उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने लखनऊ की अदबी विरासत और भारतीय रेल पर दो पुस्तकों का किया लोकार्पण
लखनऊ। पांचवें गोमती पुस्तक महोत्सव का रविवार को साहित्य, संस्कृति, कला और ज्ञान के विविध रंगों के साथ भव्य समापन हुआ। नौ दिनों तक चले महोत्सव में 4.5 लाख पुस्तक प्रेमियों और दर्शकों ने हिस्सा लिया, जबकि 2.75 करोड़ रुपये की कुल पुस्तक बिक्री दर्ज की गई। महोत्सव में 250 से अधिक स्टॉल लगाए गए और बच्चों, साहित्य तथा संस्कृति से जुड़े 75 से अधिक कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें 240 से अधिक वक्ताओं और कलाकारों ने सहभागिता की। बाल गतिविधियों में 15,000 से अधिक बच्चों ने भाग लिया।
समापन दिवस पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने गोमती पुस्तक महोत्सव में पहुंचकर पुस्तक मेले का अवलोकन किया और विभिन्न स्टॉल पर प्रदर्शित पुस्तकों के बारे में जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने डॉ. अमिताभ कुमार की दो पुस्तकों ‘लखनऊ शहर-ए-अदब’ और ‘इंडियन रेलवे : फ्रॉम स्टीम टू स्पीड’ का लोकार्पण किया। दिव्यांश पब्लिकेशंस से प्रकाशित इन पुस्तकों में एक ओर लखनऊ की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत, वहीं दूसरी ओर भारतीय रेल के सफर, तकनीकी बदलाव और आधुनिक विकास यात्रा को केंद्र में रखा गया है।
कार्यक्रम में परिवहन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दया शंकर सिंह विशिष्ट अतिथि रहे और आरडीएसओ के अपर महानिदेशक काजी मेराज अहमद ने अध्यक्षता की। इस अवसर पर जीएम/आरवीएनएल अनिल कुमार सिंह, अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप बंसल, राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम, आईएएस जय सिंह, लेखक व स्तंभकार रहीस सिंह, वरिष्ठ पत्रकार नवलकांत सिंह और प्रकाशक नीरज अरोड़ा सहित साहित्य, प्रशासन, उद्योग और प्रकाशन जगत से जुड़े लोग मौजूद रहे।

ब्रजेश पाठक ने दोनों पुस्तकों के प्रकाशन पर बधाई देते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय की शैक्षणिक विरासत और यहां से विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़े युवाओं का उल्लेख किया। उन्होंने युवाओं को निरंतर प्रयास करते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और कहा कि जरूरतमंद बच्चे अपनी समस्याएं साझा कर सकते हैं, जिनके समाधान का प्रयास किया जाएगा। अनिल कुमार सिंह ने सफलता के साथ अपनी जड़ों और मूल पहचान से जुड़े रहने की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं मोहम्मद नदीम ने लखनऊ विश्वविद्यालय से जुड़े अपने पुराने संबंधों और मित्रता के अनुभव साझा किए।
NBT स्टॉल पर भी पाठकों की रुचि
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत (NBT) के स्टॉल पर 7.5 लाख रुपये की पुस्तकों की बिक्री दर्ज की गई। Exam Warriors, The Mother of Democracy और Chandrayaan सहित विभिन्न विषयों की पुस्तकों को पाठकों ने पसंद किया।
चिल्ड्रन्स कॉर्नर में बच्चों की रचनात्मक भागीदारी
समापन दिवस के चिल्ड्रन्स कॉर्नर में लगभग 2200 विद्यार्थियों ने योग, कहानी, वॉइस-ओवर, आपदा प्रबंधन और कला से जुड़ी गतिविधियों में भाग लिया। प्रतीक केशवानी और ललिता अधिकारी के ‘बच्चों के लिए योग’ सत्र में विद्यार्थियों ने योग, ध्यान, संतुलन और स्वस्थ जीवनशैली के बारे में जाना।

