डेस्क: कथित कैशकांड में घिरे इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा है। जस्टिस वर्मा ने यह फैसला शुक्रवार को लिया। इससे पहले वह दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायाधीश रह चुके हैं। उनके दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास से कथित तौर पर नकदी मिलने के बाद विवाद गहरा गया था, जिसके चलते उनके खिलाफ महाभियोग की तैयारी शुरू हुई थी।
दरअसल, 15 मार्च 2025 को उनके सरकारी आवास से 500 रुपये के जले और अधजले नोट बरामद होने का मामला सामने आया था। इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसके बाद उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। हालांकि, जस्टिस वर्मा ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे साजिश बताया था। विवाद बढ़ने पर उनका तबादला इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया। वहीं, सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने उन्हें पद से हटाने की सिफारिश भी की थी।
संसद तक पहुंचा मामला
इस मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया था। पिछले साल अगस्त में सत्ता पक्ष और विपक्ष के कुल 152 सांसदों ने, उस समय दिल्ली हाईकोर्ट में कार्यरत जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया था। प्रस्ताव स्वीकार करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। जस्टिस वर्मा ने इस समिति की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन 16 जनवरी को उनकी याचिका खारिज कर दी गई। इसके बाद वह जांच समिति के सामने पेश हुए और अपना पक्ष रखा।
