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आयुष मंत्रालय ने राष्ट्रीय आयुष मिशन का विस्तार किया

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डेस्क। आयुष मंत्रालय ने आयुष ग्रिड के तहत आयुष अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली (एएचएमआईएस) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं, ताकि चिकित्सकों और फार्मासिस्टों द्वारा आयुष केंद्रों में दवाओं की उपलब्धता का डिजिटलीकरण और निगरानी की जा सके। राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) के तहत, राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों की सरकारों को आयुष पद्धति के सामर्थ्य के बारे में समाज को जागरूक करने के लिए व्यवहार परिवर्तन संप्रेषण (बीसीसी) और सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) गतिविधियों के कार्यान्वयन के लिए सहायता प्रदान की जा रही है। इन पहलों में आयुष आधारित निवारक स्वास्थ्य देखभाल पद्धतियों को बढ़ावा देने और समुदायों को स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु जनसंचार माध्यमों का उपयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त, व्यवस्थित आयुष जन स्वास्थ्य कार्यक्रमों के माध्यम से विभिन्न जनसंपर्क गतिविधियों को भी समर्थन दिया जा रहा है, जिनका उद्देश्य शिविरों का आयोजन करके समाज को जागरूक करना और अन्य आयुष स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ उचित रेफरल लिंकेज के माध्यम से आयुष पद्धतियों की सामर्थ्य का उपयोग करते हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान करना है। इसके द्वारा एकल उपचारों के रूप में अथवा पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के पूरक के रूप में निवारक, प्रोत्साहक, उपचारात्मक और पुनर्वास स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं प्रदान की जाती हैं। एनएएम के तहत, देश भर में 12,500 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) [एएएम (आयुष)] को कार्यशील किया गया है। आयुष मंत्रालय ने आशा और एनएएम कर्मियों सहित स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों को सामान्य स्वास्थ्य बनाए रखने और रोगों की रोकथाम के लिए आयुष के लाभों के बारे में प्रशिक्षित करने हेतु प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण (टीओटी) कार्यक्रम आयोजित किया है। ये जमीनी स्तर के कर्मी एएएम (आयुष) से जुड़े हुए हैं और समाज को जागरूक करने तथा सामान्य बीमारियों के लिए आयुष पद्धतियों का उपयोग करके आसान निवारक स्वास्थ्य देखभाल प्रथाओं पर लोगों का मार्गदर्शन करने में लगे हुए हैं। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय स्वास्थ्य शिक्षा ब्यूरो (सीएचईबी), स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (भारत) के सहयोग से, वर्ष 2024 और 2025 में आयुष चिकित्सा पद्धतियों में मस्कुलोस्केलेटल और चयापचय संबंधी विकारों के प्रबंधन पर मास्टर प्रशिक्षक कार्यक्रम आयोजित किए गए। ये प्रशिक्षण आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी और सिद्ध चिकित्सा अधिकारियों के लिए आयोजित किए गए थे, जिनमें सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के प्रतिभागियों ने भाग लिया था। इसके अलावा, एनएएम के लचीले घटक के तहत, शिक्षण संस्थानों और आयुष अस्पतालों/औषधालयों में शिक्षण कर्मियों, चिकित्सा अधिकारियों और अन्य पैरामेडिकल कर्मियों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाती है। राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों की सरकारें एनएएम दिशानिर्देशों के अनुसार राज्य वार्षिक कार्य योजनाओं (एसएएपी) के माध्यम से उपयुक्त प्रस्ताव प्रस्तुत करके वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकती हैं।

इसके अतिरिक्त, आयुष मंत्रालय एक केंद्रीय क्षेत्र योजना नामतः आयुर्ज्ञान को भी कार्यान्वित कर रहा है, जिसमें आयुष कर्मियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने हेतु आयुष में क्षमता निर्माण और सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) के घटक के तहत वित्तीय सहायता का प्रावधान है। भारत सरकार राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों की सरकारों के समन्वय से एनएएम योजना कार्यान्वित कर रही है और विभिन्न आयुष पद्धतियों की सामर्थ्य के बारे में समाज को जागरूक करने के लिए बीसीसी/आईईसी सहित विभिन्न गतिविधियों के तहत वित्तीय सहायता प्रदान करके आयुष पद्धतियों के समग्र विकास और संवर्धन के लिए उनके प्रयासों का समर्थन कर रही है। यह जानकारी आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रताप राव जाधव ने 13 मार्च, 2026 को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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