‘की-होल सर्जरी’ से कम चीर-फाड़, कम दर्द और जल्दी रिकवरी—खिलाड़ियों एवं रक्षा कर्मियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी
लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), लखनऊ में 9वीं KGMU Arthroscopy Conclave 2026 एवं 9वीं Cadaveric Workshop का आयोजन 12 एवं 13 सितंबर को किया जा रहा है। यह कार्यक्रम Arthroscopy Association of Uttar Pradesh की वार्षिक बैठक के रूप में Indian Arthroscopy Society के तत्वावधान में आयोजित हो रहा है। कार्यक्रम को U.P. Orthopaedic Association, LOS तथा KGMU के Department of Orthopaedics एवं Department of Anatomy का वैज्ञानिक सहयोग प्राप्त है।
दो दिवसीय आयोजन का उद्देश्य देशभर के आर्थोपेडिक सर्जनों एवं युवा चिकित्सकों को आर्थ्रोस्कोपी की नवीनतम तकनीकों, आधुनिक शल्य चिकित्सा पद्धतियों एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण से परिचित कराना है। कार्यक्रम की प्रमुख विशेषता Cadaveric Workshop है, जिसमें विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों को विभिन्न आर्थ्रोस्कोपिक प्रक्रियाओं का hands-on प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
दूरबीन विधि से कम चीर-फाड़ और जल्दी रिकवरी
आयोजन अध्यक्ष प्रो. आशीष कुमार ने कहा कि आर्थ्रोस्कोपी को सामान्य भाषा में ‘की-होल सर्जरी’ या दूरबीन विधि कहा जाता है। इसमें बड़े चीरे के बजाय बहुत छोटे छिद्रों के माध्यम से कैमरा एवं विशेष उपकरणों की सहायता से जोड़ के अंदर की चोटों का उपचार किया जाता है।
उन्होंने कहा कि इस minimally invasive तकनीक में ऊतकों को कम नुकसान, छोटे घाव, कम रक्तस्राव, अपेक्षाकृत कम दर्द तथा जल्दी रिकवरी जैसे महत्वपूर्ण लाभ होते हैं। मरीज को अपेक्षाकृत जल्दी mobilise किया जा सकता है और वह कम समय में अपनी दैनिक गतिविधियों, कामकाज तथा शारीरिक गतिविधियों पर वापस लौट सकता है।
खिलाड़ियों एवं रक्षा कर्मियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी
आयोजन सचिव प्रो. कुमार शांतनु ने कहा कि आर्थ्रोस्कोपी का विशेष महत्व खिलाड़ियों, शारीरिक रूप से सक्रिय व्यक्तियों तथा रक्षा कर्मियों के लिए है, जिनके लिए चोट के उपचार के साथ-साथ शरीर की पूरी कार्यक्षमता को शीघ्र बहाल करना आवश्यक होता है।
उन्होंने कहा कि किसी खिलाड़ी या रक्षा कर्मी के लिए उपचार की सफलता केवल चोट के ठीक होने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका लक्ष्य उसे खेल, शारीरिक प्रशिक्षण, ड्यूटी और सामान्य सक्रिय जीवन में सुरक्षित एवं शीघ्र वापसी कराना है। आधुनिक आर्थ्रोस्कोपिक तकनीक और वैज्ञानिक rehabilitation protocols इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
घुटने, कंधे एवं अन्य जोड़ों की ligament injuries, meniscal injuries, cartilage injuries तथा sports-related injuries सहित अनेक समस्याओं का उपचार आज आर्थ्रोस्कोपिक तकनीक से किया जा रहा है। इससे मरीज की functional recovery बेहतर करने तथा उसे उसकी पूर्व गतिविधियों के स्तर तक वापस पहुंचाने में सहायता मिलती है।
कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद के मार्गदर्शन में मरीजों की बेहतर देखभाल पर विशेष जोर
केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद के निरंतर मार्गदर्शन एवं मरीजों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की उनकी प्राथमिकता के अनुरूप विश्वविद्यालय में ऐसे प्रशिक्षण एवं कौशल-विकास कार्यक्रमों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीकों का ज्ञान केवल विशेषज्ञों तक सीमित न रहे, बल्कि नियमित प्रशिक्षण, hands-on workshops एवं नवीनतम तकनीकों से चिकित्सकों की दक्षता को निरंतर बढ़ाया जाए। इसका सीधा लाभ अंततः मरीजों को बेहतर, सुरक्षित, प्रभावी एवं आधुनिक उपचार के रूप में प्राप्त होता है।
सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के माध्यम से भी मरीजों को लाभ
प्रो. आशीष कुमार एवं प्रो. कुमार शांतनु ने बताया कि पात्र लाभार्थियों के लिए विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के अंतर्गत आर्थ्रोस्कोपिक प्रक्रियाओं का लाभ भी उपलब्ध है, जिससे आधुनिक minimally invasive orthopaedic treatment समाज के अधिक बड़े वर्ग तक पहुंच रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं के अंतर्गत इन सुविधाओं की उपलब्धता विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के पात्र मरीज भी आधुनिक शल्य चिकित्सा, बेहतर rehabilitation और functional recovery का लाभ उठा सकते हैं। इसका उद्देश्य मरीज को शीघ्र स्वस्थ कर उसे उसकी सामान्य दिनचर्या, कार्यस्थल, खेल गतिविधियों अथवा शारीरिक रूप से कठिन जिम्मेदारियों में वापस लाना है।
कैडेवरिक वर्कशॉप से बढ़ेगी सर्जिकल दक्षता
कॉन्क्लेव में देश के विभिन्न हिस्सों से आर्थ्रोस्कोपी, स्पोर्ट्स मेडिसिन एवं आर्थोपेडिक सर्जरी के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। वैज्ञानिक सत्रों में घुटने एवं कंधे की आर्थ्रोस्कोपी, ligament injuries, meniscal pathology, sports injuries तथा आधुनिक joint-preserving procedures सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की जा रही है।
कैडेवरिक वर्कशॉप के माध्यम से प्रतिभागियों को वास्तविक anatomical structures को समझने तथा विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में विभिन्न आर्थ्रोस्कोपिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है। इससे युवा सर्जनों की technical skills, anatomical understanding एवं complex cases में decision-making को बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी।
केजीएमयू के मीडिया प्रभारी प्रो. के.के. सिंह ने कहा कि ऐसे राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक कार्यक्रम केजीएमयू में उपलब्ध अत्याधुनिक चिकित्सा एवं प्रशिक्षण सुविधाओं को प्रदर्शित करने के साथ-साथ देशभर के विशेषज्ञों और युवा चिकित्सकों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के कौशल-आधारित प्रशिक्षण का अंतिम उद्देश्य मरीजों की चिकित्सा गुणवत्ता और उपचार के परिणामों को बेहतर बनाना है।
यह आयोजन “Learn from Experts, Connect with Experts and Excel in Arthroscopy” की भावना के साथ “Advancing Skills, Transforming Care” के उद्देश्य को आगे बढ़ा रहा है। सम्मेलन का लक्ष्य आर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी के क्षेत्र में नवीनतम ज्ञान एवं तकनीकी कौशल को बढ़ावा देते हुए मरीजों को कम इनवेसिव, सुरक्षित, प्रभावी उपचार और बेहतर functional recovery उपलब्ध कराना है, ताकि वे शीघ्र अपनी सामान्य, व्यावसायिक, खेल एवं शारीरिक गतिविधियों में वापस लौट सकें
