डेस्क। इस साल होली से पहले, 3 मार्च 2026 (मंगलवार) को पूरे भारत में एक रोमांचक खगोलीय घटना घटित होगी—पूर्ण चंद्रग्रहण। इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में प्रवेश करेगा। इंडिया मेटेरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) के अनुसार, इस ग्रहण का मैग्नीट्यूड 1.155 होगा, जिससे यह एक गहरा पूर्ण ग्रहण माना जाएगा। दुनिया के कई हिस्सों में मंगलवार शाम को पूर्ण चंद्रग्रहण दिखाई देगा, और भारत में पश्चिमी राज्यों के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर लगभग सभी स्थानों पर यह दृश्य देखा जा सकेगा। खगोल विज्ञान केंद्र के अनुसार, देश के अधिकांश हिस्सों में चंद्रग्रहण का अंतिम चरण देखा जा सकेगा। पूर्वोत्तर भारत और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में चंद्रमा थोड़ी जल्दी उदित होगा, इसलिए वहां के लोग पूर्ण चंद्रग्रहण का अनुभव कर पाएंगे। भारतीय समयानुसार, चंद्रग्रहण अपराह्न 3:20 बजे शुरू होकर शाम 6:48 बजे समाप्त होगा। वहीं, पूर्ण चंद्रग्रहण की अवस्था अपराह्न 4:34 बजे शुरू होकर 5:35 बजे समाप्त होगी। यह खगोलीय घटना पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और उत्तरी व दक्षिणी अमेरिका में भी दिखाई देगी।
पूर्ण चंद्रग्रहण क्यों खास है
पूर्ण चंद्रग्रहण तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी, सूर्य व चंद्रमा के बीच स्थित हो जाती है। इस दौरान चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया (अम्ब्रा) में प्रवेश करता है। पूर्ण अवस्था में चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देता है, जिसे आमतौर पर “ब्लड मून” कहा जाता है। यह इस वजह से होता है कि पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरती लाल रोशनी ही चंद्रमा तक पहुँच पाती है, जबकि नीली रोशनी बिखर जाती है।
चंद्रग्रहण का समय (भारतीय समयानुसार)
- उपछाया ग्रहण प्रारंभ: 15:20 (दोपहर 3:20 बजे)
- पूर्ण ग्रहण प्रारंभ: 16:34 (शाम 4:34 बजे)
- पूर्ण ग्रहण समाप्त: 17:33 (शाम 5:33 बजे)
- आंशिक ग्रहण समाप्त: 18:48 (शाम 6:48 बजे)
यह ग्रहण भारत के साथ-साथ पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में भी दिखाई देगा। खगोल विज्ञान के अनुसार, पूर्ण चंद्रग्रहण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रकाश के प्रकीर्णन (Rayleigh Scattering) का प्रत्यक्ष उदाहरण है, और यह खगोलीय गणना और समय मापन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
