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गोमती पुस्तक महोत्सव 2026: लखनऊ में 1,200 से अधिक विद्यार्थियों ने साहित्य, कला और संगीत कार्यक्रमों में लिया हिस्सा

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गोमती पुस्तक महोत्सव 2026: लखनऊ में 1,200 से अधिक विद्यार्थियों ने साहित्य, कला और संगीत कार्यक्रमों में लिया हिस्सा

लखनऊ। गोमती पुस्तक महोत्सव 2026 के दूसरे दिन रविवार को साहित्य, रचनात्मकता, इतिहास, विचार और संगीत से जुड़े विविध कार्यक्रमों ने दर्शकों को आकर्षित किया। लखनऊ के विभिन्न विद्यालयों से आए 1,200 से अधिक विद्यार्थियों ने कहानी, कला और रचनात्मक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। वहीं, साहित्यिक विरासत पर संवाद, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं लेखक पार्थसारथी सेन शर्मा के साथ विशेष बातचीत, ‘वीरगाथा डायरी’ और ‘Delhi Metro’ बैंड की संगीतमय प्रस्तुति दिन की प्रमुख गतिविधियां रहीं।

1,200 से अधिक बच्चों ने दिखाई रचनात्मक प्रतिभा

दिन की शुरुआत बच्चों के लिए विशेष रूप से आयोजित कहानी, कला और रचनात्मक गतिविधियों से हुई। कहानीकार प्रियंका सागर ने प्रॉप्स, कठपुतलियों और गीतों के माध्यम से बच्चों को कल्पना और कहानियों की दुनिया से जोड़ा। इसके बाद Team NCCL की ड्राइंग प्रतियोगिता, क्ले आर्टिस्ट सुग्रीव विश्वकर्मा की ‘Clay Art Workshop’ और राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय (ReP) की ‘Art of Creating Book Covers’ गतिविधियों में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय की टीम ने विद्यार्थियों को 7,000 से अधिक निःशुल्क ई-पुस्तकों वाली डिजिटल लाइब्रेरी से भी परिचित कराया। इन गतिविधियों ने बच्चों को पढ़ने के साथ अपनी कल्पनाशीलता और रचनात्मक अभिव्यक्ति को विकसित करने का अवसर दिया।

‘साहित्यिक धरोहरों के वारिस’ में याद किए गए यशपाल, अमृतलाल नागर और भगवतीचरण वर्मा

‘साहित्यिक धरोहरों के वारिस’ सत्र में हिंदी साहित्य के तीन महत्वपूर्ण रचनाकारों—यशपाल, अमृतलाल नागर और भगवतीचरण वर्मा—की साहित्यिक एवं पारिवारिक विरासत पर आत्मीय संवाद हुआ। सत्र का समन्वय दिल्ली की साहित्यकार डॉ. सुनीता ने किया।

परिचर्चा में यशपाल की पुत्रवधू मीना यशपाल, अमृतलाल नागर की पोती ऋचा नागर और भगवतीचरण वर्मा के पोते चंद्रशेखर वर्मा ने पारिवारिक अनुभव और स्मृतियां साझा कीं। ऋचा नागर ने अमृतलाल नागर की बच्चों के प्रति आत्मीयता और उनकी अद्भुत कहानी कहने की कला को याद किया। उन्होंने कहा, “जो रिश्ते विरासत में मिलते हैं, वे हमारे साथ आजीवन चलते हैं।” वहीं, चंद्रशेखर वर्मा ने भगवतीचरण वर्मा की विरासत पर कहा, “जहां तक विरासत की बात है, उनका साहित्य ही हमारी विरासत है।” सत्र में इस बात पर जोर रहा कि साहित्यिक विरासत केवल पुस्तकों और रचनाओं तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह विचारों, संस्कारों, स्मृतियों और जीवन-मूल्यों के रूप में भी पीढ़ियों तक पहुंचती है।

अनुभव, विचार और संवाद : पार्थसारथी सेन शर्मा के साथ विशेष संवाद

अगले सत्र में लेखक और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी, (अपर मुख्य सचिव बेसिक और माध्यमिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश शासन) पार्थसारथी सेन शर्मा के साथ ‘अनुभव, विचार और संवाद’ विषय पर विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। सत्र का समन्वय चंद्रशेखर वर्मा ने किया।

पार्थसारथी सेन शर्मा की साहित्यिक रुचि और लेखन ने संवाद को एक अलग आयाम प्रदान किया। बातचीत के दौरान उनकी चर्चित पुस्तकों-‘लव इन लखनऊ’, ‘अंडमान-अंडमानुष सफर का उपन्यासनामा’, ‘लव साइड बाय साइड’, ‘द विकसित भारत क्विज’, ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘मुसाफिर हूँ यारो’, ‘लखनऊ डायरीज’ तथा ‘एक कदम हजार अफसाने’—पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने अपनी रचनाओं की पृष्ठभूमि, लेखन के अनुभव, साहित्य के प्रति अपने दृष्टिकोण और जीवन से जुड़े विविध अनुभवों को श्रोताओं के साथ साझा किया।

