डेस्क। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। जब यह व्रत सोमवार के दिन पड़ता है, तो इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है। चैत्र मास हिंदू नववर्ष का पहला महीना होता है, इसलिए इस महीने आने वाला सोम प्रदोष व्रत धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से और भी अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 2026 में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत सोमवार को पड़ रहा है, जो शिव भक्तों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं। इस समय की गई पूजा न केवल जीवन के कष्टों को दूर करती है, बल्कि सोमवार के प्रभाव से कुंडली में मौजूद चंद्र दोष को भी शांत करने में मदद करती है। सोमवार और प्रदोष के संयोग से की गई पूजा का फल दोगुना प्राप्त होता है। जहां प्रदोष व्रत से सुख-समृद्धि मिलती है, वहीं सोमवार का प्रभाव मानसिक शांति और पारिवारिक खुशहाली प्रदान करता है।
मनोकामनाओं की पूर्ति का व्रत
सोम प्रदोष व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं की सभी उचित मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होने की मान्यता है। विशेष रूप से जो लोग लंबे समय से बीमारी, तनाव या मानसिक अशांति से जूझ रहे हैं, उन्हें इस दिन भगवान शिव की पूजा से विशेष लाभ मिलता है।
चंद्र दोष से मुक्ति का प्रभावी उपाय
ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो या विष योग जैसे दोष हों, तो व्यक्ति मानसिक अशांति, निर्णय लेने में कठिनाई और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से परेशान हो सकता है। चूंकि भगवान शिव ने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया है, इसलिए उनकी पूजा से चंद्र दोष शांत होता है। चंद्र दोष को दूर करने के लिए प्रदोष काल में इस मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है:
मंत्र:
- “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः”
- “नमः शिवाय” (भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र)
- “ॐ सों सोमाय नमः”
सोम प्रदोष व्रत के विशेष उपाय
1. दूध से अभिषेक
शिवलिंग पर कच्चे गाय के दूध से अभिषेक करने से चंद्रमा मजबूत होता है और मन को शांति मिलती है।
2. सफेद वस्तुओं का दान
शाम के समय चावल, चीनी या सफेद वस्त्र का दान करना शुभ माना जाता है।
3. शीतल जल अर्पित करें
भगवान शिव को शीतल जल में गंगाजल मिलाकर अर्पित करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
