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सीहोर, देवास, विदिशा और रायसेन का कृषि रोडमैप जारी

Table of Content

  • टिकाऊ और लाभकारी खेती के लिए 4 जिलों का रोडमैप तैयार
  • केवल उत्पादन नहीं, सही फसल और टिकाऊ खेती पर ध्यान देना जरूरी
  • रासायनिक खाद से नुकसान- Soil Mobile App से करें वैज्ञानिक खेती
  • हर ब्लॉक में बनेंगे बीज ग्राम- बेहतर बीज से 20% तक बढ़ेगा उत्पादन
  • मध्यप्रदेश में बनेगा क्लीन प्लांट सेंटर- कस्टम हायरिंग सेंटर और मशीन बैंक भी बनेंगे – शिवराज सिंह चौहान

डेस्क। केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के रायसेन में आयोजित उन्नत कृषि महोत्सव के दूसरे दिन किसानों को एक बड़ी सौगात देते हुए सीहोर, रायसेन, विदिशा और देवास – इन चार जिलों का समग्र कृषि रोडमैप जारी किया। साथ ही इस अवसर पर उन्होंने आधुनिक कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल का निरीक्षण भी किया। वहीं केन्द्रीय मंत्री ने महोत्सव में फसल बीमा योजना और इंटीग्रेटेड फॉर्मिंग पर आयोजित विशेष सत्र के दौरान किसानों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों के साथ उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि कृषि को लाभकारी बनाने के लिए नई तकनीकों, विविध फसलों और एकीकृत खेती पद्धतियों को अपनाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि, किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ पशुपालन, बागवानी, मधुमक्खी पालन और जैविक खेती को भी अपनाएं, ताकि कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त हो सके। सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बैठे किसान तक पहुंचे, इसके लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उन्नत कृषि महोत्सव का यह आयोजन केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि देश की कृषि व्यवस्था में सुधार लाने का एक गंभीर प्रयास है। उन्होंने कहा कि आज विदिशा, रायसेन, सीहोर और देवास जिलों के लिए कृषि विकास का रोडमैप तैयार किया गया है। आगे मध्यप्रदेश के सभी जिलों के लिए इसी प्रकार की योजना बनाई जाएगी। इन योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा जाएगा बल्कि उन्हें जमीन पर लागू किया जाएगा। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के समन्वय से किसानों को इसका लाभ पहुंचाया जाएगा, ताकि खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में कृषि की दिशा बदलने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। महोत्सव में किसानों को व्यावहारिक और वैज्ञानिक जानकारी दी जा रही है। अलग-अलग सत्रों के माध्यम से खेती के विभिन्न पहलुओं को सरल तरीके से समझाने का प्रयास किया गया है ताकि किसान अपनी फसलों और उत्पादन प्रणाली को बेहतर बना सकें। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब जरूरत इस बात की है कि किसान अपनी मिट्टी, जलवायु, पानी की उपलब्धता और संसाधनों के आधार पर वैज्ञानिक तरीके से खेती करें। केवल उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि सही फसल और टिकाऊ खेती पर ध्यान देना आवश्यक है।


कृषि रोडमैप में जल प्रबंधन, फसल विविधीकरण और वैल्यू एडिशन पर फोकस


इन चार जिलों की जलवायु, मिट्टी और तापमान को ध्यान में रखते हुए एक समग्र कृषि रोडमैप तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य खेती को अधिक लाभकारी बनाना, जल के कुशल उपयोग को बढ़ावा देना और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल से उत्पादन बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि इस योजना का फोकस जलवायु-सहिष्णु खेती, उत्पादकता में वृद्धि, किसानों की आय बढ़ाना, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और बाजार से बेहतर जुड़ाव सुनिश्चित करना है। इसके तहत ब्लॉक स्तर पर स्थान-विशिष्ट कार्य योजनाएं तैयार करने का प्रयास किया गया है ताकि स्थानीय जरूरतों के अनुसार कृषि को विकसित किया जा सके। साथ ही उन्होंने कहा कि पारंपरिक फसलों जैसे गेहूं, धान और सोयाबीन पर निर्भरता कम कर वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। साथ ही वैल्यू एडिशन और बाजार आधारित कृषि प्रणाली विकसित करने पर भी जोर देना पड़ेगा। वहीं श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रायसेन, विदिशा, सीहोर और देवास जिलों में सिंचाई का बड़ा हिस्सा भूजल पर निर्भर है जबकि कई क्षेत्रों में भूजल स्तर गंभीर स्थिति में पहुंच चुका है। इसके अलावा मृदा स्वास्थ्य कमजोर होना और मूल्य संवर्धन की कमी भी प्रमुख चुनौतियां हैं। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए गेहूं के अलावा अन्य फसलों की संभावनाओं पर भी विचार किया गया है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि टमाटर, प्याज, लहसुन, भिंडी, शिमला मिर्च जैसी सब्जियों के साथ ही यहां अनार जैसे फलों की अच्छी संभावनाएं हैं। इसके अलावा ड्रैगन फ्रूट और एवोकाडो जैसी अधिक लाभ देने वाली फसलों को भी अपनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि वैज्ञानिक तरीके से योजना बनाकर फसल विविधीकरण और संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जाए, तो क्षेत्र के किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है।


