एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच हिंदी पत्रकारिता की नई चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा
लखनऊ। ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा “डिजिटल और एआई युग में हिंदी भाषा और मीडिया के बदलते आयाम” विषय पर विशेष अकादमिक कार्यक्रम का आयोजन कुलपति प्रो अजय तनेजा के सरंक्षण में किया गया। कार्यक्रम में डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव के बीच हिंदी भाषा एवं मीडिया के बदलते स्वरूप, संभावनाओं, तकनीकी बदलावों और उभरती चुनौतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।कार्यक्रम की मुख्य वक्ता हिंदी विभाग की सहायक प्रोफ़ेसर डॉ. आराधना अस्थाना रहीं।
उन्होंने डिजिटल एवं एआई युग में हिंदी भाषा की बढ़ती प्रासंगिकता तथा मीडिया के बदलते स्वरूप पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों के विस्तार ने हिंदी भाषा को अभिव्यक्ति और प्रसार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराए हैं। आज सोशल मीडिया, डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म, ब्लॉग, पॉडकास्ट और वीडियो प्लेटफॉर्म के माध्यम से हिंदी सामग्री तेजी से बड़े जनसमूह तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने पत्रकारिता और जनसंचार की कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव की संभावनाएं पैदा की हैं। कंटेंट रिसर्च, लेखन, संपादन, अनुवाद, ट्रांसक्रिप्शन, डेटा विश्लेषण और मल्टीमीडिया सामग्री के निर्माण में एआई उपकरण उपयोगी साबित हो रहे हैं। हालांकि, इनके प्रयोग के साथ तथ्य-जांच, विश्वसनीयता, मौलिकता, कॉपीराइट, डेटा गोपनीयता और एआई-जनित भ्रामक सूचनाओं जैसी चुनौतियों को समझना भी आवश्यक है।
एआई युग में पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों पर जोर
डॉ. अस्थाना ने विद्यार्थियों से नई तकनीकों को अपनाने के साथ पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों:- तथ्यपरकता, निष्पक्षता, विश्वसनीयता और नैतिकता को बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तकनीक पत्रकारिता का विकल्प नहीं, बल्कि पत्रकार की कार्यक्षमता और रचनात्मकता को बढ़ाने का माध्यम है। भविष्य के मीडिया पेशेवरों के लिए तकनीकी दक्षता के साथ मजबूत भाषायी क्षमता और आलोचनात्मक दृष्टि भी आवश्यक होगी।कार्यक्रम के दौरान हिंदी की डिजिटल भाषा, सोशल मीडिया की बदलती संचार शैली, एआई आधारित कंटेंट निर्माण तथा डिजिटल पत्रकारिता में रोजगार एवं नवाचार की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। विद्यार्थियों ने विषय से संबंधित विभिन्न प्रश्न रखे, जिनका मुख्य वक्ता द्वारा विस्तार से उत्तर दिया गया।
कार्यक्रम का संयोजन डॉ. रुचिता सुजय चौधरी तथा सह-संयोजन डॉ. शचीन्द्र शेखर और डॉ काज़िम रिज़वी ने किया। कार्यक्रम में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विद्यार्थियों के साथ अन्य विभाग के विद्यार्थी भी उपस्थित रहे।
