डॉ. राजेन हबीब ख्वाजा ने साझा किए विचार
लखनऊ। स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन (STC), उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा योजना भवन, लखनऊ में “एनवायरनमेंटल चैलेंजेज़ एंड आइडियाज़ फ़ॉर अ सस्टेनेबल फ़्यूचर” विषय पर एक विशेष संवादात्मक व्याख्यान आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य पर्यावरणीय स्थिरता, क्लाइमेट रेजिलिएंस तथा सस्टेनेबल डेवलपमेंट के संबंध में जागरूकता, ज्ञान के आदान-प्रदान और नीतिगत संवाद को बढ़ावा देना था।
STC के कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ हुए शामिल
व्याख्यान के मुख्य वक्ता डॉ. राजेन हबीब ख्वाजा, IAS (सेवानिवृत्त), भारत सरकार के पूर्व सचिव रहे हैं। उन्होंने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय तथा खान मंत्रालय में अपनी सेवाएँ दी हैं। अपने व्यापक प्रशासनिक अनुभव के आधार पर उन्होंने भारत में उभरती पर्यावरणीय चुनौतियों तथा सस्टेनेबल डेवलपमेंट की दिशा में व्यावहारिक उपायों पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मनोज कुमार सिंह, CEO, STC ने की। इस अवसर पर अक्षत वर्मा, ACEO, STC अनुराग यादव, प्रमुख सचिव, समाज कल्याण एवं सैनिक कल्याण; पार्थ सारथी सेनशर्मा, अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग; श्रीहरि प्रताप शाही, अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACEO), उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA); आलोक कुमार, प्रमुख सचिव, नियोजन, कार्यक्रम कार्यान्वयन एवं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग; तथा प्रो. अरविंद मोहन, डीन, कला संकाय, लखनऊ विश्वविद्यालय सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। अक्षत वर्मा, ACEO, STC ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों, Urban Local Bodies के प्रतिनिधियों, पंचायती राज विभाग एवं UPPCB के अधिकारियों, लखनऊ मैनेजमेंट एसोसिएशन (LMA) के सदस्यों, शोधकर्ताओं, पर्यावरण विशेषज्ञों तथा लखनऊ विश्वविद्यालय के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।
विकसित उत्तर प्रदेश 2047 के लिए सतत विकास पर मंथन
अपने व्याख्यान में डॉ. ख्वाजा ने शासन एवं विकास नियोजन में सस्टेनेबिलिटी को शामिल करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने क्लाइमेट चेंज, पर्यावरण संरक्षण, सस्टेनेबल टूरिज्म, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, वायु एवं जल प्रदूषण, नदियों एवं महासागरों के संरक्षण, जैव विविधता तथा सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स की प्राप्ति के लिए सामूहिक प्रयासों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को सार्वजनिक नीति, औद्योगिक विकास और सामुदायिक सहभागिता का अभिन्न अंग बनाया जाना चाहिए। प्रो. अरविंद मोहन ने नदी पारिस्थितिकी एवं सस्टेनेबल नदी जल प्रबंधन पर विशेष संबोधन दिया। उन्होंने वैज्ञानिक नियोजन, नदी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण तथा जल संसाधनों के जिम्मेदार प्रबंधन की आवश्यकता पर बल दिया।
मनोज कुमार सिंह, CEO, STC ने सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए सरकार, शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग जगत और नागरिक समाज के बीच समन्वय एवं सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे ज्ञान-साझाकरण मंच नवीन विचारों को प्रोत्साहित करने तथा उत्तर प्रदेश में साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अखिलेश गौतम, निदेशक, सस्टेनेबल डेवलपमेंट सेल, STC ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
यह कार्यक्रम “विकसित उत्तर प्रदेश 2047” के दृष्टिकोण के अनुरूप सस्टेनेबल डेवलपमेंट, पर्यावरणीय जागरूकता, क्लाइमेट रेजिलिएंस तथा सूचित नीतिगत संवाद को बढ़ावा देने के लिए स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है।
