- योगी सरकार की पहल, शिक्षकों को सशक्त करने के लिए एआई आधारित रणनीति पर जोर
- एआई विकल्प नहीं, शिक्षकों को सशक्त करने का माध्यम — अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा
- रटने की बजाय नवाचार आधारित शिक्षा पर फोकस, ग्रामीण छात्रों को मिलेगा तकनीकी लाभ – महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी
- 34 लाख बच्चों तक पहुंचा एआई मॉडल, 19 हजार स्कूलों में शिक्षकों को मिला प्रशिक्षण
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक एवं तकनीक आधारित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह के निर्देशन में लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ‘एआई फॉर एजुकेशन इम्पैक्ट’ स्टेट एक्शन डायलॉग का आयोजन किया गया, जिसमें परिषदीय विद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग को बढ़ावा देने पर व्यापक चर्चा हुई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि एआई को लेकर एक व्यापक और दीर्घकालिक रणनीति बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एआई शिक्षकों का विकल्प नहीं, बल्कि उन्हें सशक्त करने का माध्यम है। संपर्क फाउंडेशन का एआई मॉडल शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में एआई नई पहचान बन चुका है, इसलिए बेसिक शिक्षा के बच्चों को भी इस बदलाव से जोड़ना जरूरी है। बच्चों की मजबूत नींव के लिए यह पहल भविष्य की शिक्षा को नई दिशा देगी।
महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि बच्चे का निर्माण केवल पुस्तकों से नहीं, बल्कि शिक्षक के व्यक्तित्व से होता है और शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि भविष्य गढ़ना है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को एआई आधारित नवाचारों से परिचित कराना और उन्हें प्रशिक्षित करना है, ताकि विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा सके।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि पारंपरिक रटने वाली शिक्षा पद्धति से आगे बढ़ते हुए प्रायोगिक एवं नवाचार आधारित शिक्षा को अपनाया जाए। संपर्क फाउंडेशन के सहयोग से इस पहल को परिषदीय विद्यालयों तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश के कई विद्यालयों में प्रवेश के प्रति बढ़ता उत्साह शिक्षकों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है। स्वयं शिक्षिका रहने के अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया एआई के साथ आगे बढ़ रही है और अब प्रदेश के शिक्षक एवं विद्यार्थी भी उसी गति से आगे बढ़ेंगे।
संपर्क फाउंडेशन के फाउंडर-चेयरमैन विनीत नायर ने कहा कि भविष्य की जरूरतों के अनुरूप छात्रों को तैयार करने के लिए एआई आधारित शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। फाउंडेशन द्वारा प्रदेश में अब तक 34 लाख से अधिक बच्चों तक पहुंच बनाई जा चुकी है तथा 19 हजार विद्यालयों में एक लाख से अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है। इसके अतिरिक्त, राज्य में 4,700 स्मार्ट कक्षाओं की स्थापना की जा चुकी है तथा 6,000 और स्मार्ट कक्षाएं स्थापित करने की योजना है।
कार्यक्रम में आयोजित पैनल चर्चाओं में शिक्षा प्रणाली में रियल-टाइम निर्णय-निर्माण, डेटा आधारित मॉनिटरिंग तथा छात्रों की सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने में एआई की भूमिका पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि एआई आधारित समाधान से कक्षा में छात्रों की सहभागिता बढ़ेगी और शिक्षण अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनेगा। प्रस्तावित एआई प्रणाली के माध्यम से विद्यालय, विकासखंड एवं जिला स्तर पर शिक्षा की निगरानी को और सुदृढ़ किया जाएगा। इससे कमजोर विद्यालयों की समय रहते पहचान कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे। कार्यक्रम में शिक्षा क्षेत्र के नीति-निर्माता, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक एवं एआई विशेषज्ञों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।
