उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (UPSLSA) में 12 से 16 अक्टूबर तक आयोजन
लखनऊ। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ के संरक्षण तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (UPSLSA) के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति अरुण भंसाली के कुशल मार्गदर्शन में बीमा कंपनियों के नामित अधिकारियों के लिए 40 घंटे का गहन मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम सोमवार से प्रारंभ हुआ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा के निर्देशानुसार यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम 12 अक्टूबर से 16 अक्टूबर 2026 तक राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के सभागार में आयोजित किया जा रहा है।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सर्वोच्च न्यायालय की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति (MCPC) द्वारा तैयार किए गए सुव्यवस्थित प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के अंतर्गत संचालित हो रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य बीमा संबंधी विवादों के समाधान के लिए मध्यस्थता को एक प्रभावी, समयबद्ध, सौहार्दपूर्ण एवं सभी पक्षों के लिए लाभकारी माध्यम के रूप में प्रोत्साहित करना है। मध्यस्थता केवल विवाद निस्तारण का जरिया नहीं, बल्कि संबंधों को पुनर्स्थापित करने, विश्वास कायम करने तथा वादकारियों पर पड़ने वाले मानसिक व आर्थिक बोझ को समाप्त कर दावेदारों को गरिमापूर्ण ढंग से त्वरित क्षतिपूर्ति दिलाने का सशक्त विकल्प है।
प्रदेश में लंबित 2 लाख से अधिक MACT मामलों के त्वरित निस्तारण पर जोर
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) के समक्ष वर्तमान में 2 लाख से अधिक मामले लंबित हैं, जिनमें अधिकांश में बीमा कंपनियां मुख्य पक्षकार हैं। मुकदमों के त्वरित निस्तारण के दृष्टिगत यह आवश्यक माना गया कि कंपनियों के नीतिगत निर्णय लेने में सक्षम वरिष्ठ अधिकारी आधुनिक मध्यस्थता तकनीकों, संवाद कौशलों एवं विवाद समाधान की व्यावहारिक रणनीतियों में दक्ष हों।
दावेदारों को समय पर मिले न्याय व क्षतिपूर्ति: न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा
इससे पूर्व, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा ने बीमा कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक में इस बात पर बल दिया था कि संस्थागत एवं वित्तीय मजबूती के कारण कंपनियां समझौतों को सुगम बनाने की प्रभावशाली स्थिति में हैं। उन्होंने अधिकारियों से निष्पक्ष, संवेदनशील और रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि व्यक्तिगत दावेदार अपेक्षाकृत कमजोर पक्ष होते हैं और वे दीर्घकालिक मुकदमों का भार सहन नहीं कर सकते। अतः जहां भी मध्यस्थता के माध्यम से निष्पक्ष एवं विधिसम्मत समाधान संभव हो, वहां दावेदारों को अनावश्यक मुकदमों से बचाकर समय पर राहत पहुंचाई जाए।
उद्घाटन सत्र के उपरांत सर्वोच्च न्यायालय की MCPC के मास्टर प्रशिक्षकों द्वारा बीमा प्रतिनिधियों को मध्यस्थता के सिद्धांतों, समझौता वार्ता की तकनीकों तथा सौहार्दपूर्ण विवाद समाधान के मूलभूत व्यावहारिक पक्षों पर गहन प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इस पहल से प्री-लिटिगेशन (मुकदमेबाजी पूर्व) स्तर पर और न्यायालयों में विचाराधीन मामलों के शीघ्र निस्तारण में तेजी आएगी तथा वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र को नई मजबूती मिलेगी।
