रामलीला मैदान और धार्मिक स्थलों का विकास
लखनऊ/बरेली। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बुधवार को बरेली मंडल के पर्यटन विकास से जुड़े 32 प्रस्तावों की समीक्षा की। इन प्रस्तावों का उद्देश्य पर्यटन को बड़े शहरों से आगे बढ़ाकर स्थानीय धार्मिक स्थलों, सांस्कृतिक केंद्रों और सामुदायिक विरासत स्थलों तक पहुंचाना है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना में अब पर्यटन विभाग के 26 प्रस्ताव शामिल हैं। इनमें पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह की संस्तुति पर तीन नए प्रस्ताव भी जोड़े गए हैं। पर्यटन विभाग के प्रस्तावों में बरेली के 12, शाहजहांपुर के 8 तथा पीलीभीत और बदायूं के 3-3 प्रस्ताव शामिल हैं। बैठक में धार्मिक कार्य विभाग के 2 तथा संस्कृति विभाग के 3 प्रस्तावों की भी समीक्षा की गई।
‘परंपरा’ सेंटर और ईको-टूरिज्म को बढ़ावा
पर्यटन विभाग और धार्मिक कार्य विभाग की प्रस्तावित परियोजनाओं की अनुमानित लागत 35 करोड़ रुपये से अधिक है। समीक्षा के दौरान जनप्रतिनिधियों, विधायकों और जिला प्रशासन के साथ चर्चा के अलावा प्रस्तावित स्थलों तथा निर्माणाधीन परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण भी किया गया। जयवीर सिंह ने कहा कि पर्यटन परियोजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनका लाभ सीधे लोगों और पर्यटकों को मिलना चाहिए। परियोजनाओं के चयन में जन उपयोगिता, ऐतिहासिक एवं धार्मिक प्रमाण, भूमि की उपलब्धता और क्रियान्वयन की तैयारी को प्राथमिक आधार बनाया जाएगा।
बैठक में बरेली मंडल के लिए प्रस्तावित ‘परंपरा’ पर्यटन एवं संस्कृति वन-स्टॉप सेंटर विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इस परियोजना का उद्देश्य मंडल के प्रमुख पर्यटन स्थलों, धार्मिक विरासत और सांस्कृतिक परंपराओं को एक साझा पहचान देना है।
चार जिलों में फैले पर्यटन स्थलों को एकीकृत मंच उपलब्ध कराने वाली यह पहल कम प्रसिद्ध स्थलों को भी व्यापक पर्यटन परिपथ से जोड़ने में सहायक होगी। इससे बरेली मंडल की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
बैठक में बरेली के सीबीगंज क्षेत्र में प्रस्तावित लगभग 7 करोड़ रुपये की ईको-टूरिज्म परियोजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई। परियोजना के तहत हरित क्षेत्र, गज़ेबो, प्राकृतिक भ्रमण पथ और पर्यावरण-अनुकूल सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देना और लोगों के लिए एक आकर्षक मनोरंजन स्थल विकसित करना है।
पर्यटन विभाग के अन्य प्रस्तावों में विभिन्न मंदिरों, आश्रमों, गुरुद्वारों और स्थानीय धार्मिक स्थलों पर बुनियादी पर्यटक सुविधाओं के विकास का प्रस्ताव है। इनमें बहुउद्देशीय भवन, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, क्यूआर कोड आधारित सूचना प्रणाली, बैठने की व्यवस्था, साइनेज और सौंदर्यीकरण जैसे कार्य शामिल हैं।
नाथ कॉरिडोर परियोजना की हुई समीक्षा
जिलेवार प्रस्तावों में पीलीभीत और बदायूं के तीन-तीन धार्मिक स्थलों को शामिल किया गया है। बरेली के 12 प्रस्तावों में बालाजी मंदिर, श्री चित्रगुप्त धाम, संजय नगर गुरुद्वारा, काली माता मंदिर और काली देवी मंदिर सहित पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह की संस्तुति पर जोड़े गए तीन नए प्रस्ताव शामिल हैं। शाहजहांपुर के आठ प्रस्तावों में सुनासिर नाथ मंदिर, बाबा विश्वनाथ मंदिर, हनुमंत धाम और परशुराम पुरी मंदिर परिसर प्रमुख हैं।
मंत्री ने बरेली में निर्माणाधीन ‘नाथ कॉरिडोर’ परियोजना की प्रगति की भी समीक्षा की। अलखनाथ मंदिर, तुलसी मठ, तपेश्वर नाथ सहित अन्य प्रमुख नाथ मंदिरों में विकास कार्य जारी हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के अनुसार पूरे किए जाएं ताकि नवंबर के अंत अथवा दिसंबर 2026 के मध्य तक श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक समेकित आध्यात्मिक पर्यटन परिपथ उपलब्ध कराया जा सके।
धार्मिक कार्य विभाग के अंतर्गत मीरगंज स्थित शिव मंदिर तथा दातागंज के देवी स्थल के संरक्षण एवं विकास का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। जिला प्रशासन के अनुसार मीरगंज में जन्माष्टमी और महाशिवरात्रि पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, जबकि दातागंज स्थित देवी स्थल पर प्रतिवर्ष विशाल मेले का आयोजन होता है।
