योगी सरकार की प्राथमिकता, कागजों से जमीन तक पहुंचे पर्यटन प्रोजेक्ट
लखनऊ/गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गोरखपुर मंडल में पर्यटन और सांस्कृतिक विकास योजनाओं की दो दिवसीय समीक्षा और स्थलीय निरीक्षण किया गया। अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य अमृत अभिजात के नेतृत्व में वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना के तहत 30 पर्यटन, 3 धर्मार्थ कार्य विभाग और 3 सांस्कृतिक परियोजनाओं की समीक्षा की गई। पर्यटन विभाग की परियोजनाओं की अनुमानित लागत करीब 77 करोड़ रुपये है।
गुणवत्ता और समयबद्धता पर सीएम योगी का फोकस
अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य अमृत अभिजात ने गोरखा युद्ध स्मारक, गौरव संग्रहालय और परमहंस योगानंद जी की जन्मस्थली के विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप सभी परियोजनाएं तय समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने और नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक और निरीक्षण के दौरान विभागीय अधिकारियों ने चल रही परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी भी प्रस्तुत की। अगले दिन उन्होंने बुद्धा संग्रहालय का निरीक्षण किया| उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी निर्माण कार्य में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
गोरखपुर को मिलेगी गौरव संग्रहालय और गोरखा युद्ध स्मारक की सौगात
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप गोरखपुर में तैयार हो रही इन परियोजनाओं को दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। गौरव संग्रहालय में वैदिक काल से स्वतंत्रता संग्राम तक के इतिहास को सात आधुनिक गैलरियों में प्रदर्शित किया जाएगा, जबकि गोरखा सैनिकों के शौर्य और भारतीय सेना में योगदान को डिजिटल गैलरी, ऑडियो-वीडियो प्रस्तुति और इंटरैक्टिव डिस्प्ले के माध्यम से जीवंत किया जाएगा।

बुद्ध पर्यटन सर्किट को मिलेगा नया विस्तार
योगी सरकार की योजना के तहत कुशीनगर, देवरिया और महराजगंज के धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों को विकसित करने पर जोर दिया गया। कुशीनगर में विपश्यना केंद्र, बुद्ध गमन मार्ग के छह पड़ावों का विकास, कपिलवस्तु में आधुनिक पर्यटक सुविधाएं और महराजगंज के देवदह में विकास कार्यों के प्रस्तावों की समीक्षा की गई।
धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों का होगा संरक्षण
कसया, बड़हलगंज और पडरौना के प्राचीन रामलीला मैदानों के विकास, विस्तार और सौंदर्यीकरण की योजना तैयार की गई है। इसके साथ ही स्थानीय धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
