पंडित सुनील पांडेय।
- तिथि गणना के कारण 26 मार्च को अष्टमी के साथ नवमी का आरंभ
- जबकि 27 मार्च को उदया तिथि के आधार पर मनाई जाएगी रामनवमी
लखनऊ। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाने वाली दुर्गाष्टमी इस वर्ष विशेष महत्व लेकर आई है। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप माता महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही कन्या पूजन और अष्टमी व्रत का भी विधान है। इस बार ज्योतिषीय गणना के अनुसार अष्टमी के दिन ही रामनवमी का शुभ संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। हालांकि उदया तिथि के अनुसार कई श्रद्धालु 27 मार्च 2026 को रामनवमी मनाएंगे।
ज्योतिषाचार्य पंडित सुनील पांडेय का कहना है कि इस वर्ष तिथियों में क्षय होने के कारण नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से मानी गई। उस दिन सुबह 6:53 बजे तक अमावस्या थी, जिसके बाद प्रतिपदा तिथि आरंभ हुई। चूंकि प्रतिपदा का क्षय हो रहा था, इसलिए उसी दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:53 बजे से सूर्यास्त तक माना गया। नवमी तिथि 26 मार्च को सुबह 11:48 बजे से प्रारंभ होकर 27 मार्च को सुबह 10:06 बजे तक रहेगी। इस कारण हवन और पूजन का शुभ समय 26 मार्च दोपहर से 27 मार्च सुबह तक रहेगा। लेकिन उदया तिथि के आधार पर रामनवमी का पर्व 27 मार्च को मनाना अधिक शुभ माना गया है।
नवरात्रि व्रत रखने वालों के लिए भी यह समय महत्वपूर्ण है। व्रत की पारणा उदया दशमी तिथि में करनी चाहिए, जो इस वर्ष 28 मार्च को पड़ रही है। उस दिन सुबह 8:45 बजे तक पारणा का शुभ समय रहेगा। जो श्रद्धालु पूरे नौ दिन का व्रत नहीं रख पाते, वे एक दिन छोड़कर व्रत रख सकते हैं। साथ ही, नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि पूरा पाठ संभव न हो तो दुर्गा कवच, अर्गला स्तोत्र, किलक और सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ भी किया जा सकता है।
प्रमुख तिथियां और शुभ मुहूर्त
| तिथि / पर्व | समय / विवरण |
|---|---|
| नवरात्रि प्रारंभ | 19 मार्च 2026 |
| कलश स्थापना | 19 मार्च, सुबह 6:53 से सूर्यास्त तक |
| अष्टमी तिथि | 26 मार्च 2026 |
| नवमी प्रारंभ | 26 मार्च, सुबह 11:48 बजे |
| नवमी समाप्त | 27 मार्च, सुबह 10:06 बजे |
| हवन का शुभ समय | 26 मार्च 11:48 बजे से 27 मार्च 10:06 बजे तक |
| रामनवमी (उदया तिथि) | 27 मार्च 2026 |
| व्रत पारणा (दशमी) | 28 मार्च, सुबह 8:45 बजे तक |
इस विशेष संयोग के चलते भक्तों के लिए यह समय अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से मां दुर्गा और भगवान श्रीराम की कृपा प्राप्त होती है।
