‘विजिट माई स्टेट’ के तहत छात्रों ने जाना भक्ति धाम का इतिहास
प्रतापगढ़। उत्तर प्रदेश की ग्रामीण विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने की पहल के तहत बुधवार को प्रतापगढ़ जिले के मनगढ़ गांव में 30 विद्यार्थियों ने क्लास की चारदीवारी से बाहर निकलकर इतिहास, संस्कृति और ग्रामीण जीवन को करीब से जाना। जवाहर इंटर कॉलेज, प्रतापगढ़ के विद्यार्थियों ने ‘विजिट माई स्टेट’ अभियान के तहत आयोजित विशेष ग्रामीण पर्यटन अनुभव में हिस्सा लिया। इस दौरान विद्यार्थियों ने भक्ति धाम की आध्यात्मिक विरासत से लेकर गांव की लोक परंपराओं, स्थानीय शिल्प और सामुदायिक जीवन तक को प्रत्यक्ष रूप से समझा।
‘विजिट माई स्टेट’ से ग्रामीण विरासत से जुड़े छात्र
यह कार्यक्रम ‘उत्तर प्रदेश ग्रामीण पर्यटन विभाग की एग्री-गंगा ग्राम ग्रामीण पर्यटन परियोजना’ के अंतर्गत आयोजित किया गया। मनगढ़ गांव में आयोजित इस विशेष ग्रामीण पर्यटन अनुभव का उद्देश्य विद्यार्थियों को गांव की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत से सीधे जोड़ना था। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को केवल दर्शक के रूप में नहीं रखा गया, बल्कि विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से उन्हें स्थानीय विरासत को समझने और अनुभव करने का अवसर दिया गया। इससे ग्रामीण पर्यटन के साथ-साथ विद्यार्थियों के लिए सीखने का अनुभव भी अधिक रोचक और प्रभावी बना।
इस पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘विजिट माई स्टेट’ अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों को उत्तर प्रदेश को पारंपरिक पर्यटन स्थलों से अलग नजरिए से जानने का अवसर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस तरह के शैक्षणिक भ्रमण युवाओं को प्रदेश की जीवंत विरासत, परंपराओं और ग्रामीण समुदायों से जोड़ते हैं तथा पढ़ाई को अधिक रोचक और अनुभव आधारित बनाते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे प्रयास नई पीढ़ी में अपनी संस्कृति और विरासत को समझने तथा उसके संरक्षण की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भक्ति धाम में विरासत और रचनात्मकता से रूबरू हुए छात्र
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने भक्ति धाम मंदिर का दौरा किया और उसकी आध्यात्मिक महत्ता तथा स्थानीय समुदाय से उसके गहरे जुड़ाव के बारे में जानकारी प्राप्त की। इसके बाद आयोजित कहानी-कथन सत्र में विद्यार्थियों को जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज के जीवन और उनके व्यक्तित्व, मंगरौढ़ से उनके तप से जुड़े संबंध, भक्ति धाम के निर्माण और इस पवित्र स्थल से जुड़ी स्थानीय लोककथाओं के बारे में बताया गया। इस सत्र ने विद्यार्थियों को गांव की विरासत को केवल किसी स्थान के रूप में नहीं, बल्कि उससे जुड़ी आस्था, परंपरा और लोगों की स्मृतियों के रूप में समझने का अवसर दिया।

ग्रामीण परिवेश में विद्यार्थियों के लिए रचनात्मक गतिविधियां भी आयोजित की गईं। उन्होंने मिश्रित माध्यम से हस्तशिल्प गतिविधि में हिस्सा लिया, जिसमें बेकार कागज, लकड़ी और प्लाईवुड जैसी पुनर्चक्रित सामग्री को आधार बनाकर एक्रेलिक रंग, कांच और मोतियों से कलाकृतियां तैयार की गईं। इसके साथ ही ‘माइंड वैल्यू गेस गेम’ के माध्यम से विद्यार्थियों की निरीक्षण क्षमता, रचनात्मक सोच और तुरंत निर्णय लेने की क्षमता को परखा गया। इन गतिविधियों ने सीखने के साथ-साथ विद्यार्थियों के लिए पूरे अनुभव को मनोरंजक और सहभागितापूर्ण बना दिया।
छात्रों ने ग्रामीण विरासत से सीखा संरक्षण का महत्व
इस कार्यक्रम में शामिल छात्रा खुशी प्रजापति ने कहा कि भक्ति धाम की यात्रा और कहानी-कथन सत्र से उन्हें मनगढ़ गांव के इतिहास और आध्यात्मिक महत्व को उस तरह समझने का मौका मिला, जैसा केवल किताबों से संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि पुनर्चक्रित सामग्री से कलाकृति बनाने की गतिविधि भी उन्हें बेहद पसंद आई। वहीं ‘माइंड वैल्यू गेस गेम’ ने कार्यक्रम को और रोचक बनाया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को सहभागिता प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। इससे विद्यार्थियों को ग्रामीण जीवन, स्थानीय परंपराओं और समुदाय के साथ जुड़ने का यादगार अनुभव मिला।
अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि ऐसे भ्रमण विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन के अनुभवों के माध्यम से सीखने का अवसर दे रहे हैं। इससे उनमें जिज्ञासा और रचनात्मकता विकसित होने के साथ उत्तर प्रदेश की समृद्ध विरासत के प्रति सम्मान भी बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं को स्थानीय परंपराओं, समुदायों और सांस्कृतिक अनुभवों के करीब लाकर सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। साथ ही, ऐसे प्रयास नई पीढ़ी को अपनी विरासत को समझने, महत्व देने और उसके संरक्षण के लिए प्रेरित करने में मददगार साबित होंगे।
