शारदा नदी के कटान से लिया गया बड़ा फैसला
संजय मिश्र।
लखीमपुर खीरी / बहराइच। पूर्वोत्तर रेलवे (NER) के आखिरी बचे ऐतिहासिक मीटरगेज रेलखंड मैलानी–नानपारा पर ट्रेनों का संचालन 1 सितंबर 2026 से अनिश्चितकाल के लिए बंद किया जा रहा है। भीरा खीरी और पलिया कलां के बीच उफान पर बह रही शारदा नदी के भीषण जलस्तर और लगातार हो रहे भूमि कटान के कारण रेलवे ट्रैक व पुलों पर गंभीर सुरक्षा संकट खड़ा हो गया है। यात्रियों और ट्रेनों की संरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रेलवे प्रशासन ने नियमित पैसेंजर ट्रेनों के साथ-साथ हाल ही में पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी विस्टाडोम ट्रेन का संचालन भी पूरी तरह स्थगित कर दिया है।
शारदा नदी का कटान और सुरक्षा संकट
ट्रैक और पुलों को खतरा: भीरा और पलिया के मध्य शारदा नदी के तेज बहाव और कटान के चलते रेलवे ट्रैक के निचले हिस्से (तटबंध) और रेल पुलों की संरचना पर भारी दबाव बना हुआ है।
संरक्षा पहले: किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकने के लिए रेलवे इंजीनियरिंग विंग की तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर इस संवेदनशील खंड पर रेल यातायात पूरी तरह रोकने का फैसला लिया गया है। स्थिति सामान्य होने और ट्रैक की गहन जांच व मरम्मत के बाद ही बहाली पर विचार होगा।
विस्टाडोम और इको-टूरिज्म को बड़ा झटका
सफारी का सफर थमा: देश के चुनिंदा इको-टूरिज्म कॉरिडोर के रूप में विकसित इस 171 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर पर्यटकों के लिए विशेष विस्टाडोम (कांच की छत वाली) ट्रेन चलाई जा रही थी। इसके जरिए देशी-विदेशी सैलानी दुधवा नेशनल पार्क, किशनपुर और कतर्नियाघाट के घने जंगलों व वन्यजीवों का दीदार करते थे, जो अब पूरी तरह रुक जाएगा।
पर्यटन उद्योग पर असर: आगामी पर्यटन सीजन से ठीक पहले ट्रेन सेवा ठप होने से तराई क्षेत्र के होटल, गाइड और जंगल सफारी से जुड़े स्थानीय पर्यटन व्यवसाय को गहरा झटका लगेगा।
थारू समुदाय और तराई के गांवों की टूटी जीवनरेखा
सस्ता और एकमात्र साधन: दुधवा और कतर्नियाघाट के घने जंगलों के बीच बसे दर्जनों सीमावर्ती गांवों और विशेष रूप से थारू जनजाति समुदाय के लिए यह छोटी लाइन दशकों से दैनिक आवागमन, बाजार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचने की मुख्य जीवनरेखा रही है। सड़क संपर्क की कमी: वन क्षेत्र में पक्की सड़कों और सार्वजनिक परिवहन के अभाव के चलते ट्रेनों के बंद होने से स्थानीय ग्रामीणों का जिला मुख्यालयों (लखीमपुर व बहराइच) से सीधा संपर्क कट जाएगा, जिससे उनकी दैनिक मुश्किलें बढ़ेंगी।
देश के रेल इतिहास का स्वर्णिम अध्याय
देशभर में चले आमान परिवर्तन (गेज कन्वर्जन) के दौर में वन्यजीवों (बाघ, हाथी, गैंडे) और पर्यावरण की सुरक्षा के मद्देनजर वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने इस ट्रैक को ब्रॉडगेज में बदलने की अनुमति नहीं दी थी। इसी कारण पूर्वोत्तर रेलवे ने इसे देश की ऐतिहासिक धरोहर और हेरिटेज ट्रैक के रूप में सहेज कर रखा था। शारदा नदी के प्राकृतिक संकट के चलते अब इस ऐतिहासिक छोटी लाइन के भविष्य पर फिलहाल अनिश्चितता के बादल मंडरा गए हैं।

कम से कम दो महीने लग जाएंगे ट्रेन चालू होने में