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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने ‘सुमन रोडमैप 2030’ लॉन्च किया

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भारत में मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य सुधार की बड़ी पहल

डेस्क। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज ‘सुमन रोडमैप 2030’ का शुभारंभ किया। यह एक व्यापक और भविष्योन्मुखी रणनीतिक ढांचा है, जिसका उद्देश्य देश भर में मातृ और नवजात शिशु स्वास्थ्य देखभाल में बदलाव लाना और 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने की दिशा में भारत की प्रगति में तेजी लाना है।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल और प्रतापराव जाधव, राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्रियों, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य गणमान्य प्रतिनिधियों की उपस्थिति में, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (सीसीएचएफडब्ल्यू) के 16वें सम्मेलन के दौरान इस रोडमैप का अनावरण किया गया।

भारत ने पिछले एक दशक में निरंतर नीतिगत बदलावों और मजबूत हेल्थकेयर डिलीवरी सिस्टम के माध्यम से मातृ और नवजात शिशु स्वास्थ्य में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। हालाँकि, इस महत्वपूर्ण प्रगति के बावजूद, कुछ भौगोलिक क्षेत्रों, विशेष रूप से उच्च-प्राथमिकता वाले राज्यों में मातृ और नवजात शिशु मृत्यु दर अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। अधिक लक्षित और अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से काम करने की आवश्यकता को पहचानते हुए, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ‘सुमन रोडमैप 2030’ तैयार किया है। यह एक साक्ष्य-आधारित रणनीति है, जो देश भर में समान और उच्च गुणवत्ता वाली मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को स्थानीय वास्तविकताओं के साथ जोड़ती है।

RMNCHA+N फ्रेमवर्क पर आधारित सुमन रोडमैप 2030 से मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार

RMNCHA+N फ़्रेमवर्क पर आधारित यह रोडमैप जीवन-चक्र के हर चरण को ध्यान में रखने वाला एक व्यापक तरीका अपनाता है। इसमें गर्भावस्था से पहले, गर्भावस्था के दौरान, प्रसव और प्रसव के बाद की देखभाल को शामिल किया गया है, साथ ही बच्चों की सेहत, किशोरों की सेहत, परिवार नियोजन और पोषण कार्यक्रमों के साथ तालमेल भी बिठाया गया है। इस फ़्रेमवर्क को प्रजनन और मातृ स्वास्थ्य से जुड़ी देखभाल के हर चरण में बिना किसी रुकावट के, व्यक्ति-केंद्रित सेवाएँ देने के लिए तैयार किया गया है।

इस रोडमैप की एक खास बात यह है कि इसमें हाई-रिस्क प्रेगनेंसी की पहचान, ट्रैकिंग और मैनेजमेंट के लिए एक व्यवस्थित तरीका अपनाया गया है। इसमें चार अहम चरणों—प्रेगनेंसी के दौरान देखभाल, तीसरी तिमाही की देखभाल, प्रसव के दौरान देखभाल और प्रसव के बाद की देखभाल—पर ध्यान दिया जाता है, जिससे समय पर जरूरी कदम उठाए जा सकें और बेहतर क्लिनिकल नतीजे मिल सकें। प्रोग्राम को लागू करने के दौरान मिले फील्ड अनुभव और साक्ष्यों के आधार पर, यह रणनीति कई चुनौतियों का भी समाधान करती है। इनमें ट्रांसपोर्टेशन, जनजातीय और दुर्गम इलाकों में हेल्थकेयर तक पहुँच, अच्छी क्वालिटी की इमरजेंसी प्रसूति देखभाल, ‘सुमन पंचायतों’ के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी और माँ व नवजात शिशु की सेहत पर जलवायु परिवर्तन का बढ़ता असर शामिल हैं।

सुमन रोडमैप 2030: 13 राज्यों में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सुधार के लिए विशेष अभियान

जहाँ मातृ और नवजात मृत्यु दर सबसे अधिक है, वहां सुधारों में तेजी लाने के लिए यह रोडमैप 13 उच्च-प्राथमिकता वाले राज्यों- असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल—के 130 जिलों में केंद्रित और समयबद्ध उपाय शुरू करता है। साथ ही, यह सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रगति को बनाए रखने और गुणवत्तापूर्ण मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की सार्वभौमिक पहुंच प्राप्त करने की रणनीतियों को भी रेखांकित करता है।

