लखनऊ /महोबा। भोर के तीन बजे कानपुर-सागर हाईवे पर हुए दर्दनाक हादसे ने इलाके को हिलाकर रख दिया। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि सड़क पर धूल का गुबार उठ गया और जैसे ही धूल छटी, खून से लथपथ तीन महिलाएं बिखरी पड़ी मिलीं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हादसे के बाद जोरदार आवाज सुनाई दी और मौके पर पहुंचने पर एक महिला कराहते हुए कह रही थी, “हम तो मर गए।” इस मंजर ने राहगीरों का कलेजा भी कांपने पर मजबूर कर दिया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और एम्बुलेंस बुलाकर घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में तीन महिलाओं को मृत घोषित कर दिया गया। हादसे की खबर जैसे ही उनके परिजनों तक पहुँची, तो चैन की नींद सो रहे परिवार पर दुख का पहाड़ टूट गया। जो महिलाएं परिवार का पालन-पोषण करने के लिए मेहनत कर रही थीं, उनका अब इस दुनिया में होना संभव नहीं रहा।
दो परिवारों की खुशियां अब दुख में बदल गईं
हादसे में जान गंवाने वाली भगवती और गीता पहले ही अपने पतियों को खो चुकी थीं। भगवती के पति फूलचंद्र और गीता के पति बालकिशन की मौत सड़क दुर्घटना में पहले ही हो चुकी थी।दोनों महिलाएं वैवाहिक समारोहों में मजदूरी कर अपने बच्चों का पालन-पोषण कर रही थीं। अब उनके बच्चों के सामने मां का सहारा भी उठ गया।
भगवती के दो बेटे: रविंद्र और रवि
गीता की दो बेटियां और एक बेटा: बंटी
पिता के जाने के बाद मां का अचानक चले जाना बच्चों के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। बच्चे अब पूरी तरह से अनाथ हो गए हैं और रिश्तेदार, पड़ोसी उनकी चिंता में डूबे हुए हैं।
हादसे का भयावह मंजर
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि टक्कर के बाद सड़क पर टमाटर भी बिखरे मिले। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि पिकअप टमाटर लदी हुई थी। पिकअप का बाईं ओर का हिस्सा दुर्घटना में टूटा हुआ पाया गया। पुलिस ने इसे जब्त कर चालक और वाहन की तलाश शुरू कर दी है।हाईवे पर खून से लथपथ महिलाओं को देख राहगीरों की समझ नहीं आई कि कैसे मदद करें। पुलिस ने तुरंत एम्बुलेंस बुलाई और घायलों को अस्पताल पहुंचाया।
अस्पताल में चीख-पुकार
हादसे की जानकारी मिलने पर परिजन अस्पताल पहुंचे। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में बच्चों और रिश्तेदारों की चीखें गूंज रही थीं। बच्चे अपने माताओं को देखकर पहली बार समझ ही नहीं पा रहे थे कि उनकी मां अब उनके साथ नहीं हैं। उन्हें संभालने के लिए परिजन और रिश्तेदार मौजूद थे, लेकिन बच्चों की आंतरिक पीड़ा को कोई भी पूरी तरह से नहीं समझ सका।गीता के जेठ, अधिवक्ता बलदेव प्रसाद ने बताया कि ढाई-तीन साल पहले उनके छोटे भाई बालकिशन की सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी थी। अब गीता भी उसी तरह सड़क हादसे का शिकार हो गईं।
दो परिवारों के बच्चों के भविष्य पर सवाल
हादसे ने केवल जीवन की क्षति नहीं दी, बल्कि दो परिवारों के बच्चों के भविष्य को भी अनिश्चित कर दिया। पिता के बाद मां का सहारा भी उठ जाने से बच्चों की दुनिया उजड़ गई है। हादसे में जीवन का स्थिर आधार खोने के बाद बच्चे अब अनाथ हो गए हैं और उनका पालन-पोषण किस तरह होगा, यह अब सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
