2027 चुनाव से पहले संगठन मजबूत करने की चुनौती
संजय मिश्र।
देवरिया। विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश संगठन में नेतृत्व परिवर्तन किया है। रामपुर खास विधानसभा सीट से लगातार तीन बार निर्वाचित विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनकी नई भूमिका में संगठन को आगामी चुनाव की तैयारियों के लिए सक्रिय करना प्रमुख चुनौती होगी। आराधना मिश्रा “मोना” को कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त करने पर,भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के किसान कांग्रेस के जिला कोषाध्यक्ष देवरिया ,प्रताप नारायण दीक्षित ने दी शुभकामनाएं।

आराधना मिश्रा करीब 54 वर्ष की हैं और वर्ष 2014 में रामपुर खास विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के जरिए उन्होंने सक्रिय चुनावी राजनीति में कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में भी रामपुर खास से जीत दर्ज की। वर्ष 2022 में विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने उन्हें विधानमंडल दल का नेता नियुक्त किया था। विधानसभा में कांग्रेस का पक्ष रखने वाली आराधना मिश्रा अब प्रदेश स्तर पर पार्टी संगठन की जिम्मेदारी संभालेंगी। उनके सामने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और चुनावी तैयारियों को गति देने की जिम्मेदारी होगी। मोना, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी की पुत्री हैं। प्रमोद तिवारी रामपुर खास विधानसभा क्षेत्र का नौ बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और लंबे समय से इस क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहे हैं।
कौन हैं मोना मिश्रा – कांग्रेस का भरोसेमंद चेहरा
आराधना मिश्रा ‘मोना’ का जन्म 20 अप्रैल 1974 को प्रयागराज में हुआ। वह कांग्रेस के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। 2014 के उपचुनाव में पहली बार रामपुर खास से विधायक बनीं और फिर 2017 और 2022 में लगातार जीत दर्ज कर हैट्रिक लगाई। विधानसभा में वह कांग्रेस विधायक दल की नेता भी रह चुकी हैं और प्रियंका गांधी की करीबी मानी जाती हैं।
एक तीर से दो निशाने – महिला और ब्राह्मण समीकरण
पार्टी ने एक महिला और ब्राह्मण समाज से आने वाली नेता को आगे करके दोहरा संदेश दिया है। यूपी में करीब 12% ब्राह्मण वोट और आधी आबादी के रूप में महिला वोट बैंक – दोनों को साधने की यह कोशिश कांग्रेस के लिए नई राजनीतिक जमीन तैयार कर सकती है। साथ में इमरान मसूद, देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को टीम में जोड़कर ब्राह्मण-मुस्लिम-पिछड़ा-दलित का संतुलित समीकरण भी बनाया गया है।
सबसे बड़ी चुनौती, सबसे बड़ा अवसर
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को बूथ स्तर तक फिर से मजबूत करने, पुराने कार्यकर्ताओं में नया उत्साह पैदा करने और जनता के बीच मौजूदगी को प्रभावी बनाने की है। और यहीं मोना मिश्रा के सामने सबसे बड़ा अवसर भी है। हारी हुई नहीं, जीती हुई सीट से आने वाली नेता होने से कार्यकर्ताओं में उनका भरोसा ज्यादा है। अगर वे पुराने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, नए चेहरों को जोड़ने और विशेषकर महिलाओं तथा युवाओं की भागीदारी बढ़ाने में सफल रहती हैं, तो कांग्रेस के लिए 2027 से पहले संगठन खड़ा हो सकता है।
अग्नि परीक्षा होगी 2027
आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपे जाने को पार्टी में महिला नेतृत्व को प्रमुखता देने के कदम के तौर पर भी देखा जा रहा है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान में मोना की सक्रिय भागीदारी रही थी। पार्टी संगठन में वह लंबे समय से महिला नेतृत्व के प्रमुख चेहरों में शामिल रही हैं।
प्रदेश अध्यक्ष की नई भूमिका में उनके सामने संगठनात्मक जिम्मेदारियों के साथ कई राजनीतिक चुनौतियां भी होंगी। महिला मतदाताओं तक पार्टी की पहुंच मजबूत करना, स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और कांग्रेस के मुद्दों को बूथ स्तर तक ले जाना उनके लिए महत्वपूर्ण कार्य होंगे। इन प्रयासों का आगामी चुनाव पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह संगठन के कामकाज और चुनावी परिस्थितियों के साथ ही स्पष्ट होगा। फिलहाल प्रदेश में विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच पार्टी की मौजूदगी और संपर्क बढ़ाने पर कांग्रेस का जोर दिखाई दे रहा है।
हालांकि कांग्रेस के लिए यूपी में अपना खोया हुआ आधार वापस पाना आसान नहीं होगा। अब देखना होगा कि पिता की अजेय सियासी बिसात के सहारे राजनीति में पहचान बनाने वाली मोना, उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में कांग्रेस के लिए कितनी नई जमीन तैयार कर पाती हैं। यह नई जिम्मेदारी कांग्रेस पार्टी और उनके राजनीतिक सफर के लिए सबसे बड़ी अग्नि परीक्षा होगी।

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सराहनीय।