभिनंदन समारोह भी शामिल होगा, जो डेटा-आधारित जल प्रबंधन के महत्व को रेखांकित करता है।

उद्घाटन सत्र के दौरान जारी किए जाने वाले प्रमुख कार्यक्रम (सुबह 10:00 बजे से):

  • सातवीं लघु सिंचाई गणना
  • जल निकायों की दूसरी गणना
  • स्प्रिंग्स की पहली गणना
  • प्रमुख और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं की पहली  गणना
  • राष्ट्रीय जल डेटा नीति
  • तकनीकी और विषयगत प्रकाशन

इस सत्र में अग्रणी राज्यों और उद्योग संघों को सम्मानित करने के साथ-साथ औद्योगिक जल उपयोग दक्षता पर अच्छी प्रथाओं का एक संकलन भी जारी किया जाएगा , जिसमें पुनर्चक्रण, पुन: उपयोग और संरक्षण में सर्वोत्तम प्रथाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। इस सम्मेलन में चार विषयगत सत्र और कार्यशालाएँ आयोजित की जाएंगी, जिन पर निम्नलिखित विषयों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा:

  • संसाधन पुनर्प्राप्ति और चक्रीय पुन: उपयोग के तरीकों सहित कीचड़ प्रबंधन और उपचार पद्धतियाँ
  • उद्योग के नेतृत्व में जल दक्षता, एआई और आईओटी-सक्षम स्मार्ट निगरानी प्रणाली और चक्रीय जल उपयोग
  • हिमनद प्रणालियाँ और जलवायु अनुकूलन क्षमता, विशेष रूप से हिमालयी हिमनदों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, जो महत्वपूर्ण जलस्रोत हैं।
  • योजना और नीति निर्माण के लिए जल जनगणना आंकड़ों के उपयोग के उदाहरण

“इंडस्ट्री फॉर वाटर” सत्र का समापन एक संयुक्त उद्योग घोषणापत्र के साथ होगा, जो सतत जल प्रबंधन के प्रति उद्योग की प्रतिबद्धता की पुष्टि करेगा। मंत्रालय जल क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने वाली पहलों पर भी प्रकाश डालेगा, साथ ही सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सहयोग को बढ़ावा देगा। इस बहु-हितधारक सहभागिता के माध्यम से, यह सम्मेलन “विचार, नवाचार, कार्रवाई।” की भावना को मूर्त रूप देता है , जिसका उद्देश्य साझेदारी, नवाचार और नीति अभिसरण को उत्प्रेरित करना है – जहां नवाचार एक जल-सुरक्षित और लचीला भारत बनाने के लिए जिम्मेदारी से मिलता है। विश्व जल दिवस का विचार सर्वप्रथम 1992 में रियो डी जनेरियो में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण एवं विकास सम्मेलन (यूएनसीईडी) में प्रस्तावित किया गया था। इसके बाद, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 22 मार्च को विश्व जल दिवस के रूप में नामित किया, जिसे 1993 से प्रतिवर्ष मनाया जाता है ताकि उन 21 अरब लोगों के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके जो सुरक्षित जल से वंचित हैं। इस दिवस का एक प्रमुख उद्देश्य सतत विकास लक्ष्य 6 की प्राप्ति में सहयोग करना है: 2030 तक सभी के लिए जल और स्वच्छता सुनिश्चित करना।

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