19 अक्टूबर को दुर्गाष्टमी का व्रत और नवमी तिथि में हवन करना शुभ; व्रत के पारण के लिए भी जानें सही समय
ज्योतिषाचार्य पंडित सुनील पांडेय।
लखनऊ। मां दुर्गा की आराधना का पावन पर्व शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करेंगे। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ पूजा का संकल्प लिया जाएगा। इस दौरान व्रत रखने, दुर्गा सप्तशती का पाठ करने और हवन करने के लिए तिथि एवं मुहूर्त का विशेष महत्व रहेगा।
11 अक्टूबर को पूरे दिन कर सकेंगे कलश स्थापना
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना कर मां दुर्गा की पूजा शुरू की जाती है। इस वर्ष 11 अक्टूबर को पूरे दिन प्रतिपदा तिथि रहने के कारण कलश स्थापना की जा सकती है। श्रद्धालु अपनी परंपरा और पूजा-विधान के अनुसार घट स्थापना कर नौ दिनों की साधना शुरू कर सकते हैं।
19 अक्टूबर को रखा जाएगा दुर्गाष्टमी का व्रत
नवरात्रि में अष्टमी तिथि का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष 19 अक्टूबर, सोमवार को उदया अष्टमी होने के कारण दुर्गाष्टमी का व्रत रखा जाएगा। जो श्रद्धालु चढ़ती-उतरती का व्रत करते हैं, वे 11 अक्टूबर को प्रतिपदा और 19 अक्टूबर को अष्टमी का व्रत रख सकते हैं। वहीं, पूरे नौ दिनों तक नवरात्रि का व्रत रखने वाले श्रद्धालु 11 अक्टूबर से व्रत शुरू करेंगे। व्रत का पारण अपनी मान्यता के अनुसार दशमी तिथि में कर सकेंगे।
नवरात्रि व्रत पारण का शुभ समय
बताई गई तिथि के अनुसार, 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे के बाद दशमी तिथि में व्रत का पारण किया जा सकता है। जो श्रद्धालु उदया दशमी के अनुसार पारण करते हैं, वे 21 अक्टूबर को सूर्योदय से दोपहर 2:11 बजे तक पारण कर सकते हैं।

यदि कोई श्रद्धालु पूरे नवरात्रि का व्रत रखना चाहता है, लेकिन किसी कारणवश लगातार व्रत नहीं कर पाता, तो अपनी सामर्थ्य और परंपरा के अनुसार एक दिन व्रत रखकर अगले दिन विश्राम कर सकता है और फिर व्रत कर सकता है।
नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती पाठ का महत्व
नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की आराधना के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है। यदि किसी कारणवश श्रद्धालु दुर्गा सप्तशती का पूरा पाठ नहीं कर पाते हैं, तो वे प्रतिदिन दुर्गा कवच, अर्गला स्तोत्र, कीलक स्तोत्र और सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं।
दुर्गा सप्तशती को देवी महात्म्य और चंडी पाठ के नाम से भी जाना जाता है। यह ग्रंथ मार्कंडेय पुराण का एक प्रमुख भाग है, जिसमें 13 अध्याय और लगभग 700 श्लोक हैं। इसी आधार पर इसका नाम सप्तशती पड़ा। इसमें मां दुर्गा की शक्ति, उनके विविध स्वरूपों और राक्षसी शक्तियों के विरुद्ध किए गए संघर्षों का विस्तार से वर्णन किया गया है। ग्रंथ में ऐसी कथाएं हैं, जिनमें देवी ने अधर्म और बुरी शक्तियों का अंत कर धर्म की स्थापना की। नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु इन प्रसंगों का पाठ करके मां भगवती की उपासना करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में विधि-विधान और श्रद्धा के साथ दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। भक्त घर में सुख-शांति और सकारात्मक वातावरण बनाए रखने की कामना से भी इसका पाठ करते हैं। कई श्रद्धालु नौ दिनों तक नियमित पाठ के माध्यम से अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और मन की शांति की प्रार्थना करते हैं। हालांकि, पाठ से जुड़े इन लाभों को धार्मिक आस्था और मान्यताओं के संदर्भ में देखा जाता है।
इसके अलावा नवार्ण मंत्र या गायत्री मंत्र का जाप करके भी मां दुर्गा की उपासना की जा सकती है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा, समय और पूजा-पद्धति के अनुसार साधना कर सकते हैं।
नवमी तिथि में हवन करना रहेगा शुभ
नवरात्रि में हवन का विशेष महत्व है। दी गई तिथि के अनुसार, 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे नवमी तिथि शुरू होगी, जो 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे तक रहेगी। ऐसे में इस अवधि में नवमी पूजन और हवन किया जा सकता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, विशेष परिस्थितियों में अष्टमी तिथि पर भी हवन कराया जा सकता है। श्रद्धालुओं को सलाह है कि स्थानीय पंचांग और अपने पुरोहित से मुहूर्त की पुष्टि करके पूजा-अनुष्ठान करें।

नवरात्रि का पर्व श्रद्धा, संयम और साधना का प्रतीक है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा की पूजा, मंत्र जाप, पाठ और दान-पुण्य के माध्यम से भक्त सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करते हैं।

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