6 वर्षीय बच्चे के गले की दुर्लभ गांठ निकाली
लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने छह वर्षीय बच्चे के गले में मौजूद दुर्लभ गांठ का सफल इलाज किया है। यह गांठ खाने की नली (एसोफैगस) से जुड़ी हुई थी, जिसके कारण बच्चे को निगलने में परेशानी हो रही थी।
छह महीने से थी गले में परेशानी
अंबेडकर नगर जिले के जैतपुर क्षेत्र के दौलताबाद गांव निवासी छह वर्षीय अभिनव को पिछले छह महीनों से गले में गांठ की समस्या थी। बीते एक महीने से उसे खाना निगलने में भी कठिनाई होने लगी थी। स्थानीय स्तर पर उपचार के बाद भी राहत नहीं मिलने पर परिजन उसे KGMU लेकर पहुंचे।
जांच में सामने आई दुर्लभ बीमारी
पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर आनंद पांडे ने बच्चे की जांच की। जांच में गले के बाईं ओर बड़ी गांठ पाई गई, जो आसपास की प्रमुख नस और धमनी को एक ओर धकेल रही थी। सीटी स्कैन में पता चला कि यह गांठ एसोफैगस से जुड़ी हुई सिस्ट थी। विभागाध्यक्ष प्रोफेसर जिलेदार रावत ने परिजनों को बीमारी और सर्जरी की आवश्यकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
दो घंटे की सर्जरी में निकाली गई गांठ
प्रोफेसर जिलेदार रावत की निगरानी में प्रोफेसर आनंद पांडे, डॉ. कौशल कुलकर्णी, डॉ. मनीष और डॉ. श्रेया की टीम ने ऑपरेशन किया। एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व प्रोफेसर सतीश वर्मा ने किया। लगभग दो घंटे चली सर्जरी में सावधानीपूर्वक गांठ को हटाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, एसोफैगस से जुड़ी इस तरह की सिस्ट बेहद दुर्लभ होती है और चिकित्सा रिकॉर्ड में इसके बहुत कम मामले दर्ज हैं।
अब सामान्य जीवन की ओर लौट रहा बच्चा
सर्जरी के बाद अभिनव पूरी तरह स्वस्थ है और अब बिना किसी परेशानी के भोजन कर पा रहा है। बच्चे के स्वस्थ होने से परिवार ने राहत की सांस ली है।
KGMU टीम को मिली बधाई
प्रोफेसर जिलेदार रावत ने कहा कि पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग जटिल और दुर्लभ मामलों के उपचार के लिए पूरी तरह सक्षम है। KGMU की कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद ने सफल उपचार के लिए विभाग की टीम को बधाई दी।
