पंडित सुनील पांडेय।
आज पूरे देश में राम नवमी का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन भगवान श्री राम के जन्मोत्सव के रूप में विशेष महत्व रखता है। इसी के साथ चैत्र नवरात्रि का भी समापन हो रहा है, जिसमें नवमी तिथि पर मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री की कृपा से साधक को अष्ट सिद्धियां प्राप्त हो सकती हैं। ये सिद्धियां—अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व—वही दिव्य शक्तियां हैं जो हनुमान जी के पास भी मानी जाती हैं। भक्तजन इस दिन व्रत, पूजा और कन्या पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
वहीं, अयोध्या में राम नवमी के अवसर पर भव्य आयोजन हो रहा है। दोपहर 12 बजे रामलला का सूर्य तिलक किया जाएगा, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मंदिरों में विशेष सजावट, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है।
पंडित सुनील पांडेय का कहना है कि नवमी 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 48 am से लग जायेगा एवं 27 मार्च को सुबह 10 बजकर 6 मिनट तक रहेगा , अतः हवन 26 मार्च को 11 48 am से 27 मार्च को 10 06 am तक करना शुभ रहेगा लेकिन राम नवमी 27 मार्च को मनाया जायेगा क्योकि 27 मार्च को उदया नवमी रहेगा। नवरात्री व्रत की पारणा उदया दशमी तिथि में करना चाहिए उदया दशमी तिथि 28 मार्च को है इस दिन दशमी तिथि सुबह 8 बजकर 45 मिनट तक ही है अतः इस दिन नवरात्री व्रत की पारणा सुबह सूर्योदय से लेकर सुबह 8 45 तक करना शुभ रहेगा।
धार्मिक विश्वास है कि नवरात्रि के अंतिम दिन सच्चे मन से की गई पूजा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। पूरे प्रदेश में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और प्रशासन सतर्क है। यह पर्व एक बार फिर अधर्म पर धर्म की विजय और मर्यादा, आदर्श और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश देता है।