वैज्ञानिक खेती के लिए Soil Mobile App लॉन्च

शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि केवल क्षेत्रीय स्तर की जानकारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि हर किसान को अपने खेत की मिट्टी की सही स्थिति जानना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिले और ब्लॉक स्तर पर मिट्टी की सामान्य जानकारी दी जाती है लेकिन वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब किसान अपने खेत का मिट्टी परीक्षण कराकर सॉइल हेल्थ कार्ड बनवाएं। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस फसल के लिए कौन-से पोषक तत्व आवश्यक हैं। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, किसानों की सुविधा के लिए एक नया मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया गया है, जिससे खेती करना और आसान हो गया है। किसान अपने मोबाइल में ऐप डाउनलोड कर खेत में खड़े होकर ही यह जान सकते हैं कि किस फसल के लिए कितनी मात्रा में खाद और उर्वरक डालना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना जानकारी के अंधाधुंध खाद का उपयोग नुकसानदायक है। इससे न केवल किसानों की लागत बढ़ती है बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से तय मात्रा में खाद का उपयोग करने से किसानों का आर्थिक नुकसान कम होगा और भूमि की उर्वरता भी बनी रहेगी। इसके लिए सॉइल हेल्थ कार्ड और नई तकनीकों का अधिक से अधिक उपयोग करना आवश्यक है।


हर ब्लॉक में बनेगा बीज ग्राम
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उत्पादन बढ़ाने के लिए अच्छा बीज सबसे महत्वपूर्ण आधार है। विभिन्न फसलों, फल और सब्जियों के साथ-साथ नई संभावनाओं वाली खेती जैसे ड्रैगन फ्रूट, एवोकाडो और ब्लूबेरी को भी रोडमैप में शामिल किया गया है। इन नई फसलों के बारे में किसानों को सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी जाएगी और उन्हें प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि, यह पहल केवल महोत्सव तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि किसानों को लगातार मार्गदर्शन और प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे नई तकनीकों और फसलों को अपनाकर लाभ कमा सकें। साथ ही उन्होंने कहा कि हर ब्लॉक में कुछ गांवों को ‘बीज ग्राम’ के रूप में विकसित किया जाए, जहां उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का उत्पादन किया जा सके। आईसीएआर इस दिशा में पूरी मदद करेगा और ब्रीडर सीड उपलब्ध कराएगा।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यदि प्रत्येक ब्लॉक में लगभग 10 गांवों को बीज ग्राम बनाकर किसानों को वहीं से अच्छे बीज उपलब्ध कराए जाएं, तो इससे उत्पादन में करीब 20 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बीज ग्राम विकसित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का उपयोग किया जाएगा। ‘बीज और रोपण सामग्री उप-मिशन’ के तहत आवश्यक वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें भारत सरकार और मध्यप्रदेश सरकार मिलकर सहयोग करेंगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस योजना के तहत आवश्यक कार्ययोजना तैयार कर जल्द से जल्द इसे जमीन पर लागू किया जाए, ताकि किसानों को बेहतर बीज उपलब्ध हो सके और उनकी आय में वृद्धि हो।

क्लीन प्लांट सेंटर और मशीन बैंक से किसानों को मिलेगी राहत

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक प्रभावी बनाने के लिए किसानों को उच्च गुणवत्ता और रोगमुक्त पौध उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित कर रही है जिसमें एक केंद्र मध्यप्रदेश में भी बनाया जा सकता है। इसके साथ ही नर्सरियों की स्थापना कर किसानों को प्रमाणित और परीक्षण किए हुए पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि उन्हें किसी प्रकार की धोखाधड़ी या नुकसान का सामना न करना पड़े। वहीं केन्द्रीय मंत्री ने खेती में मशीनों की उपलब्धता को भी बड़ी चुनौती बताया, उन्होंने कहा कि हर किसान महंगी मशीनें खरीदने में सक्षम नहीं होता, जिससे समय पर खेती के कार्य प्रभावित होते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने ‘मशीन बैंक’ और कस्टम हायरिंग सेंटर के मॉडल को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने पंजाब का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां पंचायतों द्वारा मशीन बैंक स्थापित किए गए हैं, जहां से किसान उचित किराए पर मशीनें ले सकते हैं। इसी तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी पंचायत स्तर पर मशीन बैंक स्थापित करने और हर ब्लॉक में कम से कम पांच कस्टम हायरिंग सेंटर शुरू करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने सरपंचों से भी इस पहल में आगे आने की अपील की और कहा कि पंचायतें खुद मशीन बैंक स्थापित कर किसानों को सस्ती और समय पर सुविधाएं उपलब्ध करा सकती हैं।

कृषि महाविद्यालय–कृषि विज्ञान केंद्र समन्वय से मजबूत तंत्र तैयार किया जाएगा

 शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को फलों और सब्जियों के नुकसान से बचाने के लिए कोल्ड चेन और पैक हाउस जैसी सुविधाओं के विस्तार पर जोर देते हुए कहा कि जल्दी खराब होने वाली उपज के कारण किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता, जिससे भारी नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए मध्यप्रदेश में कोल्ड स्टोरेज, पैक हाउस और कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार की कृषि अवसंरचना योजनाओं का उपयोग किया जाएगा और राज्य सरकार के साथ मिलकर इसे लागू किया जाएगा। साथ ही, निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि किसान उत्पादक संगठन को मिशन मोड में मजबूत बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग खेती करने से किसानों को दिक्कतें आती हैं, जबकि समूह में काम करने से बेहतर मूल्य और सुविधाएं मिल सकती हैं। उन्होंने कहा कि, बाजार में दाम गिरने पर किसानों को नुकसान होता है, लेकिन प्रसंस्करण के जरिए इससे बचा जा सकता है। आईसीएआर द्वारा विकसित तकनीकों के माध्यम से टमाटर से सॉस, प्यूरी और यहां तक कि टमाटर पाउडर भी बनाया जा सकता है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि भोपाल और आसपास के आईसीएआर संस्थानों, कृषि महाविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों को जोड़कर एक मजबूत तंत्र विकसित किया जाएगा, ताकि वैज्ञानिक सीधे किसानों के साथ काम करें और उन्हें निरंतर मार्गदर्शन मिलता रहे।

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