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UP Government Deregulation 2.0: ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए नियम आसान करने पर बड़ा जोर

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ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ाने पर जोर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में व्यापारिक माहौल को और अधिक पारदर्शी, सरल और निवेशक-अनुकूल बनाने के लिए सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। इसी सिलसिले में लखनऊ के लोक भवन में ‘कम्प्लायंस रिडक्शन एवं डीरेग्युलेशन 2.0’ (नियमों व प्रक्रियाओं को आसान बनाने) को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में भारत सरकार के एमएसएमई (MSME) मंत्रालय के सचिव भारत हरबंसलाल खेरा के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। इस दौरान कागजी औपचारिकताओं को कम करने और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को जमीनी स्तर पर और आसान बनाने के लिए राज्य में चल रहे सुधारों की गहन समीक्षा की गई।”

निवेशकों के लिए सरल होगी प्रक्रिया

बैठक में नियामकीय प्रक्रियाओं के सरलीकरण, अनुपालनों के बोझ को कम करने तथा कारोबार सुगमता के पूरे इकोसिस्टम को सरल बनाने के उद्देश्य से चल रहे सुधारों की प्रगति का आकलन किया गया। इस दौरान राजस्व, स्वास्थ्य, चिकित्सा, पर्यटन, ऊर्जा, अग्निशमन, शहरी विकास, पर्यावरण, श्रम एवं औद्योगिक विकास सहित 23 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों ने प्रक्रियागत बाधाओं को समाप्त करने, अनुमोदन प्रणाली को सरल बनाने तथा उद्योगों और नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी एवं समयबद्ध बनाने पर विचार-विमर्श किया।

मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने कहा, “डीरेग्युलेशन 2.0 के तहत चिन्हित प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में तेजी से कार्य करना होगा। प्रत्येक विभाग अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल बनाए, अनावश्यक अनुपालनों को समाप्त करे और सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक तेज, सरल एवं पारदर्शी बनाए। कारोबार सुगमता केवल नीतिगत सुधारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका प्रभाव निवेशकों और नागरिकों को मिलने वाली सेवाओं में भी स्पष्ट दिखाई देना चाहिए।”

गौरतलब है कि कम्प्लायंस रिडक्शन एवं डीरेग्युलेशन के प्रथम चरण में उत्तर प्रदेश ने सभी राज्यों में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। राज्य ने अनुमोदन संबंधी बाधाओं को दूर कर कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने की दिशा में उल्लेखनीय सुधार किए हैं।

बैठक के दौरान विभिन्न विभागों ने डीरेग्युलेशन 2.0 के अंतर्गत किए गए सुधारों की प्रगति प्रस्तुत की तथा शेष प्रस्तावित सुधारों के लिए समय-सीमा साझा की। यह पहल राज्य में पूर्व में लागू किए गए व्यापक कम्प्लायंस रिडक्शन कार्यक्रम का विस्तार है, जिसके तहत भूमि प्रशासन, भवन निर्माण स्वीकृतियां, श्रम कानून, उपयोगिता सेवाओं और अन्य नियामकीय प्रक्रियाओं में व्यापक सुधार किए गए। इन सुधारों से अनुपालनों में उल्लेखनीय कमी आई है, प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण बढ़ा है तथा निवेशकों के लिए सुविधा तंत्र और अधिक सुदृढ़ हुआ है।

लोक भवन में आयोजित बैठक में अपर मुख्य सचिव, पर्यटन एवं संस्कृति अमृत अभिजात, अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अमित कुमार घोष, प्रमुख सचिव, श्रम एवं सेवायोजन शनमुग सुंदरम, निदेशक, यूपीनेडा रवीन्द्र सिंह सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं अन्य हितधारक उपस्थित रहे।

इस बैठक के उपरान्त इन्वेस्ट यूपी कार्यालय में कम्प्लायंस रिडक्शन एवं डीरेग्युलेशन 2.0 पर उद्योग संघों के साथ बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय के सचिव भारत हरबंसलाल खेरा ने की। बैठक में भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय के अपर सचिव राहुल शर्मा सहित एमएसएमई मंत्रालय, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT), नीति आयोग, इन्वेस्ट यूपी तथा प्रमुख औद्योगिक संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक में एसोचैम (ASSOCHAM), फिक्की (FICCI), सीआईआई (CII), पीएचडी चैंबर, आईआईए (IIA), लघु उद्योग भारती तथा डिक्की (DICCI) के प्रतिनिधियों ने उद्योग जगत की ओर से सुझाव साझा किए। उन्होंने नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने, अनुपालनों के बोझ को कम करने तथा उत्तर प्रदेश में उद्योगों के लिए अधिक अनुकूल कारोबारी वातावरण विकसित करने पर अपने विचार रखे।

बैठक में भारत सरकार की कम्प्लायंस रिडक्शन एवं डीरेग्युलेशन 2.0 टास्क फोर्स द्वारा चिन्हित प्रमुख सुधार क्षेत्रों की समीक्षा की गई। इनमें अग्नि सुरक्षा स्वीकृतियां, विद्युत वितरण, भूमि प्रबंधन तथा तकनीक आधारित सरल नियामकीय व्यवस्था के माध्यम से औद्योगिक उपयोग के लिए भूमि उपलब्ध कराने जैसे विषय शामिल रहे। प्रतिभागियों ने उद्योगों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए समयबद्ध, सहयोगात्मक और प्रभावी सुधारों को आगे बढ़ाने पर बल दिया, जिससे कारोबार सुगमता और अधिक सशक्त हो सके।

बैठक में एमएसएमई मंत्रालय के निदेशक अंकित अग्रवाल, डीपीआईआईटी के उप सचिव राजेश कुमार सिन्हा, नीति आयोग की यंग प्रोफेशनल दीक्षा बिस्वास, इन्वेस्ट यूपी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विजय किरण आनंद तथा अतिरिक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी प्रेरणा शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस परामर्श बैठक ने केंद्र और राज्य सरकार की पारदर्शी, दक्ष और निवेशक-अनुकूल नियामकीय व्यवस्था विकसित करने की साझा प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।

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