अपूर्वा शाह की ‘कहानी की पोटली’ में कहानी और संगीत ने बच्चों को जोड़े रखा, जबकि रूपाली चंद्रा की ‘वॉइस-ओवर वर्कशॉप’ में आवाज के उतार-चढ़ाव, उच्चारण, गति और पिच का अभ्यास कराया गया। आफिया बानो के ‘फ्लिप फ्लैप रेस: आपदा से बचाव की तैयारी को समझना’ सत्र में बच्चों को भूकंप जैसी आपदाओं से बचाव की बुनियादी जानकारी दी गई।
राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय टीम की ‘मंडला आर्ट वर्कशॉप’ में बच्चों ने रंग-बिरंगे मंडला बनाए। राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय के शुभंकर चीता ने बच्चों का उत्साह बढ़ाया और उन्हें ऑफलाइन तथा ऑनलाइन अधिक पढ़ने के लिए प्रेरित किया।
साहित्य, पत्रकारिता और लोक परंपराओं पर संवाद
समापन दिवस पर The Dust on My Heart पर विशेष सत्र आयोजित हुआ, जिसमें लेखिका मीरा (समर खान) ने पुस्तक की रचना-प्रक्रिया, भावनात्मक पक्ष और सृजनात्मक अभिव्यक्ति पर चर्चा की। मुख्य अतिथि प्रो. रवींद्र प्रताप सिंह, निदेशक, अंतरराष्ट्रीय इकाई, अंग्रेजी विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, की उपस्थिति में पुस्तक का लोकार्पण हुआ।
‘लोकतंत्र का चौथा स्तंभ’ विषयक सत्र में वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक सुधीर मिश्र और प्रो. संजय मोहन जौहरी ने पत्रकारिता की स्वतंत्रता, सामाजिक जिम्मेदारी, सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और फेक न्यूज जैसी समकालीन चुनौतियों पर विचार साझा किए। उन्होंने पत्रकारिता में तथ्यों, विश्वसनीयता और तथ्य-जांच के महत्व को रेखांकित किया।

‘लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम में लेखक एवं स्तंभकार रहीस सिंह और डॉ. ललित किशोर मंडोरा ने ‘कैकेयी के राम’ पर संवाद किया। रहीस सिंह ने रामकथा के मानवीय पक्ष और कैकेयी के चरित्र को अलग दृष्टिकोण से समझने की आवश्यकता पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि पुस्तक के छह संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं और इसके लिए वाल्मीकि रामायण तथा श्रीरामचरितमानस का अध्ययन किया गया।
एक अन्य ‘लेखक से मिलिए’ सत्र में डॉ. रजनी गुप्त ने पद्मश्री विद्याबिंदु सिंह से लोक साहित्य, लोक परंपराओं और बाल साहित्य पर बातचीत की। उन्होंने लोकगीतों को सामूहिक अनुभवों और सामाजिक स्मृतियों का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए इनके संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। बाल साहित्य के संदर्भ में उन्होंने बच्चों की बदलती रुचियों, जिज्ञासा और स्वतंत्र सोच को ध्यान में रखने की बात कही।
‘भक्ति बीट्स’ के साथ सुरमयी विदाई
समापन दिवस की सांस्कृतिक संध्या में आरजे प्रतीक के साथ ‘भक्ति बीट्स (भजन जैमिंग)’ ने भक्ति और संगीत के सुरों से महोत्सव को सुरमयी विदाई दी।
नौ दिनों तक चले गोमती पुस्तक महोत्सव ने पुस्तकों को केंद्र में रखते हुए साहित्य, कला, लोक परंपरा, बाल रचनात्मकता, पत्रकारिता, इतिहास और समकालीन विषयों पर संवाद का व्यापक मंच उपलब्ध कराया। विभिन्न आयु वर्गों की भागीदारी ने महोत्सव को पठन, विचार, जिज्ञासा और सांस्कृतिक सहभागिता से जोड़ते हुए पुस्तक संस्कृति को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान किया।
