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औषधीय वनस्पतियों पर चिंतन शिविर में पारंपरिक चिकित्सा के सतत विकास और वैश्विक नेतृत्व पर जोर

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डेस्क।आयुष मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में औषधीय वनस्पतियों पर एक दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों, विषय विशेषज्ञों, उद्योग जगत के नेताओं और राज्य प्रतिनिधियों ने भाग लिया और स्थायी नियमों और नवाचार के माध्यम से औषधीय पादप क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से नीति, अनुसंधान और कार्यान्वयन रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया।
आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने मुख्य अतिथि के रूप में चिंतन शिविर का उद्घाटन किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि औषधीय वनस्पति न केवल भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों की नींव हैं, बल्कि इसकी जैविक और आर्थिक विरासत का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आयुर्वेद और अन्य आयुष प्रणालियों को मिल रही बढ़ती वैश्विक स्वीकृति यह प्रदर्शित करती है कि भारत गुणवत्तापूर्ण औषधीय वनस्पतियों और पौधों पर आधारित स्वास्थ्य उत्पादों का एक प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनने की क्षमता रखता हैउन्होंने कहा कि चिंतन शिविर का विषय सरकार के विकसित भारतऔर आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य सतत आजीविका के माध्यम से ग्रामीण समुदायों का सशक्तिकरण करना है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि औषधीय वनस्पतियों का क्षेत्र किसानों, उद्यमियों और शोधकर्ताओं को एक स्वस्थ और आत्मनिर्भर भारत के लिए सहयोग करने के अनूठे अवसर प्रदान करता है। उद्घाटन सत्र के दौरान, उन्होंने एनएमपीबी के 25 गौरवशाली वर्षों के उपलक्ष्य में स्मारिका, टेरेस गार्डन पुस्तिका का विमोचन किया और सीएसआईआर-सीआईएमएपी, लखनऊ द्वारा विकसित एनासाइक्लस पाइरेथ्रम की एक नई किस्म का भी अनावरण किया। उन्होंने एनएमपीबी और एआईआईए के बीच सहयोगात्मक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर प्रक्रिया में भी भाग लिया।
श्री जाधव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार ने औषधीय वनस्पतियों की खेती और उनके सतत उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई पहल शुरू की हैं। उन्होंने बताया कि एनएमबीपी जैसी संस्थाएं किसानों को विशेष रूप से वर्षा आधारित और कम उपजाऊ जमीन पर उच्च मूल्य वाली औषधीय फसलें उगाने में सहायता कर रही हैं। इन प्रयासों से न केवल किसानों की आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि यह पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और जन स्वास्थ्य सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने पिछड़े और अग्रगामी संबंधों को मजबूत करने, बाजार पहुंच को विस्तारित करने और आपूर्ति श्रृंखला में गुणवत्ता व प्रामाणिकता सुनिश्चित करने में एनएमपीबी के समर्पित प्रयासों की सराहना की। केंद्रीय मंत्री ने सभी हितधारकों से आग्रह किया कि वे एकजुट होकर ऐसे औषधीय वनस्पतियों के क्षेत्र को विकसित करने के लिए काम करते रहें, जो न केवल वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल और आर्थिक रूप से सशक्त भी हो, साथ ही देश के किसानों और समाज की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को भी पूरा कर सके। आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने अपने संबोधन में इस बात पर बल दिया कि एनएमबीपी की रजत जयंती न केवल उपलब्धि है, बल्कि आत्मनिरीक्षण और नवाचार का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि अब अगले चरण में वैज्ञानिक प्रमाणीकरण, पता लगाने की क्षमता और जलवायु अनुकूलन पर ध्यान केंद्रित करना होगा ताकि भारत की विविध औषधीय वनस्पतियों का संरक्षण और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उनका सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रालय संबंधित हितधारकों के बीच बेहतर तालमेल के लिए क्षेत्रीय सुविधा केंद्रों, अनुसंधान साझेदारियों और डिजिटल संपर्कों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। शिक्षा जगत, उद्योग और किसानों के बीच सहयोग पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि इस चिंतन शिविर से प्राप्त परिणाम इस क्षेत्र को अधिक उत्पादकता, समावेशिता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम बनाने हेतु एक पंवर्षीय रोडमैप का आधार प्रदान करेंगे।आयुष मंत्रालय के अपर सचिव और वित्तीय सलाहकार श्री होवेदा अब्बास ने एनएमपीएफ परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए सुदृढ़ वित्तीय अनुशासन और समय पर निधियों की निकासी पर बल दिया। उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय प्रबंधन और स्थिरता के नवीन मॉडल अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया, साथ ही औषधीय वनस्पतियों की खेती में लगे स्थानीय समुदायों तक पहुंच बढ़ाने का भी आग्रह किया। उन्होंने एनएमपीएफ की पहलों को लेकर मंत्रालय की ओर से निरंतर संस्थागत और वित्तीय समर्थन प्रदान करने का भरोसा दिलाया।एनएमपीबी के सीईओ डॉ. महेश कुमार दाधीच ने मार्गदर्शन और मंत्रालय के निरंतर सहयोग के लिए मंत्री महोदय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि चिंतन शिविर की परिकल्पना पिछले 25 वर्षों की उपलब्धियों की समीक्षा करने और इस क्षेत्र के भविष्य के विकास की योजना बनाने के लिए की गई थी। संरक्षण, क्षमता निर्माण और अनुसंधान प्रोत्साहन में एनएमपीबी के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि बोर्ड नवाचार, हितधारकों की भागीदारी और स्थायी नियमों के माध्यम से खेती से लेकर बाजार तक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।चिंतन शिविर के उद्घाटन सत्र के दौरान, राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) की 25वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं और सहयोगात्मक कार्य किए गए। एनएमपीबी की 25 वर्षों की यात्रा को दर्शाने वाली स्मारक पुस्तिका का अंग्रेजी संस्करण और औषधीय वनस्पतियों के संवर्धन में उपलब्धियों और सर्वोत्तम विधियों को प्रदर्शित करने वाली टेरेस गार्डन पुस्तिका का विमोचन किया गया।

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