लखनऊ पर चर्चा करते हुए पार्थसारथी सेन शर्मा ने कहा कि लखनऊ कई सदियों को अपने भीतर समेटे हुए है। उन्होंने कहा कि बीस वर्ष पहले का लखनऊ, उसका रहन-सहन और सामाजिक परिवेश आज के लखनऊ से काफी अलग है। उन्होंने भविष्य में लखनऊ को केंद्र में रखकर एक ऐतिहासिक उपन्यास लिखने की इच्छा भी व्यक्त की। उन्होंने बताया कि यह रचना वर्ष 1916 से 2026 तक की समयावधि पर आधारित होगी।

‘लव इन लखनऊ’ के संदर्भ में उन्होंने बताया कि उन्होंने आज के बच्चों और युवाओं को ध्यान में रखते हुए इस पुस्तक की रचना की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कई युवा प्रेम संबंधों में असफलता या धोखा मिलने के बाद आत्महत्या जैसे खतरनाक कदम उठा लेते हैं। ऐसे में साहित्य युवाओं को भावनात्मक रूप से संभालने, परिस्थितियों को समझने और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘अंडमान-अंडमानुष सफर का उपन्यासनामा’ पर भी विस्तार से चर्चा की और अंडमान-निकोबार से जुड़े अनेक रोचक अनुभव और प्रसंग साझा किए।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव पर विचार व्यक्त करते हुए श्री सेन शर्मा ने कहा कि एआई हमेशा हमारी बातों और भावनाओं को उसी रूप में प्रस्तुत नहीं करता, जिस रूप में हम उन्हें व्यक्त करना चाहते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अपने साहित्य और समाज को सही ढंग से समझने के लिए हमें अपनी भाषाओं को स्वयं विकसित और समृद्ध करना होगा। भाषा की मौलिकता और साहित्यिक संवेदना को बनाए रखना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

समन्वयक चंद्रशेखर वर्मा के सहज और सारगर्भित प्रश्नों ने संवाद को रोचक एवं सार्थक दिशा दी। अनुभव, साहित्य, विचार और समकालीन विषयों के इस समन्वय ने श्रोताओं को पार्थसारथी सेन शर्मा के प्रशासनिक व्यक्तित्व के साथ-साथ उनके रचनात्मक और संवेदनशील पक्ष से भी परिचित कराया। सत्र ने यह संदेश भी दिया कि साहित्य केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और नई पीढ़ी को समझने तथा जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टि विकसित करने का प्रभावी साधन भी है।

‘वीरगाथा डायरी’ में जीवंत हुईं इतिहास की वीर गाथाएं

कवि एवं गीतकार डॉ. कृष्ण कुमार सिंह ने ‘वीरगाथा डायरी’ के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारियों और भारतीय इतिहास के महापुरुषों को काव्यात्मक श्रद्धांजलि दी। पृथ्वीराज चौहान और महाराणा प्रताप की वीरता को गद्य एवं पद्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जबकि चंद्रशेखर आज़ाद की कहानी को छंदों के माध्यम से प्रस्तुत करने का प्रयोग दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित कर गया।

सरदार भगत सिंह को समर्पित पंक्तियों के साथ 1857 की क्रांति के नायकों-मंगल पांडे, बहादुर शाह ज़फ़र, नाना साहब, रानी लक्ष्मीबाई और वीर कुँवर सिंह-के योगदान को भी याद किया गया। प्रस्तुति में 1857 के विद्रोह में अवध की भूमिका को भी रेखांकित किया गया। डॉ. सिंह ने ‘कवि सम्मेलन के मंचों पर जय-जयकारी हिंदी है’ गीत प्रस्तुत करते हुए हिंदी के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। प्रस्तुति को दर्शकों ने तालियों के साथ सराहा।

‘Delhi Metro’ ने क्लासिक गीतों से सजाई संगीत की शाम

सांस्कृतिक कार्यक्रम में पांच सदस्यीय लाइव बैंड ‘Delhi Metro’ ने हिंदी और अंग्रेजी के लोकप्रिय क्लासिक गीतों की समकालीन लाइव-बैंड शैली में प्रस्तुति दी। नए अरेंजमेंट, प्रभावशाली वाद्य-संगीत और ऊर्जावान मंचीय प्रस्तुति के साथ बैंड ने परिचित गीतों को नया संगीतात्मक अनुभव दिया। नॉस्टैल्जिया और समकालीन संगीत के इस संगम का दर्शकों ने उत्साहपूर्वक आनंद लिया और कलाकारों की प्रस्तुति की सराहना की।

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