रंग यात्रा संस्था के संगीत कार्यक्रम में कलाकारों ने सुनाए सदाबहार गीत, श्रोताओं ने जमकर सराहा
लखनऊ। अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान प्रेक्षाग्रह में रंग यात्रा संस्था द्वारा “जीना इसी का नाम है” संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। इस संगीत के कार्यक्रम में 1970 के दशक के फ़िल्मी गाने गाये गयै। जिनको पूर्व में हेमंत, के एल सहगल, मुकेश, रफ़ी, प्रदीप, शमशाद बेगम, सुरैय्या, टुन टुन, आशा भोसले, मन्ना डे, किशोर कुमार और तलत महमूद आदि गायको ने अपनी मधुर आवाज़ में गीत गाया था।
आज के इस संगीत के कार्यक्रम में अहमदाबाद के शशांक भट्ट, कानपूर की अर्चना पांडेय, लखनऊ के अर्पित मिश्रा,शीलू श्रीवास्तव और नीरजा श्रीवास्तव ने अपनी आवाज में बेकरार करके हमें यू न जाइये, गम दिए, मै क्या जानू, दिल जलता है, किसी की मुस्कराहटों पे, पतली कमर है, दिल में छुपा के, सुहानी रात ढल चुकी अब तुम, पिंजरे के पंछी, आओ बच्चो तुम्हें सिखाऊं, आन मेरी जान संडे के संडे, शोला जो भड़के, वन्दे मातरम, ये शमां शमां है, ऐ दिल मुझे, तेरे नैनो ने, बाबूजी धीरे चलना, बरसात में, हवा में उड़ता जाये, आईये मैहर बां, अंखियां मिलके, सैया दिल में आना रे, ये दिल न होता बेचारा, नखरे वाली, मुड़ मुड़ के न देख, मिलते ही आँखें, छुप छुप के खड़े हो, अफसाना लिख रही हूँ आदि गीतों को सुनाकर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में सभी कलाकारों को रंगयात्रा संस्था द्वारा शाल पहनाकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन ज्ञानेश्वर मिश्र ज्ञानी ने किया।