खास तौर पर चुने गए राज्यों के लिए, इस रोडमैप में कई तरह के उपायों का एक पूरा पैकेज सुझाया गया है। इसमें गर्भवती महिलाओं के लिए ‘सुमन’ पैकेज शामिल है, जिसका मकसद है – जल्दी रजिस्ट्रेशन, पूरी एंटीनेटल केयर (प्रसव-पूर्व देखभाल), अच्छी क्वालिटी की क्लिनिकल जांच और प्रसव के बाद अस्पताल में पर्याप्त समय तक रुकना। इसमें गर्भावस्था के आठवें और नौवें महीने में आशा कार्यकर्ताओं द्वारा हर दो हफ़्ते में घर जाकर जांच करने का भी प्रावधान है, ताकि खतरे के संकेतों की जल्दी पहचान हो सके, पोषण के बारे में सलाह मिल सके, प्रसव की तैयारी हो सके और अस्पताल में डिलीवरी सुनिश्चित की जा सके। अन्य उपायों में प्रसव के बाद के नाजुक समय में देखभाल करने वालों के लिए आर्थिक मदद, प्रसव से जुड़ी इमरजेंसी के दौरान रेफरल ट्रांसपोर्ट के लिए खास प्रोत्साहन, और मुश्किल व कम सुविधा वाले इलाकों में ‘बर्थ वेटिंग होम’, ‘मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग’, ‘ऑब्स्टेट्रिक हाई डिपेंडेंसी यूनिट’ और ‘इंटेंसिव केयर यूनिट’ बनाकर स्वास्थ्य सुविधाओं के ढांचे को मजबूत करना शामिल है।

सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए, यह रोडमैप माँ और नवजात शिशु की हेल्थकेयर को और बेहतर बनाने के लिए कई तरह के उपाय करने की योजना बनाता है। इनमें शामिल हैं: गर्भवती होने की योजना बना रही महिलाओं के लिए फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन के ज़रिए प्रेग्नेंसी से पहले की देखभाल को संस्थागत बनाना, माँ में एनीमिया और कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए पोषण संबंधी उपायों का विस्तार करना, देखभाल की पूरी प्रक्रिया के दौरान हाई-रिस्क वाली प्रेग्नेंसी की निगरानी और प्रबंधन को मज़बूत करना और ‘सुमन पंचायत’ और ‘मदर्स पिकनिक’ जैसी पहलों के ज़रिए समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा देना। यह रणनीति ‘मैटरनल डेथ सर्विलांस एंड रिस्पॉन्स’ (एमएसडीआर) और ‘मैटरनल नियर मिस’ (एमएनएम) की समीक्षाओं को मज़बूत करने, प्रसव के दौरान होने वाले अत्यधिक रक्तस्राव (ऑब्स्टेट्रिक हैमरेज) के प्रबंधन के लिए ‘नॉन-न्यूमैटिक एंटी-शॉक गारमेंट्स’ (एमएएसजी) का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल, एआई-सक्षम लेबर रूम, ‘जननी पोर्टल’ के ज़रिए बेहतर डिजिटल निगरानी; गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए जलवायु-अनुकूल योजना; सिजेरियन सेक्शन की प्रक्रियाओं को बेहतर बनाना; और जन्म से लेकर 36 महीने तक के बच्चों को घर पर ही निर्बाध देखभाल देने के लिए ‘समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम’ (एसएसबीएसके) को शामिल करने पर भी जोर देती है।

सुमन रोडमैप 2030 से भारत में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा सशक्तिकरण

प्रभावी कार्यान्वयन और निरंतर परिणामों को सुनिश्चित करने के लिए, यह रोडमैप मातृ और नवजात शिशु स्वास्थ्य देखभाल के लिए ‘सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस’ के विकास, शिकायत निवारण के लिए एक केंद्रीकृत ‘सुमन कॉल सेंटर’ की स्थापना, स्वास्थ्य सुविधाओं के बीच मजबूत रेफरल संपर्क और ‘जननी पोर्टल’ के माध्यम से डिजिटल निगरानी और रिपोर्टिंग के मजबूत तंत्र की परिकल्पना करता है।

‘सुमन रोडमैप 2030’ साक्ष्य-आधारित उपायों, डिजिटल नवाचार, हेल्थ सिस्टम को मजबूत करने और सामुदायिक भागीदारी के संयोजन के माध्यम से मातृ स्वास्थ्य, नवजात शिशु देखभाल, परिवार नियोजन और पोषण सेवाओं को मजबूत करने के लिए एक परिवर्तनकारी राष्ट्रीय रणनीति का प्रतिनिधित्व करता है। RMNCHA+N फ़्रेमवर्क के तहत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के ‘मैटरनल हेल्थ डिवीजन’ के नेतृत्व में, यह पहल 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने की दिशा में भारत की प्रगति में तेजी लाने का प्रयास करती है।

इस रोडमैप का लक्ष्य वर्ष 2030 तक मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) को प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर 70 से कम करना, नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) और शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) को और अधिक नीचे लाना, सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं की पूरी उपलब्धता सुनिश्चित करना और मातृ एवं नवजात शिशुओं की ऐसी मृत्यु को पूरी तरह रोकना, जिन्हें उचित देखभाल से बचाया जा सकता है।

‘सुमन रोडमैप 2030’ का शुभारंभ सुरक्षित मातृत्व और स्वस्थ नवजात शिशुओं को सुनिश्चित करने के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। वैज्ञानिक प्रमाणों, लक्षित उपायों, मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियों और सक्रिय सामुदायिक भागीदारी को एक साथ लाकर, यह रोडमैप एक अधिक मजबूत, न्यायसंगत और संवेदनशील मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवा इकोसिस्टम की नींव रखता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हर माँ और नवजात शिशु को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिले और कोई भी इससे वंचित न रहे।

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